बड़ी खबरराजस्थान

“ऋक्षपर्वत से अरावली तक” : विनाश के कगार पर हमारी प्राचीन पर्वतमाला- आचार्य माधव शास्त्री(पुष्कर)

लेखन-आचार्य माधव शास्त्री जी (पुष्कर)

अरावली पर्वतमाला। वैदिक और पौराणिक नाम ऋक्षपर्वतश्रेणी कहा गया है जहां रीछ बहुतायत में पाए जाते थे जिसने मरुस्थल भूमि और उपजाऊ भूमि को विभक्त किया है जिसके कारण पश्चिम दिशा में रेगिस्तान और पूर्व दिशा में मेवाड़ की समतलीय मैदानी भूमि स्थित है सबसे पहले इस श्रृंखला ने बढ़ते हुए मरुस्थल को रोकने में सहायक रही।

क्योंकि पूर्व काल में मरुभूमि में जन संचार नहीं के समान था और यहां का पानी भी पेय नहीं था इसलिए इस क्षेत्र को कृषि योग्य भूमि नहीं मानते थे धीरे-धीरे अरावली की तलहटियों से होते हुए मरुभूमि में निवास करने का साहस करने लगे।

सुरक्षा की दृष्टि से भी अरावली पर्वतमाला अलंघनीय थी और इसकी सुरक्षा का दायित्व तत्कालीन क्षत्रिय वंशजों का था जिनके द्वारा अरावली पर्वत श्रृंखला की सार-संभाल की गई और सुरक्षा हेतु अनेकों दुर्गों का निर्माण करवाया।


आजकल विकास कार्य नाम से इस पर्वत श्रृंखला को तोडते हुए विनष्ट किया जा रहा है कई छोटी छोटी टेकरियों के अस्तित्व खतरा बहुत ही बढ़ गया है जिसके कारण खनन के अवेध और वेध दोहन केवल कारण अवशेष मात्र रह गईं हैं और अनेक समतल कर दी गईं हैं।


पवित्र पुष्कर सरोवर के समीप अवस्थित नाग पर्वतमाला को भी सिरे से तोड़ दिया गया है जो अजापाल की श्रृंखला के समीप है। मनुष्य कुछ समय के लिए ही इस धरा पर जन्मता है लेकिन सभी काम विनाशकारी करता हैं इन्हें हरसंभव वर्जने का प्रभावी नेतृत्व करते हुए पुरातनीय ऋक्ष पर्वत श्रृंखला को नष्ट-भ्रष्ट करने के कुप्रयास को तत्काल रोक लगानी चाहिए क्योंकि यह हमारी अमूल्य ऐतिहासिक धरोहर है जिसके लिए अनेकों वर्गों ने अपने रक्त के बलिदानों से इसकी सुरक्षा की है।

अरावली पर्वत श्रृंखला के अन्तर्गत छोटी मोटी पहाड़ियां भी इस वीर भूमि पर स्थित रहीं हैं अतः उनकी भी सुरक्षा करना हमारा कर्तव्य और दायित्व है क्योंकि इनके समूह को घाटा भी कहा जाता है जैसे बर का घाटा ,फुलाद का घाटा आदि अनेक घाटे जन-मानस के अन्तःकरण से जुड़े हुए हैं इसलिए इनका क्षरण या तोड़ना निश्चित ही पर्यावरणीय असन्तुलन का उदाहरण है जिसको तुरन्त प्रभाव से रोकने के लिए अपील की जाती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!

AdBlock निष्क्रिय करें

प्रिय उपयोगकर्ता,

कृपया बेहतर अनुभव के लिए अपना AdBlock बंद (Deactivate) करें।

हमारी वेबसाइट को चलाने और आपको मुफ़्त सामग्री प्रदान करने में विज्ञापनों की सहायता होती है।

कृपया AdBlock को बंद करके पेज को रिफ्रेश करें।

आपका सहयोग हमारे लिए महत्त्वपूर्ण है।

धन्यवाद! 🙏