
सोजत न्यूज़ | वरिष्ठ पत्रकार: ओमप्रकाश बोराणा
भारत में देसी गाय का घी सदियों से भोजन और आयुर्वेदिक परंपरा का अहम हिस्सा रहा है। आयुर्वेद में घी को “सत्ववर्धक” और “ओज बढ़ाने वाला” माना गया है। हाल ही में सोशल मीडिया और जनचर्चा में देसी गाय के घी के 30 अद्भुत फायदों की सूची तेजी से वायरल हो रही है।
लेकिन सवाल यह है — क्या ये सभी दावे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित हैं? आइए विस्तार से समझते हैं।
🔍 वायरल दावों में क्या-क्या कहा गया?
लोकप्रिय दावों के अनुसार देसी गाय का घी:
नाक में डालने से मानसिक रोग, एलर्जी, लकवा, माइग्रेन, कोमा आदि में लाभ देता है।
कान का पर्दा बिना ऑपरेशन ठीक कर सकता है।
कैंसर, हार्ट अटैक और कोलेस्ट्रॉल जैसी गंभीर बीमारियों से बचाता है।
वजन घटाने और बढ़ाने दोनों में मदद करता है।
स्मरण शक्ति, मानसिक शांति और वीर्यवृद्धि करता है।
सांप के काटने पर विष को कम करता है।
त्वचा रोग, सोरायसिस और फफोले ठीक करता है।
आंखों की रोशनी बढ़ाता है।
🧪 क्या कहता है विज्ञान?
✔️ संभावित लाभ (सीमित वैज्ञानिक समर्थन के साथ)
1. पाचन में सहायक – सीमित मात्रा में घी में मौजूद शॉर्ट-चेन फैटी एसिड (जैसे ब्यूट्रिक एसिड) आंतों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकते हैं।
2. ऊर्जा का अच्छा स्रोत – घी में हेल्दी फैट और फैट-सॉल्यूबल विटामिन (A, D, E, K) पाए जाते हैं।
3. त्वचा की नमी – बाहरी रूप से लगाने पर सूखी त्वचा में अस्थायी राहत मिल सकती है।
4. आयुर्वेदिक नस्य क्रिया – आयुर्वेद में नाक में घी डालने की विधि (नस्य) वर्णित है, लेकिन यह विशेषज्ञ की देखरेख में ही की जानी चाहिए।
जिन दावों पर वैज्ञानिक प्रमाण नहीं
घी से कैंसर का इलाज या रोकथाम
हार्ट अटैक के मरीजों के लिए सुरक्षित विकल्प
सांप के काटने पर विष कम करना
कान का पर्दा बिना ऑपरेशन ठीक करना
कोमा से बाहर लाना
लकवा, मानसिक रोग या माइग्रेन का पूर्ण उपचार
विशेषज्ञों का स्पष्ट मत है कि इन गंभीर स्थितियों में केवल घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहना खतरनाक हो सकता है।
❤️ कोलेस्ट्रॉल और घी
घी में संतृप्त वसा (Saturated Fat) अधिक मात्रा में होती है। अधिक सेवन से LDL (खराब कोलेस्ट्रॉल) बढ़ सकता है।
हालांकि, सीमित मात्रा (प्रति दिन 1–2 चम्मच) स्वस्थ व्यक्ति के लिए सामान्यतः सुरक्षित मानी जाती है, बशर्ते कुल आहार संतुलित हो।
सावधानियां
हृदय रोग, उच्च कोलेस्ट्रॉल, मोटापा या मधुमेह के मरीज डॉक्टर की सलाह के बिना अधिक घी का सेवन न करें।
नाक, कान या आंख में कोई भी पदार्थ डालने से पहले चिकित्सकीय सलाह लें।
सांप काटने, हार्ट अटैक या कोमा जैसी आपात स्थितियों में तुरंत अस्पताल जाएं — घरेलू उपचार पर निर्भर न रहें।
🧘 परंपरा बनाम विज्ञान – संतुलन जरूरी
देसी गाय का घी भारतीय संस्कृति और आयुर्वेद का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सीमित मात्रा में शुद्ध घी संतुलित आहार का भाग हो सकता है।
लेकिन “चमत्कारी इलाज” के रूप में प्रचारित सभी दावे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं हैं।
देसी गाय का घी एक पौष्टिक आहार है, परंतु इसे हर रोग की रामबाण औषधि मान लेना सही नहीं।
स्वास्थ्य के मामले में संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और चिकित्सकीय परामर्श ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।
*सोजत न्यूज़ की अपील:
स्वास्थ्य संबंधी किसी भी वायरल संदेश पर आंख मूंदकर विश्वास न करें — पहले जांचें, समझें और विशेषज्ञ से सलाह लें।*




