अगर हरिद्वार या प्रयागराज से लेने जा रहे हैं गंगाजल, तो पहले जान लें ये जरूरी धार्मिक नियम
सनातन परंपरा में गंगाजल का महत्व, विधि और नियमों की पूरी जानकारी

सनातन धर्म में जल को जीवन और पवित्रता का आधार माना गया है। हिंदू धर्म में नदियों, सरोवरों और समुद्रों का विशेष महत्व है, लेकिन इन सभी में मां गंगा का जल सर्वोच्च और सर्वाधिक पूजनीय माना गया है। यही कारण है कि हरिद्वार, प्रयागराज, काशी और गंगोत्री जैसे पवित्र तीर्थों से गंगाजल लाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मां गंगा का अवतरण भगवान विष्णु के चरण कमलों से हुआ, इसलिए गंगाजल को श्रीहरि का चरणामृत कहा जाता है। यही कारण है कि गंगाजल वर्षों तक सुरक्षित रहता है और खराब नहीं होता। हालांकि, इस पवित्र जल को घर लाने और रखने के लिए कुछ विशेष धार्मिक नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करना अत्यंत आवश्यक माना गया है।
⚜️ घर में कैसे लाएं गंगाजल
हिंदू धर्मग्रंथों और परंपराओं के अनुसार जब भी गंगाजल लेने जाएं तो पहले गंगा तट पर स्नान कर स्वयं को शुद्ध करें। इसके बाद ही गंगाजल भरना शुभ माना जाता है।
गंगाजल को प्लास्टिक की बोतल या डिब्बे में लाने से बचें।
इसे कांसे, पीतल या तांबे के पात्र में ही भरकर लाना चाहिए।
मान्यता है कि जिस पात्र में गंगाजल भरना हो, उसमें पहले उतना ही गाय का दूध भरकर मां गंगा को अर्पित किया जाए, फिर उसी पात्र में गंगाजल लिया जाए।
गंगाजल लाते समय मन में श्रद्धा, संयम और पवित्रता का भाव रखें।
⚜️ घर में कहां रखें गंगाजल
गंगाजल को घर में रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना उसे लाना।
गंगाजल को घर के पूजा स्थल या ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में रखना सर्वोत्तम माना गया है।
स्थान स्वच्छ, पवित्र और प्रकाशयुक्त होना चाहिए।
गंगाजल को कभी भी अंधेरी जगह, फर्श पर या आवागमन वाले स्थान पर न रखें।
अपवित्र अवस्था में गंगाजल को छूने से बचें और इसे सम्मानपूर्वक रखें।
⚜️ गंगाजल का धार्मिक महत्व
सनातन परंपरा में गंगाजल को पापनाशिनी, मोक्षदायिनी और कल्याणकारी माना गया है।
मान्यता है कि सच्चे मन से गंगाजल में स्नान करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।
गंगाजल का दर्शन, स्पर्श और सेवन भी पुण्य प्रदान करता है।
जन्म से लेकर अंतिम समय तक, किसी न किसी रूप में गंगाजल हर सनातनी के जीवन से जुड़ा रहता है।
अंतिम समय में गंगाजल का मुख में डालना मोक्ष प्राप्ति का मार्ग माना गया है।
⚜️ गंगाजल के धार्मिक उपाय
यदि आपके घर में नकारात्मक ऊर्जा या अशांति महसूस हो रही हो, तो गंगाजल से जुड़े ये उपाय अत्यंत प्रभावी माने गए हैं—
प्रातःकाल स्नान-ध्यान के बाद पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें।
भगवान शिव की पूजा गंगाजल के बिना अधूरी मानी जाती है। शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है।
यदि गंगाजल कम मात्रा में हो, तो शुद्ध जल में कुछ बूंदें मिलाकर अभिषेक करें।
पाप से मुक्ति और आत्मिक शुद्धि के लिए गंगाजल का श्रद्धापूर्वक सेवन और स्नान श्रेष्ठ माना गया है।
🙏 गंगाजल केवल जल नहीं, बल्कि सनातन आस्था का अमृत है। यदि आप हरिद्वार या प्रयागराज से गंगाजल लाने जा रहे हैं, तो इन नियमों का पालन कर इसकी पवित्रता और पुण्य को अपने जीवन में बनाए रखें।
हरिऊँ
✍️ वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश बोराणा



