राजस्थान में जमीन-मकान खरीदना हुआ महंगा: डीएलसी रेट में 5 से 49% तक बढ़ोतरी,  अगस्त से नई दरें लागू


जयपुर/सोजत। राजस्थान में जमीन और मकान खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए बड़ी खबर है। प्रदेश में अब जमीन, प्लॉट और मकान की रजिस्ट्री पहले के मुकाबले महंगी होगी। राज्य सरकार ने प्रदेशभर में डीएलसी (District Level Committee) रेट में 5 से 49 फीसदी तक की बढ़ोतरी कर दी है। नई डीएलसी दरें 3 अगस्त 2026 से लागू हो गई हैं।

डीएलसी रेट बढ़ने का सीधा असर जमीन और संपत्तियों की रजिस्ट्री पर पड़ेगा। कई स्थानों पर रजिस्ट्री के लिए जमीन का सरकारी मूल्यांकन पहले की तुलना में अधिक माना जाएगा, जिसके चलते स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन से जुड़े खर्च में भी बढ़ोतरी हो सकती है। इसके अलावा बाजार में जमीन और मकानों की कीमतों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

अधिकांश इलाकों में 5 से 20 फीसदी तक बढ़ोतरी

सरकार की ओर से लागू की गई नई दरों में प्रदेश के ज्यादातर क्षेत्रों में 5 से 20 फीसदी तक डीएलसी रेट बढ़ाई गई हैं। हालांकि, ऐसे कई इलाके भी हैं जहां सरकारी डीएलसी दरें लंबे समय से वास्तविक बाजार भाव की तुलना में काफी कम थीं।

इन क्षेत्रों में जमीनों की खरीद-बिक्री बाजार में निर्धारित डीएलसी रेट से कई गुना अधिक कीमत पर हो रही थी। ऐसे इलाकों में सरकारी दर और बाजार दर के बीच के अंतर को कम करने के उद्देश्य से 30 से 49 फीसदी तक की बड़ी बढ़ोतरी की गई है।

पहले अप्रैल में भी बढ़ी थी डीएलसी दर

राजस्थान में डीएलसी रेट में यह इस साल की दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है। इससे पहले 1 अप्रैल 2026 को डीएलसी रेट में 10 फीसदी की बढ़ोतरी की गई थी। अब एक बार फिर नई दरें लागू होने से जमीन और संपत्ति कारोबार से जुड़े लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।

लगातार डीएलसी दरों में बढ़ोतरी का असर उन लोगों पर विशेष रूप से पड़ेगा जो प्लॉट, कृषि भूमि को आवासीय भूमि में परिवर्तित जमीन, मकान या अन्य अचल संपत्ति खरीदने की योजना बना रहे हैं।

मई में मांगे गए थे नई डीएलसी दरों के प्रस्ताव

नई डीएलसी दरों को लागू करने की प्रक्रिया सरकार ने कई सप्ताह पहले शुरू कर दी थी। मई 2026 में राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों से जमीनों की नई डीएलसी दरों के प्रस्ताव मांगे थे। इसके बाद जिला स्तर पर अलग-अलग क्षेत्रों की जमीनों के बाजार मूल्य और मौजूदा सरकारी दरों का आकलन किया गया।

जिलों से प्राप्त प्रस्तावों पर जून के आखिरी सप्ताह तक वित्त विभाग में विचार-विमर्श किया गया। इसके बाद नई दरों को अंतिम रूप दिया गया और अब इन्हें पूरे प्रदेश में लागू कर दिया गया है।

रजिस्ट्री कराने वालों की बढ़ सकती है लागत

डीएलसी रेट बढ़ने का सबसे बड़ा असर संपत्ति की रजिस्ट्री कराने वालों पर पड़ सकता है। संपत्ति के सरकारी मूल्यांकन में बढ़ोतरी होने पर रजिस्ट्री से जुड़े शुल्क की गणना भी अधिक मूल्य पर हो सकती है।

ऐसे में जिन लोगों ने पहले से जमीन या मकान खरीदने का सौदा तय कर रखा है, लेकिन अभी तक रजिस्ट्री नहीं कराई है, उनके लिए नई डीएलसी दरें महत्वपूर्ण हो सकती हैं। संपत्ति की लोकेशन और श्रेणी के आधार पर अतिरिक्त खर्च अलग-अलग हो सकता है।

बाजार कीमतों पर भी पड़ सकता है असर

डीएलसी रेट को जमीन की सरकारी न्यूनतम मूल्यांकन दर के तौर पर देखा जाता है। हालांकि वास्तविक बाजार कीमत कई स्थानों पर डीएलसी रेट से काफी अधिक होती है। ऐसे में डीएलसी दर बढ़ने के बाद संपत्ति कारोबार से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक कुछ क्षेत्रों में जमीनों की बाजार कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है।

खासकर तेजी से विकसित हो रहे शहरों, कस्बों, मुख्य सड़कों, हाईवे और व्यावसायिक क्षेत्रों के आसपास जमीन की कीमतों में इसका असर अधिक दिखाई दे सकता है।

सोजत-पाली सहित पूरे राजस्थान में असर

नई डीएलसी दरें पूरे राजस्थान में लागू होने के कारण पाली जिले और सोजत क्षेत्र में भी इसका असर संपत्ति की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री पर पड़ना स्वाभाविक है। हालांकि किसी विशेष प्लॉट, कॉलोनी, कृषि भूमि या व्यावसायिक संपत्ति पर वास्तविक प्रभाव उसकी लोकेशन, भूमि उपयोग, सड़क की स्थिति और संबंधित श्रेणी की नई डीएलसी दर पर निर्भर करेगा।

आम खरीदारों के लिए क्या बदलेगा?

नई डीएलसी दर लागू होने के बाद जमीन या मकान खरीदने वाले लोगों को सौदा तय करने से पहले संबंधित क्षेत्र की नई डीएलसी दर और रजिस्ट्री खर्च की जानकारी लेना जरूरी होगा। केवल जमीन की बिक्री कीमत देखकर बजट तय करने के बजाय स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन फीस और अन्य संबंधित खर्चों को भी कुल बजट में शामिल करना होगा।

कुल मिलाकर राजस्थान में 3 अगस्त से लागू हुई नई डीएलसी दरों ने प्रॉपर्टी खरीदने वालों की लागत बढ़ा दी है। जहां अधिकांश क्षेत्रों में 5 से 20 फीसदी तक वृद्धि हुई है, वहीं कुछ ऐसे इलाकों में 30 से 49 फीसदी तक बढ़ोतरी की गई है जहां डीएलसी रेट और वास्तविक बाजार कीमत में बड़ा अंतर था। अब इसका असर प्रदेश के प्रॉपर्टी बाजार और आगामी रजिस्ट्री पर दिखाई देने की संभावना है।

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