सोजत

सोजत में वसंतोत्सव पर राष्ट्रीय एकता काव्य गोष्ठी आयोजित,कवियों ने प्रकृति प्रेम व राष्ट्रीयता से ओतप्रोत काव्य की सरिता बहायी।

अकरम खान की रिपोर्ट।

वीर सुभाष बनें हम सारे यह संकल्प निभाएं …

सोजत । नगर के कलमकारों ने वसंतोत्सव के शुभागमन , विद्या की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती के प्राकट्य दिवस व नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर हिंदी , राजस्थानी व उर्दू भाषाओं में प्रकृति प्रेम व राष्ट्रीयता से ओतप्रोत काव्य की सरिता प्रवाहित  कर उपस्थित सुधी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया । राष्ट्रीय एकता काव्य गोष्ठी का आयोजन साहित्यिक , सांस्कृतिक एवं वैचारिक संस्थान रुचिर विद्या साहित्य समिति के तत्वावधान में स्थानीय केरिया जी बास स्थित शारदा विद्या पीठ माध्यमिक विद्यालय में अपराह्न आयोजित किया गया । 

कार्यक्रम के आरंभ में अतिथियों द्वारा मां सरस्वती व नेताजी सुभाष चंद्र बोस की तस्वीर सम्मुख पूजा अर्चना की गयी । समारोह की अध्यक्षता करते हुए राजस्थानी के सुविख्यात वरिष्ठतम साहित्यकार वीरेंद्र लखावत ने कुण्डलिया छंद “नवा करो निरमाण नेह सूं नाम कमावौ …”  प्रस्तुत कर श्रोताओं की दाद पायी । पूर्व प्रधानाचार्य महेंद्र मेहता के मुख्यातिथ्य एवं व्यंग्यकार उमाशंकर द्विवेदी के विशिष्ठ आतिथ्य में आयोजित इस काव्य गोष्ठी का आगाज वरिष्ठ कवि हरीश चंद्र व्यास ने मां शारदा की स्तुति प्रस्तुत कर किया । कवि व्यास ने श्रोताओं के आग्रह पर वसंत पर रचना “हरितीमा पर प्रीत ओढ़नी धरती का श्रृंगार करे …” भी परोसी जिसे सभी ने बेहद पसंद किया । 

वसंतोत्सव पर सूफियाना अंदाज में ख्यातनाम वरिष्ठ शायर अब्दुल समद राही ने अपनी बात रख देशभक्ति के कलाम “हम भारत माता के बेटे मां का मान बढ़ाएंगे …” सुनाकर सभी को भावविभोर कर दिया । कवियों ने संस्था अध्यक्ष शिक्षाविद् बसंत लखावत के जन्मदिन पर उनका भावभीना अभिनंदन कर उन्हें बधाइयां दीं । बसंत लखावत ने अपनी प्रतिनिधि रचना “मन मधुबन बन महक रहा है …” की सरस प्रस्तुति दी । बाल साहित्य लेखक नवनीत राय ‘रुचिर’ ने देशभक्ति गीत “वीर सुभाष बनें हम सारे यह संकल्प निभाएं …” सुनाकर सभी में देशभक्ति का जज्बा भर तालियां बटोरीं ।

गीतकार दलपत पेंटर ने वीणापाणिनी को समर्पित वंदना पढ़ सभी की वाहवाही लूटी । व्यंग्यकार उमाशंकर द्विवेदी ने कविता “धरती पर छाया घना कोहरा …” तथा  पूर्व प्रधानाचार्य महेंद्र मेहता ने देशभक्ति की पैरोड़ी रचना से सभी का दिल जीत लिया । कवि विशनसिंह भाटी मेव ने “क्यूं जला मेरा शहर …” कविता सुनाकर सामाजिकता त्रासदी को प्रस्तुत कर सभी को नवाजा । पं. माधव शास्त्री ने श्लोकों के माध्यम से वसंत के महत्त्व को व्याख्यायित  किया । बालकवि मोहम्मद उमैर ने भी सरस काव्य पाठ किया जिसे सभी ने सराहा । शुरूआत में अतिथियों का माल्यार्पण से स्वागत किया गया । कार्यक्रम का सरस संचालन संस्था सचिव नवनीत राय ‘रुचिर’ ने किया । 

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