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तिरुपति बालाजी मंदिर में बड़ा घोटाला उजागर:
लड्डू घोटाले के बाद अब दुपट्टा (अंग वस्त्रम) सप्लाई में करोड़ों की हेरा-फेरी, 10 साल में ठगे 54 करोड़ रुपए



✍️ सोजत न्यूज़ वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश बोराणा

तिरुपति बालाजी मंदिर—देश के सबसे समृद्ध और विश्वप्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक—एक बार फिर बड़े घोटाले की चपेट में आ गया है। पहले लड्डू घोटाले ने भक्तों को झकझोरा था, और अब मंदिर प्रशासन में दुपट्टा (अंग वस्त्रम) सप्लाई को लेकर करोड़ों रुपए के घोटाले का पर्दाफाश हुआ है।

        कैसे हुआ घोटाले का खुलासा?

मंदिर प्रबंधन की ओर से VIP भक्तों को ओढ़ाए जाने वाले और भगवान बालाजी के विशेष पूजा-अनुष्ठानों में प्रयुक्त होने वाले शुद्ध मुलबेरी सिल्क दुपट्टों की खरीद के लिए एक कॉन्ट्रैक्टर को लंबे समय से टेंडर दिया गया था।
जांच के दौरान सामने आया कि—

शुद्ध मुलबेरी सिल्क की जगह 100% पॉलिस्टर के नकली दुपट्टे सप्लाई किए गए।

एक दुपट्टे की असल कीमत ₹350 थी, जिसे मंदिर प्रबंधन को ₹1300 में बेचा गया।

पिछले 10 वर्षों में इस कॉन्ट्रैक्टर को 54 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया।


यह रकम भक्तों द्वारा चढ़ाए गए चढ़ावे और दान-पुण्य से ही अर्पित की जाती है, जिसका दुरुपयोग कर श्रद्धालुओं की आस्था से गहरा खिलवाड़ किया गया।



टेंडर तुरंत रद्द, जांच ACB को सौंपी

मामले की गंभीरता को देखते हुए तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) ने—

संबंधित कॉन्ट्रैक्टर का टेंडर तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया।

पूरे मामले की जांच आंध्र प्रदेश एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) को सौंप दी है।

प्रशासनिक स्तर पर कई अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में बताई जा रही है।


ACB अब यह जांच करेगी कि इस घोटाले में कौन-कौन से अधिकारी संलिप्त हैं और कैसे इतने वर्षों तक फर्जी सप्लाई बिना रोक-टोक चलती रही।



         भक्तों की आस्था को ठेस

तिरुपति बालाजी मंदिर प्रतिवर्ष करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।
यहां—

VIP भक्तों को विशेष पूजा के समय यही दुपट्टा ओढ़ाया जाता है,

और भगवान के अभिषेक एवं विशेष अनुष्ठानों में भी इन्हें उपयोग किया जाता है।


ऐसे पवित्र उपयोगों में नकली, सस्ते और घटिया गुणवत्ता के वस्त्रों का प्रयोग होना न केवल आस्था के साथ छल है, बल्कि मंदिर प्रशासन पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

         अब आगे क्या?

ACB की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट आने के बाद—

दोषी कॉन्ट्रैक्टर,

और उसके साथ मिलीभगत करने वाले प्रशासनिक अधिकारी


के खिलाफ कठोर कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।

मंदिर प्रबंधन ने भरोसा दिलाया है कि भविष्य में दुपट्टों की क्वालिटी की जांच विशेषज्ञ टीम द्वारा की जाएगी और सप्लायर चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाएगा।


तिरुपति बालाजी जैसा दैवीय और पवित्र स्थल लगातार भ्रष्टाचारियों के निशाने पर है, जो भक्तों की भावना को ठेस पहुंचाने की हिम्मत कर रहे हैं। यह घोटाला एक बार फिर सवाल उठाता है—धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए और क्या कदम आवश्यक हैं?

✍️ सोजत न्यूज़ वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश बोराणा

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