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बड़ी खबर ,फर्जी डिप्लोमा से अग्निशमन अधिकारी बनी महिला गिरफ्तार, एसओजी की बड़ी कार्रवाई से मचा हड़कंप



✍️ वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश बोराणा

जयपुर। राजस्थान में सरकारी भर्तियों में फर्जीवाड़े के खिलाफ चल रही सख्त कार्रवाई के तहत स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (एसओजी) ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। सहायक अग्निशमन अधिकारी एवं फायरमैन भर्ती परीक्षा–2021 में फर्जी डिप्लोमा और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल करने वाली महिला अधिकारी को एसओजी ने गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार अभियुक्ता की पहचान सोबिया सैयद के रूप में हुई है, जो वर्तमान में जयपुर के मालवीय नगर जोन में सहायक अग्निशमन अधिकारी के पद पर कार्यरत थी। एसओजी की इस कार्रवाई के बाद अग्निशमन विभाग सहित प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।


जांच में सामने आया बड़ा फर्जीवाड़ा

एसओजी की प्रारंभिक जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच के अनुसार,

अभियुक्ता ने एक ही शैक्षणिक सत्र में एक से अधिक डिग्री और डिप्लोमा प्राप्त करने का दावा किया,

भर्ती प्रक्रिया के दौरान दस्तावेज सत्यापन में कई डिप्लोमा प्रस्तुत किए,

प्रस्तुत किए गए डिप्लोमा और शैक्षणिक प्रमाण-पत्र संदिग्ध और फर्जी पाए गए।


एसओजी अधिकारियों के अनुसार, तकनीकी जांच और शैक्षणिक संस्थानों से प्राप्त रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि डिप्लोमा नियमों के अनुरूप नहीं थे और उनमें गंभीर अनियमितताएं पाई गईं।



भर्ती प्रक्रिया पर उठे सवाल

इस गिरफ्तारी के बाद अग्निशमन विभाग की भर्ती प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते जांच नहीं होती, तो ऐसे फर्जी अभ्यर्थी संवेदनशील पदों पर बने रहकर जनसुरक्षा के लिए खतरा बन सकते थे।


एसओजी की आगे की कार्रवाई

एसओजी अब इस मामले में

डिप्लोमा जारी करने वाले संस्थानों,

मध्यस्थों और दलालों,

तथा अन्य संदिग्ध चयनित अभ्यर्थियों की भी गहन जांच कर रही है।


सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव हैं। साथ ही, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी पाने वाले अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की भी सूची तैयार की जा रही है।


सरकार का सख्त संदेश

इस कार्रवाई को लेकर सरकार और जांच एजेंसियों ने साफ संकेत दिए हैं कि सरकारी भर्तियों में फर्जीवाड़ा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी और जरूरत पड़ी तो नियुक्तियां भी रद्द की जाएंगी।


यह मामला न केवल सरकारी भर्तियों की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि एसओजी लगातार ऐसे फर्जीवाड़ों को बेनकाब करने में जुटी हुई है।

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