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पुलिस के लिए मुसीबत बनी भैंस: दो दावेदार आमने-सामने, थाने में खड़ी कराई गई भैंस, मेडिकल के बाद भी नहीं सुलझा मामला

✍️ वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश बोराणा

कोटा।
कभी चोरी, कभी मारपीट तो कभी जमीन विवाद… लेकिन इस बार कोटा शहर की कुन्हाड़ी थाना पुलिस एक ऐसी अजीबोगरीब समस्या में उलझ गई, जिसने पूरे थाने को ही अस्थायी “भैंस स्टैंड” बना दिया। मामला एक भैंस और उसके पाड़े (बच्चे) के स्वामित्व को लेकर है, जहां दो अलग-अलग दावेदार सामने आने से पुलिस के भी पसीने छूट गए।

थाने पहुंचा ‘भैंस विवाद’, पुलिस भी रह गई हैरान

जानकारी के अनुसार, कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र में दो व्यक्ति एक ही भैंस को अपनी-अपनी बताकर आपस में झगड़ने लगे। मामला इतना बढ़ा कि दोनों दावेदार लड़ते-झगड़ते सीधे थाने पहुंच गए। हालात बिगड़ते देख पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और भैंस को गाड़ी में लोड कर थाने लाना पड़ा।

   उम्र तय करने के लिए कराया गया मेडिकल

थाना अधिकारी कौशल्या गालव ने बताया कि भैंस के असली मालिक का पता लगाने के लिए पुलिस ने उसका मेडिकल परीक्षण कराया।

एक दावेदार ने भैंस की उम्र 7 साल बताई

दूसरे दावेदार का कहना था कि भैंस साढ़े 4 साल की है


मेडिकल रिपोर्ट में भैंस की उम्र 4 से 5 साल के बीच पाई गई, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि भैंस संभवतः उसी व्यक्ति की हो सकती है, जिसने कम उम्र बताई थी।

   मेडिकल के बाद भी संतुष्ट नहीं हुए दावेदार

हालांकि मेडिकल रिपोर्ट आने के बावजूद दोनों पक्ष संतुष्ट नहीं हुए। दोनों ने अपने-अपने दावे को सही बताते हुए अतिरिक्त सबूत देने की बात कही। पुलिस ने भी दोनों पक्षों से खरीद-फरोख्त के कागजात, गवाह और अन्य प्रमाण मांगे हैं, ताकि निष्पक्ष निर्णय लिया जा सके।

🐄 फिलहाल पुलिस कस्टडी में भैंस, गौशाला भेजने की तैयारी

विवाद और संभावित झगड़े को देखते हुए फिलहाल भैंस और उसका पाड़ा पुलिस कस्टडी में थाने में ही रखे गए हैं। पुलिस प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही दोनों को गौशाला भिजवाया जाएगा, ताकि दावेदारों के बीच किसी तरह का टकराव न हो।

     फैसला सबूतों के आधार पर होगा

थाना अधिकारी ने स्पष्ट किया कि जब तक दोनों पक्षों से पूरे सबूत नहीं मिल जाते, तब तक भैंस को किसी को नहीं सौंपा जाएगा। सभी साक्ष्यों की जांच के बाद ही यह तय होगा कि भैंस का असली मालिक कौन है।

कुल मिलाकर, यह मामला इन दिनों कोटा पुलिस के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां कानून के रखवालों को एक भैंस के मालिकाना हक का फैसला करने में भी खासी मशक्कत करनी पड़ रही है।

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