विवेकानंद शिक्षा प्रासंगिक है :- आचार्य माधव शास्त्री

सोजत।अल्पायु में प्रयाण कर देने वाले भारतीय उद्भट विद्वान स्वामी विवेकानंद ने अपने संदेश में कहा कि मुझे सो व्यक्ति चाहिए जो अपने ज्ञान से विश्व में सरस और सरल भारतीय संस्कृति और सभ्यता को प्रस्तुत करते हुए प्रतिबिम्बित कर सकें।
शास्त्री ने बताया कि स्वामी जी ने भारतीय दर्शन को विश्व के उच्च पटल पर सुस्थापित किया जहां लोग भारतीयता के विषय में अनभिज्ञ थे जहां से शून्य को भी अपनी प्रतिभा से सम्भ्रान्तों का ध्यान भारतीय ज्ञान और विज्ञान पर बरबस ही आकर्षित किया। रामकृष्ण परमहंस के शिष्य जो कुंठित मन से गुरु के सान्निध्य में परम कृपा को प्राप्त कर विश्व समुदाय में सत्य और अहिंसा के नवाचारों की स्थापना की।

युवाओं में फैली नशे की प्रवृत्ति को भी परे रखने के लिए कहा कि मनुष्यों तुम सिंह के समीप जाने पर मत डरना क्योंकि यह तुम्हारे पराक्रम की कसौटी है लेकिन शराब और नशे के समीप जाना पाप की कसौटी है क्योंकि मद्य ही पाप की जननी है।
भारत के सुदूर दक्षिण में कन्या कुमारी अन्तरीप में स्वामी जी परम ज्योति आज भी जनमानस को प्रेरणा देती हुई अन्त:स्फुरण कर रही है।
शास्त्री ने कहा कि युवाओं के पुरोधा के रूप में विख्यात विवेकानंद आज भी प्रेरणादायक बने हुए हैं जिनके मार्ग दर्शन पर चलते हुए भारतीय ज्ञान और विज्ञान को अपना रहे हैं।
आचार्य माधव शास्त्री जी कि कलम से-सोजत



