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(बड़ी खबर) निजी स्कूलों में 25% RTE कोटा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को बाध्यकारी नियम बनाने के निर्देश



नई दिल्ली/सोजत।
निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत आरटीई (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) कोटा के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे आरटीई अधिनियम की धारा 38 के तहत बाध्यकारी और लागू करने योग्य नियम बनाएं, ताकि 25% कोटा केवल कागजों तक सीमित न रह जाए।

बाल अधिकार निकायों से परामर्श अनिवार्य

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियम बनाते समय राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोगों और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग जैसे निकायों से परामर्श लिया जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि बच्चों के मौलिक अधिकारों से जुड़े इस प्रावधान के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार्य नहीं है।

25% कोटा लागू करना अनिवार्य – SC

अदालत ने अपने निर्देश में कहा कि निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों में 25% सीटों पर प्रवेश सुनिश्चित करना कानूनी बाध्यता है, न कि स्कूलों की इच्छा पर निर्भर विषय। इसके लिए स्पष्ट प्रक्रिया, समयसीमा और जवाबदेही तय करने वाले नियम बनाए जाएं, ताकि गरीब और वंचित बच्चों को शिक्षा से वंचित न किया जा सके।

महाराष्ट्र से जुड़ा मामला बना आधार

यह मामला एक अभिभावक द्वारा दायर याचिका के बाद सामने आया। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि महाराष्ट्र के एक पड़ोस के निजी स्कूल ने उसके बच्चे को 25% आरटीई कोटा के तहत प्रवेश देने से इनकार कर दिया, जबकि सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत प्राप्त जानकारी से यह स्पष्ट था कि स्कूल में सीटें उपलब्ध थीं।

स्कूल की ओर से कोई जवाब नहीं

अभिभावक का कहना था कि बार-बार संपर्क करने के बावजूद स्कूल की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद याचिकाकर्ता ने बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया।

हाई कोर्ट ने याचिका की थी खारिज

बॉम्बे हाई कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा था कि याचिकाकर्ता ने निर्धारित ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया का पालन नहीं किया, इसलिए इसके लिए वह स्वयं जिम्मेदार है और उसे स्वयं को दोषी ठहराया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट का व्यापक दृष्टिकोण

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस व्यक्तिगत विवाद से आगे बढ़ते हुए पूरे देश में आरटीई के क्रियान्वयन की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई। कोर्ट ने माना कि अलग-अलग राज्यों में नियमों की अस्पष्टता और कमजोर निगरानी व्यवस्था के कारण 25% कोटा का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है।

क्या होगा असर

सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश के बाद:

सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्पष्ट, सख्त और बाध्यकारी नियम बनाने होंगे

निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगेगी

25% आरटीई कोटा के तहत बच्चों को प्रवेश दिलाने में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी

वंचित और कमजोर वर्ग के बच्चों को शिक्षा का अधिकार वास्तविक रूप में मिल सकेगा


यह फैसला देशभर में लाखों बच्चों और अभिभावकों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है और निजी स्कूलों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि आरटीई कानून का पालन अनिवार्य है।

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