✍️ वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश बोराणा
सोजत। बहुचर्चित गंगा सिंह झूपेलाव हत्याकांड में बुधवार को न्यायालय ने अहम फैसला सुनाते हुए करीब 10 साल पुराने मामले में दोषियों को सजा देकर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश कुमार गढ़वाल ने 13 आरोपियों में से 5 को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई, जबकि 8 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।
कोर्ट का फैसला: दोषियों को उम्रकैद व जुर्माना
न्यायालय ने दोषी पाए गए इंद्र सिंह, विक्रम सिंह, अर्जुन सिंह, भेरू सिंह एवं दलपत सिंह को भारतीय दंड संहिता की धारा 148, 323/149 एवं 304 (Part-I) सहपठित धारा 149 के तहत दोषसिद्ध मानते हुए आजीवन कारावास तथा प्रत्येक पर ₹50 हजार का जुर्माना लगाया।
2016 की घटना: कब्जे के विवाद में हुआ था खूनी संघर्ष
अपर लोक अभियोजक पंकज त्रिवेदी के अनुसार, यह मामला 17 मई 2016 का है। उस दिन योगेंद्र सिंह (पुत्र गंगा सिंह) ने थाना शिवपुरा में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी।
रिपोर्ट के अनुसार, आरोपीगण गांव के सार्वजनिक रास्ते व चौक पर तारबंदी कर अवैध कब्जा करने का प्रयास कर रहे थे। जब गंगा सिंह ने इसका विरोध किया, तो आरोपियों ने एकजुट होकर लाठी और लोहे की सरियों से हमला कर दिया। इस हमले में गंगा सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में उनकी मृत्यु हो गई।
मजबूत साक्ष्य बने फैसले की नींव
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मजबूत पैरवी करते हुए कुल 48 गवाहों के बयान दर्ज कराए और 73 दस्तावेज व आर्टिकल न्यायालय में पेश किए। इन्हीं ठोस साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने पांच आरोपियों को दोषी करार दिया।
8 आरोपी बरी, संदेह का मिला लाभ
न्यायालय ने साक्ष्यों के अभाव में शेष 8 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। इस फैसले के बाद न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्य की अहम भूमिका एक बार फिर सामने आई है।
प्रभावी पैरवी से मिला न्याय
इस पूरे प्रकरण में अपर लोक अभियोजक पंकज त्रिवेदी ने प्रभावी पैरवी करते हुए अभियोजन पक्ष को मजबूती से प्रस्तुत किया, जिसके चलते अदालत ने दोषियों को सजा सुनाई।
क्षेत्र में चर्चा, न्याय की उम्मीद पूरी
करीब एक दशक तक चले इस बहुचर्चित मामले में आए फैसले के बाद सोजत सहित आसपास के क्षेत्रों में यह मामला फिर चर्चा में आ गया है। पीड़ित परिवार को लंबे इंतजार के बाद न्याय मिलने की उम्मीद पूरी होती नजर आई।
गंगा सिंह झूपेलाव हत्याकांड का यह फैसला समाज के लिए एक सशक्त संदेश है कि अवैध कब्जे और हिंसा जैसे अपराधों के खिलाफ कानून सख्ती से कार्रवाई करता है और दोषियों को अंततः सजा मिलती है।