✍️ वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश बोराणा
उत्तर प्रदेश: स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और मरीजों के अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि एक महिला मरीज रेशमा का इलाज मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) के मुफ्त इलाज के आदेश के बावजूद डॉक्टर ने पैसे लेकर किया। इतना ही नहीं, जब दोबारा पैसे नहीं मिले तो इलाज के दौरान जोड़ी गई हड्डी को मरोड़कर फिर से तोड़ देने का गंभीर आरोप भी सामने आया है।
पीड़िता रेशमा का कहना है कि वह आर्थिक रूप से कमजोर है और उसके इलाज के लिए सीएमओ कार्यालय से निशुल्क उपचार के निर्देश जारी किए गए थे। इसके बावजूद संबंधित डॉक्टर और अस्पताल कर्मियों ने इलाज के नाम पर उससे 8 हजार रुपये की मांग की। मजबूरी में परिवार ने पैसे जुटाकर डॉक्टर को दिए, जिसके बाद उसका उपचार शुरू किया गया और टूटी हुई हड्डी को जोड़ा गया।
पैसे खत्म हुए तो बढ़ी मुसीबत
रेशमा और उसके परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर ने बाद में और रुपये मांगे। जब परिवार अतिरिक्त राशि देने में असमर्थ रहा तो डॉक्टर ने कथित रूप से मरीज के साथ अमानवीय व्यवहार किया। आरोप है कि पहले से जोड़ी गई हड्डी को इस तरह मरोड़ा गया कि वह फिर से क्षतिग्रस्त हो गई। इस घटना के बाद रेशमा की हालत और अधिक खराब हो गई तथा उसे असहनीय दर्द का सामना करना पड़ा।
न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें
पीड़िता का परिवार अब न्याय की मांग को लेकर अधिकारियों के चक्कर काट रहा है। रेशमा का कहना है कि उसने स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों, जिला प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों से शिकायत की है, लेकिन अभी तक दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
यह मामला सामने आने के बाद सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठने लगे हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल चिकित्सा नैतिकता का उल्लंघन होगा, बल्कि मरीजों के अधिकारों का भी गंभीर हनन माना जाएगा।
जांच की मांग तेज
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी डॉक्टर एवं संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि मुफ्त इलाज के सरकारी आदेशों के बावजूद मरीजों से वसूली होती है, तो गरीब और जरूरतमंद लोगों का सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था से विश्वास उठ जाएगा।
प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
फिलहाल इस पूरे मामले में प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांच की प्रक्रिया शुरू किए जाने की चर्चा है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और पीड़िता रेशमा को कब तक न्याय मिल पाता है।