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“अरावली की गोद में सोजत”: नानी सीरड़ी से सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक — इतिहास, भूगोल और संरक्षण की पुकार

वरिष्ठ पत्रकार चेतनजी व्यास के साथ अकरम खान की रिपोर्ट।

सोजत क्षेत्र भी मुख्य रूप से अरावली पर्वत श्रृंखला का हिस्सा है, और यहाँ की पहाड़ियां प्राचीन ग्रेनाइट संरचनाओं वाली हैं, जिनमें नानी सीरड़ी पहाड़ी प्रमुख है, जिसपर सोजत दुर्ग (किला) बना है, साथ ही यहाँ कई अन्य छोटी पहाड़ियाँ भी हैं।


सोजत में अरावली की छितरी हुई सात पहाड़ियों हैं जिनमें से कई पहाड़ियां खनन के कारण विलुप्त हो गई हैं एवं बड़े बड़े गर्त बन गए हैं
उल्लेखनीय हैं कि सोजत अरावली पर्वत श्रृंखला के रास्ते में आता है, जो भारत की प्राचीनतम पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है।


सोजत का ऐतिहासिक दुर्ग भी नानी सीरड़ी पहाड़ी नामक पहाडी पर हैं यह एक विशिष्ट पहाड़ी है, जिस पर 1460 ईस्वी में राव जोधा के पुत्र नीम्बा ने सोजत का प्रसिद्ध दुर्ग बनवाया था। वहीं नरसिंह भाखरी, चामुंडा माता भाखरी,मोडी महादेव सहित सोजत में कुछ नंगी पहाड़ियां हैं ।

सोजत की पहाड़ियां अरावली का हिस्सा हैं और नानी सीरड़ी जैसी विशिष्ट पहाड़ियों के साथ, यह क्षेत्र अपनी प्राकृतिक और ऐतिहासिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, जैसे कि गोरम घाट है।

फैसले से सोजत भी होगा प्रभावित – ज्ञातव्य है कि 20 नवम्बर 2025 को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली भू आकृतियों को ही आरावली पहाड़ियों श्रृंखला माना गया है इस फैसले के बाद राज्य में 11 हजार टीले खत्म हो जाएंगे ।

भारतीय वन सर्वेक्षण के आकलन के मुताबिक प्रदेश के 15 जिलों में मौजूद 12 हजार 81 अरावली पहाड़/टीले 20 मीटर या उससे अधिक ऊंचे हैं, लेकिन इनमें से केवल 1 हजार 48 ही ऐसे हैं जो 100 मीटर से ज्यादा ऊंचे हैं।


यानी 11 हजार 33 संरचनाएं अरावली नहीं कहीं जा सकेंगी। 20 मीटर ऊंचाई का मानक इसलिए अहम माना जाता रहा है, क्योंकि इतनी ऊंचाई की पहाड़ियां भी हवा के प्रवाह को रोकने वाली प्राकृतिक दीवार का काम करती हैं।पर्वतमाला भारत एवं विश्व की एक सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखला है।

  सोजत भी आता है बीच में – अरावली पर्वत श्रृंखला जो गुजरात के पालनपुर से शुरू होकर राजस्थान, हरियाणा से होते हुए दिल्ली तक (लगभग 692 किमी) दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व दिशा में फैली है, जिसका लगभग 80% विस्तार राजस्थान में है और यह भारत की सबसे पुरानी वलित पर्वतों में से एक है, जो अब अवशिष्ट पर्वत का उदाहरण है और राजस्थान के लिए जीवनरेखा का काम करती है। इसके बीच में सोजत भी आता है तथा सोजत क्षेत्र की कई पहाड़ियां आती हैं।‌


अरावली की शुरुआत गुजरात के खेड़ ब्रह्मा (पालनपुर) से शुरू होती है और दिल्ली के निकट समाप्त होती है, जहाँ राष्ट्रपति भवन रायसीना की पहाड़ी स्थित है, जो अरावली का ही भाग हैं इसका विस्तार गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली राज्यों में है।


राजस्थान में: राजस्थान में यह उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर फैली है, जिसमें सिरोही, उदयपुर, राजसमंद, अजमेर, जयपुर, दौसा और अलवर जिले शामिल हैं।

इन्होने किया समर्थन – अरावली बचाओ अभियान का सोजत की सभी सामाजिक संस्थाओं एवं उनके पदाधिकारियों ने समर्थन किया जिनमें वरिष्ठ नागरिक समिति अध्यक्ष सुरेश ओझा पेंशनर समाज अध्यक्ष लालचंद मोयल चारण गढ़वी इंटरनेशनल फाउंडेशन सोशियो अध्यक्ष अनोपसिंह लखावत अभिनव कला मंच अध्यक्ष गोरधन लाल गहलोत सचिव चेतन व्यास उपाध्यक्ष श्याम लाल व्यास ,सोजत सेवा मंडल मंत्री पुष्पत राज मुणोत,भारत विकास परिषद् अध्यक्ष देवीलाल सांखला, सामाजिक वेल फेयर फाउंडेशन अध्यक्ष राम स्वरूप भटनागर,मानव सेवा समिति अध्यक्ष राजेश अग्रवाल, वरिष्ठ नागरिक समिति के हितेंद्र व्यास,डा रशीद गोरी,सत्तु सिह भाटी, अशोक सैन,माली समाज पंच ताराचंद सैनी जवरीलाल बौराणा, नरपत सिंह दैया,राज कुमार चौधरी, लीलावती आर्य, हीरालाल आर्य शामिल हैं।

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