नई दिल्ली। देशभर में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) लेनदेन पर शुल्क लगाए जाने की चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किए गए संशोधन का उद्देश्य आम नागरिकों पर कोई नया शुल्क लगाना नहीं, बल्कि बड़े व्यापारियों के मर्चेंट भुगतान (Merchant Payments) पर भविष्य में मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का कानूनी विकल्प तैयार करना है।
सरकार के इस कदम से साफ हो गया है कि आम लोगों द्वारा किए जाने वाले UPI लेनदेन पहले की तरह ही सुरक्षित और पूरी तरह मुफ्त रहेंगे। यानी यदि कोई व्यक्ति अपने परिवार, मित्र या किसी अन्य व्यक्ति को UPI के माध्यम से पैसे भेजता है, तो उस पर किसी प्रकार का शुल्क नहीं लगेगा।
व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) भुगतान पर नहीं लगेगा कोई शुल्क
सरकार ने स्पष्ट किया है कि व्यक्ति से व्यक्ति (Person-to-Person) किए जाने वाले सभी UPI ट्रांजैक्शन पहले की तरह निशुल्क रहेंगे। इससे करोड़ों डिजिटल भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं को किसी अतिरिक्त आर्थिक बोझ का सामना नहीं करना पड़ेगा।
बड़े व्यापारियों के भुगतान पर लग सकता है MDR
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ₹2,005 से अधिक के मर्चेंट भुगतान पर 0.25 प्रतिशत से 0.5 प्रतिशत तक का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाया जा सकता है। हालांकि यह शुल्क आम उपभोक्ताओं पर नहीं, बल्कि बड़े व्यापारियों के डिजिटल भुगतान से संबंधित लेनदेन पर लागू करने का कानूनी विकल्प है।
छोटे दुकानदारों को मिलेगी राहत
सरकार के प्रस्ताव के अनुसार यह व्यवस्था केवल उन बड़े व्यापारियों पर लागू हो सकती है, जिनका वार्षिक कारोबार ₹1.5 करोड़ से अधिक है। इससे छोटे दुकानदारों, किराना व्यापारियों और सूक्ष्म व्यवसायों को किसी अतिरिक्त शुल्क का सामना नहीं करना पड़ेगा।
अभी अंतिम फैसला नहीं
सरकार ने फिलहाल MDR लागू करने की कोई अंतिम तिथि या निश्चित दर घोषित नहीं की है। संसद में पेश किया गया संशोधन केवल भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर कानूनी आधार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से है। इसके लागू होने, शुल्क की दर और अन्य शर्तों पर अंतिम निर्णय बाद में लिया जाएगा।
डिजिटल भुगतान को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रस्ताव से आम नागरिकों के डिजिटल भुगतान पर कोई असर नहीं पड़ेगा। वहीं, बड़े व्यापारिक लेनदेन के लिए भविष्य में अलग व्यवस्था बनाई जा सकती है। सरकार का उद्देश्य डिजिटल भुगतान प्रणाली को सुरक्षित, पारदर्शी और मजबूत बनाए रखना है, जबकि आम उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों के हितों की रक्षा भी सुनिश्चित करना है.






