कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने छोड़ी पुलिस एस्कॉर्ट सुविधा, बोले- जनप्रतिनिधि को जनता के बीच रहना चाहिए,
प्रधानमंत्री मोदी की सादगी से प्रेरित होकर लिया बड़ा निर्णय, वीआईपी संस्कृति कम करने की दिशा में माना जा रहा अहम कदम



✍️ सोजत न्यूज़ | वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश बोराणा

जयपुर/सोजत, 13 मई। राजस्थान सरकार में पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री Joraram Kumawat ने एक बड़ा और चर्चित फैसला लेते हुए अपने दौरों के दौरान पुलिस एस्कॉर्ट सुविधा नहीं लेने का निर्णय किया है। मंत्री के इस कदम को प्रदेश में वीआईपी संस्कृति कम करने और जनप्रतिनिधियों को आमजन से जोड़ने की दिशा में सकारात्मक पहल माना जा रहा है।

कैबिनेट मंत्री Joraram Kumawat ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को जनता के बीच सहज रूप से रहकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अनावश्यक वीआईपी व्यवस्थाओं से आम लोगों को कई बार परेशानी का सामना करना पड़ता है, विशेष रूप से यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है। इसी सोच को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपने सभी दौरा कार्यक्रमों में पुलिस एस्कॉर्ट नहीं रखने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं।

प्रधानमंत्री मोदी की सादगी से प्रेरित निर्णय

मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi लगातार जनप्रतिनिधियों को सादगी अपनाने, जनता के बीच सहज रहने और सेवा भावना से कार्य करने का संदेश देते रहे हैं। उसी भावना से प्रेरित होकर उन्होंने यह निर्णय लिया है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि होती है और जनप्रतिनिधियों का दायित्व है कि वे जनता के बीच बिना किसी दूरी के कार्य करें। मंत्री के अनुसार सुरक्षा और प्रोटोकॉल जरूरी हैं, लेकिन जहां तक संभव हो आमजन को असुविधा से बचाना भी सरकार की जिम्मेदारी है।

अधिकारियों को दिए स्पष्ट निर्देश

सूत्रों के अनुसार मंत्री कार्यालय की ओर से संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं कि भविष्य में मंत्री के टूर कार्यक्रमों के दौरान अनावश्यक पुलिस एस्कॉर्ट की व्यवस्था नहीं की जाए। इससे सड़क मार्ग पर आम नागरिकों को होने वाली रुकावट और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याओं में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

जनता और सामाजिक संगठनों ने की सराहना

मंत्री के इस फैसले की विभिन्न सामाजिक संगठनों और आम लोगों द्वारा सराहना की जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि अन्य जनप्रतिनिधि भी इसी प्रकार सादगी और जनसरोकार की भावना से कार्य करें तो आम जनता और नेताओं के बीच दूरी कम होगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान समय में जब वीआईपी संस्कृति को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं, ऐसे में कैबिनेट मंत्री Joraram Kumawat का यह निर्णय एक अलग संदेश देने वाला कदम साबित हो सकता है।

प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना फैसला

मंत्री के इस निर्णय की राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में भी चर्चा हो रही है। कई लोग इसे जनभावनाओं से जुड़ा निर्णय बता रहे हैं, वहीं कुछ इसे सादगीपूर्ण राजनीति की नई पहल के रूप में देख रहे हैं।

फिलहाल मंत्री का यह कदम प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है और इसे जनता के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है।

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