जहरीली शराब कांड से मचा हड़कंप: मौतों का आंकड़ा 9 पहुंचा, 21 आरोपियों पर FIR, पुलिसकर्मियों पर भी गिरी गाज



भावनगर/अहमदाबाद। गुजरात के शराबबंदी वाले राज्य में सामने आए भावनगर जहरीली शराब कांड ने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया है। नकली और रासायनिक पदार्थ से तैयार शराब के सेवन के बाद अब तक 9 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अस्पतालों में उपचाराधीन हैं। शुरुआती तौर पर 20 अगस्त को मृतकों की संख्या सात बताई गई थी, लेकिन 21 अगस्त को एक और गंभीर मरीज की मौत के बाद आंकड़ा बढ़कर नौ हो गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। 21 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और मामले की जांच गुजरात पुलिस की स्टेट मॉनिटरिंग सेल (SMC) को सौंपी गई है। वहीं ड्यूटी में कथित लापरवाही के मामले में पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई की गई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार चार पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है।

जहरीली शराब ने ली 9 लोगों की जान

भावनगर जिले में नकली शराब के सेवन के बाद लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। कई लोगों को उल्टी, सांस लेने में परेशानी और गंभीर विषाक्तता के लक्षण सामने आए। इसके बाद प्रभावित लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया।

20 अगस्त तक पुलिस ने सात मौतों की पुष्टि की थी और 25 से 30 के आसपास लोगों के उपचाराधीन होने की जानकारी सामने आई थी। 21 अगस्त को एक और गंभीर मरीज की मौत के बाद मृतकों की संख्या नौ हो गई।

शराब में मिला भारी मात्रा में मेथेनॉल

मामले की जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा शराब के रासायनिक परीक्षण से हुआ। फॉरेंसिक जांच में जब्त नमूने में 38.59 प्रतिशत मेथेनॉल और केवल 0.94 प्रतिशत इथेनॉल पाए जाने की जानकारी सामने आई है। इतनी अधिक मात्रा में मेथेनॉल का सेवन बेहद जहरीला और जानलेवा हो सकता है।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि जहरीले रसायन की व्यवस्था कहां से हुई और किस नेटवर्क के जरिए इसे नकली शराब में मिलाकर लोगों तक पहुंचाया गया।

रॉयल स्टैग की खाली बोतलों में भरकर बेचने का आरोप

जांच में यह भी सामने आया है कि जहरीले तरल को कथित तौर पर नामी शराब ब्रांड की खाली बोतलों में भरकर बाजार में पहुंचाया गया। रिपोर्टों में रॉयल स्टैग के लेबल लगी बोतलों का उल्लेख है। इससे पुलिस को आशंका है कि आरोपियों ने असली शराब जैसा दिखाने के लिए खाली बोतल, ढक्कन और लेबल का इस्तेमाल किया।

यह पूरा नेटवर्क केवल एक स्थान तक सीमित था या इसके तार दूसरे राज्यों तक जुड़े हैं, इसकी जांच जारी है।

उज्जैन से जुड़ा सप्लाई नेटवर्क

प्रारंभिक जांच में शराब की कथित सप्लाई का कनेक्शन मध्य प्रदेश के उज्जैन से सामने आया है। पुलिस के अनुसार शराब को गुजरात लाने के बाद उसमें मिलावट कर भावनगर और आसपास के क्षेत्रों में पहुंचाया गया। मामले में उज्जैन और भावनगर सहित अलग-अलग स्थानों से जुड़े लोगों के नाम सामने आए हैं।

ताजा रिपोर्टों में जांचकर्ताओं ने मेथेनॉल की सप्लाई के स्रोत को लेकर भी जांच तेज कर दी है। एक रिपोर्ट के मुताबिक इस्तेमाल किया गया मेथेनॉल दिल्ली से लाए जाने की जानकारी सामने आई है, हालांकि इसकी पूरी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

21 आरोपियों पर दर्ज हुई एफआईआर

पुलिस ने इस मामले में कुल 21 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोपियों पर नकली और रासायनिक रूप से दूषित शराब बनाने, उसकी बिक्री तथा वितरण से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कुछ रिपोर्टों के अनुसार पुलिस ने कई आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ भी शुरू कर दी है।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि जहरीली शराब की खेप कहां तैयार हुई, किसने इसे भावनगर पहुंचाया, किस-किस व्यक्ति ने इसमें मिलावट की और कितने लोगों तक यह शराब पहुंची।

पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई

घटना के बाद पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। मामले में चार पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है। आधिकारिक कार्रवाई का उद्देश्य ड्यूटी में कथित लापरवाही की जांच करना बताया गया है।

कुछ स्थानीय रिपोर्टों में इससे अधिक पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई का भी उल्लेख है, इसलिए अंतिम विभागीय आंकड़ा आधिकारिक आदेशों से स्पष्ट होना बाकी है।

SMC ने संभाली जांच की कमान

मामले की गंभीरता को देखते हुए गुजरात पुलिस की स्टेट मॉनिटरिंग सेल (SMC) ने जांच अपने हाथ में ले ली है। अब जांच केवल शराब पीने से हुई मौतों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सप्लाई नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि जहरीला रसायन कहां से आया, शराब किसने तैयार की, बोतलों में किसने भरा, इसे गुजरात तक कैसे पहुंचाया गया और स्थानीय स्तर पर इसे किन लोगों ने बेचने या बांटने का काम किया।

प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती

गुजरात में शराबबंदी लागू होने के बावजूद जहरीली शराब का यह मामला कानून-व्यवस्था और अवैध शराब के नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े करता है। घटना के बाद प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना है कि कहीं इसी संदिग्ध बैच की शराब दूसरे इलाकों में तो नहीं पहुंची।

पुलिस संदिग्ध शराब की खेप और उससे जुड़े लोगों की तलाश कर रही है। लोगों से भी अपील की जा रही है कि वे किसी भी संदिग्ध या अवैध शराब का सेवन न करें और यदि किसी व्यक्ति ने ऐसी शराब पी है तथा उसे उल्टी, सांस लेने में परेशानी, बेहोशी या दृष्टि संबंधी परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो तुरंत अस्पताल में चिकित्सा सहायता लें।

ताजा स्थिति

भावनगर जहरीली शराब कांड में 21 अगस्त 2026 तक मृतकों की संख्या 9 पहुंच चुकी है। 21 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज है, कई संदिग्ध पुलिस हिरासत में हैं और जांच की कमान SMC के पास है। पुलिस अब इस पूरे मामले के पीछे सक्रिय सप्लाई चेन और मुख्य आरोपियों तक पहुंचने में जुटी है।

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