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बड़ी खबर : सोजत सिटी में श्रीमद् भागवत कथा में शामिल हुए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, धर्ममय हुआ वातावरण





✍️ सोजत न्यूज़ | वरिष्ठ पत्रकार : ओमप्रकाश बोराणा
सोजत, 14 जनवरी।



सोजत सिटी के लिए आज का दिन ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण रहा, जब भारत के पूर्व राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद अपनी धर्मपत्नी श्रीमती सविता कोविंद एवं पुत्री स्वाति कोविंद के साथ सपरिवार सोजत सिटी पहुंचे। उनके आगमन से नगर में हर्ष और उत्साह का माहौल देखने को मिला।

पूर्व राष्ट्रपति श्री कोविंद जोधपुर से प्रस्थान कर सोजत सिटी पहुँचे, जहाँ आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के धार्मिक कार्यक्रम में उन्होंने सहभागिता की। सोजत पहुंचने पर उन्होंने विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लिया तथा श्रद्धालुओं से आत्मीय संवाद किया।

श्री पूर्णेश्वर धाम में यज्ञाहुति, कथा पंडाल में की शिरकत

कार्यक्रम के दौरान श्री रामनाथ कोविंद श्री पूर्णेश्वर धाम मंदिर पहुंचे, जहाँ उन्होंने विधिवत यज्ञाहुति अर्पित कर देश, प्रदेश और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके पश्चात वे कथा पंडाल पहुंचे और श्रीमद् भागवत कथा वाचन में श्रद्धापूर्वक सम्मिलित हुए।

मकर संक्रांति और एकादशी का शुभ संयोग

अपने उद्बोधन में पूर्व राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने कहा कि—

“आज का दिन अत्यंत पावन है, क्योंकि मकर संक्रांति के साथ एकादशी का भी शुभ संयोग है।”



उन्होंने इस अवसर पर कथा वाचक पूज्य श्री गोविंद देव गिरी जी महाराज एवं अपनी पुत्री स्वाति कोविंद को विशेष रूप से शुभकामनाएं दीं, क्योंकि दोनों का जन्मदिवस मकर संक्रांति के दिन होने का सौभाग्य प्राप्त है।

जनप्रतिनिधि एवं प्रशासन रहा मौजूद

इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन में

सोजत विधायक श्रीमती शोभा चौहान,

उपखण्ड अधिकारी मसिंगाराम,

पुलिस प्रशासन का जाप्ता,
सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा एवं व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।


आयोजक परिवार की भावनात्मक प्रतिक्रिया

कार्यक्रम के आयोजक महेंद्र पुत्र श्री बचानाराम राठौर परिवार ने बताया कि—

“मुझे बचपन से ही भगवान के प्रति गहरी आस्था रही है। श्रीमद् भागवत गीता और भागवत कथा का ज्ञान हर व्यक्ति के जीवन में आवश्यक है, जिससे समाज में सद्भाव और संस्कारों का विकास हो।”



सोजत सिटी में छाया धार्मिक उल्लास

पूर्व राष्ट्रपति के आगमन से सोजत सिटी में धार्मिक उल्लास और गौरव का वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने इसे अपने जीवन का सौभाग्यपूर्ण क्षण बताया।

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