सोजत: अरावली संरक्षण को लेकर नगर में सामाजिक संगठनों की हुंकार,कल राष्ट्रपति के नाम सौंपेंगे ज्ञापन।

वरिष्ठ पत्रकार चेतनजी व्यास के साथ अकरम खान की रिपोर्ट।

सोजत। नगर में सभी सामाजिक संस्थाओं एवं गणमान्यजनों तथा 36 कौम द्वारा 22 दिसम्बर को 11.30 बजें अस्पताल के पास ट्रोमा भवन के बाहर एकत्र होकर राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू के नाम उपखंड अधिकारी की मार्फत अरावली पर्वत श्रृंखला को बचाने के लिए एक ज्ञापन दिया जाऐंगा।

वरिष्ठ नागरिक समिति, पेंशनर्स समाज,भारत विकास परिषद्, अभिनव कला मंच, पर्यावरण संरक्षण न्यास,सोसल वेलफेयर सोसायटी,मानव सेवा समिति के पदाधिकारी एवं अन्य सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारी व गणमान्य जन तथा सोजत क्षेत्र वासी इस दौरान उपस्थित होंगे।

ज्ञातव्य है कि 20 नवम्बर 2025 को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली भू आकृतियों को ही आरावली पहाड़ियों श्रृंखला माना गया है इस फैसले के बाद राज्य में 11 हजार टीले खत्म हो जाएंगे । भारतीय वन सर्वेक्षण के आकलन के मुताबिक प्रदेश के 15 जिलों में मौजूद 12 हजार 81 अरावली पहाड़/टीले 20 मीटर या उससे अधिक ऊंचे हैं, लेकिन इनमें से केवल 1 हजार 48 ही ऐसे हैं जो 100 मीटर से ज्यादा ऊंचे हैं।


यानी 11 हजार 33 संरचनाएं अरावली नहीं कहीं जा सकेंगी। 20 मीटर ऊंचाई का मानक इसलिए अहम माना जाता रहा है, क्योंकि इतनी ऊंचाई की पहाड़ियां भी हवा के प्रवाह को रोकने वाली प्राकृतिक दीवार का काम करती हैं।पर्वतमाला भारत एवं विश्व की एक सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखला है, ।

सोजत भी आता है बीच में — अरावली पर्वत श्रृंखला जो गुजरात के पालनपुर से शुरू होकर राजस्थान, हरियाणा से होते हुए दिल्ली तक (लगभग 692 किमी) दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व दिशा में फैली है, जिसका लगभग 80% विस्तार राजस्थान में है और यह भारत की सबसे पुरानी वलित पर्वतों में से एक है, जो अब अवशिष्ट पर्वत का उदाहरण है और राजस्थान के लिए जीवनरेखा का काम करती है। इसके बीच में सोजत भी आता है तथा सोजत क्षेत्र की क ई पहाड़ियां आती हैं।‌

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