सोजत: पर्यावरण संरक्षण पर पेंशनर समाज की एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित।

वरिष्ठ पत्रकार चेतनजी व्यास के साथ अकरम खान की रिपोर्ट।

सोजत।वर्तमान समय में पर्यावरण सबसे ज्वलंत समस्या बन चुका है। प्रकृति के किसी भी घटक में असंतुलन आने से प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जाता है, जिसके परिणामस्वरूप प्राकृतिक आपदाएं उत्पन्न होती हैं।

यह विचार शुक्रवार को पेंशनर समाज भवन में आयोजित एक दिवसीय पर्यावरण कार्यशाला में पेंशनर समाज अध्यक्ष लालचंद मोयल ने व्यक्त किए। उन्होंने पॉलीथिन कैरी बैग, हानिकारक प्लास्टिक और कागज के गिलासों के बढ़ते उपयोग पर चिंता जताते हुए इनके विकल्प अपनाने की अपील की।

कार्यशाला में सेवा निवृत्त लोक अभियोजक जुगल किशोर दवे ने कहा कि पर्यावरण मानव के आर्थिक गतिविधियों से भी प्रभावित होता है। विकास की दौड़ में हरे-भरे पेड़ों और पहाड़ों की कटाई प्राकृतिक आपदाओं को सीधा निमंत्रण है। उपकोष अधिकारी रामेश्वर सैन ने जीव-जंतुओं एवं प्रकृति के संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पौधारोपण का आह्वान किया।

चेतन व्यास ने पेंशनर समाज द्वारा जनकल्याण के लिए मासिक कार्यक्रम बनाकर सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने का सुझाव दिया। कार्यशाला का प्रभावी संचालन रामस्वरूप भटनागर ने किया।

द्वितीय सत्र की परिचर्चा में सहायक कोषाधिकारी अनिल जैन ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में यह सत्र हम सभी के लिए चुनौतीपूर्ण है, जिसे सकारात्मक सोच के साथ स्वीकार करना होगा।

पर्यावरणविद् शंकर लाल पारीक ने कहा कि अनियंत्रित खान-पान के कारण अनेक समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं, इसलिए पारंपरिक और स्वास्थ्यवर्धक भोजन को अपनाना चाहिए। डॉ. कानाराम चौहान ने स्वास्थ्यवर्धक जीवनशैली से जुड़े उपयोगी सुझाव दिए।

शारीरिक शिक्षक संघ के संरक्षक सत्तूसिंह भाटी ने योग को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का पूरक बताते हुए नियमित योगाभ्यास को आवश्यक बताया। वहीं झूमरलाल गर्ग ने कहा कि संगीत का जीवन में विशेष महत्व है, जिससे मानसिक शांति की अनुभूति होती है।

कार्यशाला में अशोक सैन, महेंद्र माथुर, अब्दुल समदराही, सन्नी अब्राहम, पुसाराम जोशी सहित अनेक सदस्यों ने सक्रिय भागीदारी निभाई और पर्यावरण संरक्षण को लेकर अपने विचार साझा किए।

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