

सोजत। मेहंदी नगरी सोजत के 973वें स्थापना दिवस के अवसर पर शनिवार रात सोजत दुर्ग की तलहटी में आयोजित भव्य सांस्कृतिक संध्या राजस्थानी लोकसंस्कृति और पंजाबी संगीत के अनूठे संगम की साक्षी बनी। रामेलाव तालाब की तलहटी में आयोजित इस कार्यक्रम में राजस्थानी लोकगीतों की मिठास और पंजाबी संगीत की सुरीली धुनों ने ऐसा समां बांधा कि हजारों की संख्या में पहुंचे दर्शक देर रात तक संगीत की महफिल में झूमते नजर आए। सोजत नगर पालिका की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में कलाकारों की शानदार प्रस्तुतियों ने स्थापना दिवस के उत्सव को यादगार बना दिया।
कार्यक्रम में राजस्थानी लोकसंगीत की प्रसिद्ध गायिका ‘मरू कोकिला’ सीमा मिश्रा और पंजाबी गायक मनदीप रमाणा ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। दोनों कलाकारों की सुरीली आवाज, लोकगीतों की मधुरता और विभिन्न वाद्य यंत्रों के साथ प्रस्तुत संगीत ने पूरे माहौल को उत्सवमय बना दिया। ऐतिहासिक सोजत दुर्ग की तलहटी में सजी संगीत की महफिल और रोशनी से जगमगाता किला कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण रहे।
‘मरू कोकिला’ सीमा मिश्रा के लोकगीतों पर झूमे दर्शक
राजस्थानी लोकसंगीत की लोकप्रिय गायिका सीमा मिश्रा ने अपनी सुरीली आवाज में पारंपरिक लोकगीत प्रस्तुत कर राजस्थान की समृद्ध लोकसंस्कृति की झलक दिखाई। उनकी प्रस्तुतियों के दौरान दर्शकों में खासा उत्साह देखने को मिला।
सीमा मिश्रा ने “मारी घूमर छे नखराली रे मां”, “नखरालो देवरियो भाभी पर जादू कर गयो” और “मोर” जैसे गीतों की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। राजस्थानी लोकधुनों और पारंपरिक गीतों की गूंज के बीच दर्शक तालियां बजाते और संगीत का आनंद लेते नजर आए।
राजस्थान की लोकपरंपराओं, संस्कृति और संगीत को अपनी आवाज के माध्यम से प्रस्तुत करने वाली सीमा मिश्रा की गायकी ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। उनकी प्रस्तुतियों ने मेहंदी नगरी की सांस्कृतिक पहचान और लोकसंगीत की मिठास को एक बार फिर मंच पर जीवंत कर दिया।
पंजाबी गायक मनदीप रमाणा ने भी बांधा समां
कार्यक्रम में पंजाबी गायक मनदीप रमाणा की प्रस्तुति भी आकर्षण का केंद्र रही। उनकी सुरीली आवाज और संगीत की लय ने सांस्कृतिक संध्या में उत्साह का नया रंग भर दिया। राजस्थानी लोकधुनों के बीच पंजाबी संगीत की प्रस्तुति ने कार्यक्रम को विविधता प्रदान की।
राजस्थानी और पंजाबी संगीत के इस संगम ने दर्शकों को मनोरंजन के साथ अलग-अलग लोकसंस्कृतियों की झलक भी दिखाई। संगीत की धुनों के साथ पूरा आयोजन स्थल उत्सव के रंग में रंगा नजर आया।
रोशनी से जगमगाया ऐतिहासिक सोजत दुर्ग
सांस्कृतिक संध्या के दौरान ऐतिहासिक सोजत दुर्ग की तलहटी का नजारा आकर्षण का केंद्र रहा। रोशनी से जगमगाता दुर्ग और उसके आसपास उमड़ा जनसैलाब कार्यक्रम की भव्यता को दर्शा रहा था। रामेलाव तालाब की तलहटी में सजे इस आयोजन में संगीत, संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत का सुंदर मेल देखने को मिला।
सोजत के 973वें स्थापना दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम ने शहरवासियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर प्रदान किया। लोकगीतों और संगीत के माध्यम से राजस्थान की परंपराओं को मंच मिला, वहीं पंजाबी संगीत ने कार्यक्रम में नई ऊर्जा का संचार किया।
जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और गणमान्य नागरिकों ने की शिरकत
सांस्कृतिक संध्या में सोजत विधायक शोभा चौहान सहित अनेक जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और शहर के गणमान्य नागरिकों ने शिरकत की।
कार्यक्रम में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी राजेश चौहान, पूर्व कैबिनेट मंत्री लक्ष्मीनारायण दवे, नगर पालिका अध्यक्ष कीर्ति तंवर, न्यायिक मजिस्ट्रेट रामदेव सिंह सांदू, भाजपा नेता जुगलकिशोर निकुंब, राजेश तंवर, नगर पालिका उपाध्यक्ष राकेश पंवार, पंकज त्रिवेदी, प्रफुल्ल ओझा तथा नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी राघव मीणा सहित नगर पालिका के पार्षद और अन्य गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
सभी ने सांस्कृतिक संध्या में कलाकारों की प्रस्तुतियों का आनंद लिया। आयोजन ने शहर में उत्सव का माहौल बना दिया और स्थापना दिवस के अवसर पर सोजत की सांस्कृतिक पहचान को विशेष रूप से प्रदर्शित किया।
973वें स्थापना दिवस पर संस्कृति और विरासत का संदेश
सोजत महोत्सव केवल मनोरंजन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि शहर की ऐतिहासिक विरासत, लोकसंस्कृति और सामाजिक एकजुटता को प्रदर्शित करने का अवसर भी बना। राजस्थानी लोकगीतों की परंपरा और पंजाबी संगीत की धुनों के बीच आयोजित सांस्कृतिक संध्या ने यह संदेश दिया कि संगीत विभिन्न संस्कृतियों को जोड़ने का सशक्त माध्यम है।
सोजत दुर्ग की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, रामेलाव तालाब की तलहटी में उमड़ा जनसमूह और कलाकारों की शानदार प्रस्तुतियों ने 973वें स्थापना दिवस के आयोजन को यादगार बना दिया। नगर पालिका की ओर से आयोजित इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में शहरवासियों को संगीत और लोकसंस्कृति से जुड़ने का अवसर मिला।
सोजत महोत्सव की यह सांस्कृतिक संध्या शहर की ऐतिहासिक पहचान, राजस्थानी लोकपरंपरा और सांस्कृतिक समृद्धि की एक खूबसूरत तस्वीर बनकर सामने आई।




