सोजत में गुटखा ब्लैक में: आमजन परेशान, प्रशासन मौन


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*✍️ सोजत  वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश बोराणा*

*सोजत।  सहित सोजत क्षेत्र में गुटखा और पान मसाला की कालाबाजारी से आमजन बुरी तरह परेशान हैं। आरोप है कि होलसेल दुकानदारों द्वारा कृत्रिम कमी दिखाकर माल को ऊंचे दामों पर सप्लाई किया जा रहा है, जिसका सीधा असर खुदरा बाजार और आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। स्थिति यह है कि रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली छोटी पुड़िया भी निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से ज्यादा में बेची जा रही है।*

*एमआरपी से अधिक वसूली, जेब पर सीधा असर*

*स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि ₹5 की पुलिया ₹7 तक बेची जा रही है, वहीं ₹20 की पुड़िया ₹25 में वसूली जा रही है। कई जगहों पर ₹4 की पुड़िया ₹7में और ₹ 18 की एमआरपी के। ₹ 25 बावजूद उससे अधिक दाम पर बेचे जाने की शिकायतें हैं। इससे आमजन का दैनिक बजट प्रभावित हो रहा है और लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।*

*प्रमुख ब्रांड खुलेआम ब्लैक में*

*बाजार में Vimal, Dilbagh, Tansen और Vimal Select जैसे पान मसाला ब्रांड कथित रूप से अधिक कीमत पर बेचे जा रहे हैं। दुकानदारों का तर्क है कि उन्हें ही ऊंचे दाम पर माल मिल रहा है, जबकि उपभोक्ताओं का आरोप है कि कृत्रिम कमी बनाकर मुनाफाखोरी की जा रही है।*

*सिगरेट भी ब्लैक में*

*केवल गुटखा ही नहीं, सिगरेट की बिक्री में भी इसी तरह की अनियमितता सामने आ रही है। एमआरपी से अधिक वसूली के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही। उपभोक्ताओं का कहना है कि प्रशासनिक निगरानी के अभाव में व्यापारियों के हौसले बुलंद हैं।*

*प्रशासन पर उठे सवाल*

*जिला प्रशासन पर कार्रवाई न करने के आरोप लग रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार मौखिक शिकायतें की गईं, लेकिन जांच या चालान जैसी ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे कालाबाजारी करने वालों को खुली छूट मिलती दिख रही है।*

*उपभोक्ताओं की मांग*

*एमआरपी से अधिक वसूली पर सख्त कार्रवाई*

होलसेल और रिटेल दुकानों की संयुक्त जांच

स्टॉक और बिलों की जांच कर कृत्रिम कमी पर रोक

दोषियों पर जुर्माना और लाइसेंस निलंबन


*यदि समय रहते प्रशासन ने सख्ती नहीं दिखाई तो आने वाले दिनों में यह समस्या और गंभीर हो सकती है। आमजन ने चेतावनी दी है कि यदि कालाबाजारी पर अंकुश नहीं लगा तो वे सामूहिक रूप से विरोध दर्ज कराएंगे।*

*(यह रिपोर्ट स्थानीय उपभोक्ताओं से मिली जानकारी पर आधारित है। प्रशासनिक पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।)*

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