सोजत

सोजत: शीतला माता मेले में उमड़ा जनसैलाब, रंग-गुलाल और चंग की थाप पर नाचते गाते हुए पहुँची पारंपरिक गेरें।

अकरम खान की रिपोर्ट।

सोजत। शीतला सप्तमी के पावन अवसर पर शहर के मेला चौक स्थित प्राचीन शीतला माता मंदिर में मंगलवार को मुख्य मेले का आयोजन श्रद्धा और उल्लास के साथ हुआ। सोजत शहर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मेले में शामिल होने पहुँचे। पूरे शहर में दिनभर धार्मिक आस्था और उत्सव का माहौल बना रहा।

मुख्य मेले के अवसर पर मंगलवार दोपहर 1 से 4 बजे के बीच शहर के विभिन्न मोहल्लों और समाजों की परम्परागत गेरें चंग की थाप और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ नाचते-गाते शीतला माता मंदिर पहुँची। रंग-गुलाल और लोकगीतों के बीच निकली इन गेरों को देखने के लिए प्रमुख मार्गों, दुकानों के बाहर तथा मकानों की छतों पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

सभी गेरें अपने-अपने निर्धारित स्थानों और मोहल्लों से नाचते-गाते हुए मेला चौक पहुँची, जहां उनका स्वागत किया गया। चौधरियों के बास की गैर पारंपरिक अचकन-धोती, कमर में कमरबंद, हाथों में छतरियां और मुंह में व्हिसल लिए आकर्षक अंदाज में नाचती हुई पहुंची। हनुमान मंदिर और महादेव मंदिर के सामने पहुंचने पर गैरियों ने नृत्य करते हुए प्रणाम की विशेष मुद्रा भी बनाई।

वहीं माली समाज नयापुरा की गैर भी रंगीले अंदाज मे नजर आई। गैरियों के हाथों में हल, मूसल, हॉकी और छतरियां लेकर युवाओ ने   उत्साहपूर्वक नृत्य किया। इसी गैर में बच्चों की एक अलग गैर भी आकर्षण का केंद्र रही।

इस बार नेहड़ा बेरा की गैर भी शामिल हुई, जिसमें गैरिये एक ही रंग की छतरियां और लहरिया लिए नाचते नजर आए। इसी प्रकार चांदपोल गेट से सरगरा समाज की गैर भी निकाली गई। धोलीवाड़ी, पावटी का बास तथा मालियों के बड़ा बास की गैर ने भी अपनी पारंपरिक शैली से मेले की रौनक बढ़ायी।

मेले के चलते मेला चौक क्षेत्र में झूले और दुकानों की भी भरमार रही। खिलौने, घरेलू उपयोग की सामग्री, फर्नीचर, मिट्टी के बर्तन तथा फास्ट फूड सहित विभिन्न प्रकार की दुकानों से मेले की रौनक बढ़ गई। बड़ी संख्या में शहरवासियों के साथ आसपास के गाँवो से मेले मे पहुँचे हजारो कि संख्या मे लोगो ने जम कर खरीदारी करते हुए,मेले मे घूमने का आनंद लिया और मेले के विशेष आकर्षण के रूप मे लगने वाले तरह तरह के झूले झूल कर मेले को अपने लिए यादगार बनाया।

शीतला माता के इस ऐतिहासिक मेले की विशेष परंपरा बासोड़ा पूजन से भी जुड़ी है। सोमवार को घर-घर में महिलाओं ने बासोड़ा पूजन के लिए मिष्ठान, पकवान और ठंडा भोजन तैयार किया। परंपरा के अनुसार मंगलवार को शीतला माता को ठंडे भोजन का भोग लगाया जाएगा, जिसके बाद परिवार के सदस्य प्रसाद के रूप में वही भोजन ग्रहण करेंगे।

मेले के अंतिम दिन बुधवार को ब्राह्मण समाज का मेला भरेगा। इसके साथ ही आठ दिवसीय शीतला माता मेले का विधिवत समापन होगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!

AdBlock निष्क्रिय करें

प्रिय उपयोगकर्ता,

कृपया बेहतर अनुभव के लिए अपना AdBlock बंद (Deactivate) करें।

हमारी वेबसाइट को चलाने और आपको मुफ़्त सामग्री प्रदान करने में विज्ञापनों की सहायता होती है।

कृपया AdBlock को बंद करके पेज को रिफ्रेश करें।

आपका सहयोग हमारे लिए महत्त्वपूर्ण है।

धन्यवाद! 🙏