हर राजस्थानी पर 1 लाख का कर्ज! भजनलाल सरकार का कर्ज 6.76 लाख करोड़ के पार
केंद्र से मदद घटी, कर्ज बढ़ा, निवेश बढ़ा पर रोजगार घटा – एफआरबीएम रिपोर्ट ने खोली वित्तीय तस्वीर



✍️ वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश बोराणा

जयपुर।
राजस्थान की भजनलाल सरकार पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। राज्य वित्त विभाग की एफआरबीएम (FRBM) समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार सितंबर 2025 तक राज्य सरकार पर 6 लाख 76 हजार 513.55 करोड़ रुपए का कुल कर्ज हो चुका है, जो मार्च 2026 तक बढ़कर 7 लाख 26 हजार 384.84 करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। आंकड़ों के लिहाज से यह स्थिति बेहद चिंताजनक मानी जा रही है, क्योंकि सिर्फ एक साल में ही राज्य पर करीब 68 हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त कर्ज जुड़ गया है।

रिपोर्ट शुक्रवार देर रात वित्त विभाग की वेबसाइट पर अपलोड की गई, जिसके बाद प्रदेश की राजनीति और वित्तीय प्रबंधन पर बहस तेज हो गई है।



एक साल में 68 हजार करोड़ का अतिरिक्त कर्ज

एफआरबीएम रिपोर्ट के मुताबिक—

सितंबर 2024 तक राज्य पर कर्ज: 6 लाख 8 हजार 813.20 करोड़ रुपए

सितंबर 2025 तक कर्ज: 6 लाख 76 हजार 513.55 करोड़ रुपए


इस तरह महज 12 महीनों में राज्य सरकार पर करीब 68 हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त कर्ज चढ़ गया। अनुमान है कि अगर यही रफ्तार रही तो मार्च 2026 तक यह आंकड़ा 7.26 लाख करोड़ रुपए को पार कर जाएगा।


डबल इंजन सरकार, फिर भी केंद्रीय सहायता में भारी गिरावट

सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि प्रदेश और केंद्र—दोनों जगह डबल इंजन की सरकार होने के बावजूद केंद्रीय सहायता में कमी दर्ज की गई है।

अप्रैल–सितंबर 2025:
केंद्र से यूनियन ग्रांट मिली – 5,883.86 करोड़ रुपए

अप्रैल–सितंबर 2024:
केंद्र से यूनियन ग्रांट – 9,295.64 करोड़ रुपए


यानी इस साल समान अवधि में राज्य को 3,411.78 करोड़ रुपए कम केंद्रीय सहायता मिली। यह गिरावट ऐसे समय में सामने आई है जब राज्य का कर्ज लगातार बढ़ रहा है।



एमएसएमई में निवेश बढ़ा, लेकिन रोजगार घटा

एफआरबीएम रिपोर्ट में प्रदेश की अर्थव्यवस्था का एक विरोधाभासी चेहरा भी सामने आया है।
प्रदेश में एमएसएमई सेक्टर में निवेश तो बढ़ा है, लेकिन रोजगार घट गया है।

निवेश में वृद्धि: 32.44%

यूनिट रजिस्ट्रेशन: 2.51% की बढ़ोतरी


अप्रैल–दिसंबर 2025 के आंकड़े—

रजिस्टर्ड यूनिट: 2,70,251

निवेश: 7,220.15 करोड़ रुपए

रोजगार: 14,40,439


साल 2024 में—

रजिस्टर्ड यूनिट: 2.63 लाख

निवेश: 5,451.61 करोड़ रुपए

रोजगार: 14.48 लाख


यानी निवेश बढ़ने के बावजूद करीब 8,000 नौकरियां कम हो गईं। यह स्थिति सरकार की रोजगार नीति पर सवाल खड़े करती है।

पेट्रोलियम राजस्व में भी 28.79% की गिरावट

राज्य सरकार की आय का एक बड़ा स्रोत पेट्रोलियम उत्पादों से मिलने वाला राजस्व भी कमजोर पड़ा है।

अप्रैल–सितंबर 2025:
पेट्रोलियम राजस्व – 1,056.53 करोड़ रुपए

अप्रैल–सितंबर 2024:
पेट्रोलियम राजस्व – 1,483.71 करोड़ रुपए


इस तरह पेट्रोलियम राजस्व में 28.79% की गिरावट दर्ज की गई है।




भू-राजस्व और शराब से रिकॉर्ड कमाई

हालांकि कर्ज और आय में गिरावट के बीच सरकार के लिए राहत की बात यह रही कि भू-राजस्व और शराब बिक्री से रिकॉर्ड कमाई हुई।

भू-राजस्व:

2024: 198 करोड़ रुपए

2025: 552.39 करोड़ रुपए


शराब से राजस्व:

2025 में 7,587 करोड़ रुपए

पिछले साल की तुलना में 5.3% अधिक



हर राजस्थानी पर करीब 1 लाख का कर्ज

इससे पहले नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली भी सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने कहा था कि—

सरकार बनने के बाद दो साल में 1.55 लाख करोड़ रुपए का अतिरिक्त कर्ज लिया गया।

2026–27 तक यह कर्ज 7.26 लाख करोड़ रुपए के पार चला जाएगा।

इस हिसाब से प्रदेश के हर नागरिक पर करीब 1 लाख रुपए का कर्ज बनता है।



राजनीतिक और आर्थिक बहस तेज

कर्ज में तेज बढ़ोतरी, केंद्रीय सहायता में गिरावट, निवेश के बावजूद रोजगार में कमी और पेट्रोलियम राजस्व का घटना—ये सभी आंकड़े भजनलाल सरकार की आर्थिक नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। आने वाले बजट और विधानसभा सत्र में यह मुद्दा सरकार और विपक्ष के बीच सबसे बड़ा राजनीतिक हथियार बनता नजर आ रहा है।

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