जयपुर-सोजत मार्ग पर बढ़ा खतरा,कारों में सफ़ेद LED लाइट का आतंक, आंखें हो रही खराब – हॉस्पिटल में बढ़े मरीज

ओमप्रकाश बोराना
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जयपुर/सोजत। आधुनिकता की दौड़ में गाड़ियों में हाई-इंटेंसिटी LED हेडलाइट लगाने का ट्रेंड तेजी से बढ़ गया है। सफ़ेद और ब्लू-टोन वाली इन शार्प बीम लाइटों को वाहन मालिक बेहतर रोशनी और स्टाइल के लिए पसंद कर रहे हैं, लेकिन यही चमक अब सड़क सुरक्षा और स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। जयपुर के SMS मेडिकल कॉलेज समेत प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों में आंखों से संबंधित शिकायतों के साथ आने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

इंजीनियरिंग तौर पर ये लाइटें सड़क को नेचुरल रोशनी की तुलना में अधिक चमकदार बनाती हैं, जिससे ड्राइविंग में आसानी का दावा किया जाता है। लेकिन सामने से आने वाले वाहन चालक पर इन लाइटों का सीधा प्रभाव पड़ता है। तेज सफेद रोशनी कुछ सेकेंड्स के लिए आंखों की विज़िबिलिटी पूरी तरह खत्म कर देती है, जिसके चलते सड़क दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।


📈 SMS अस्पताल में बढ़ रहे मरीज

SMS मेडिकल कॉलेज के नेत्र विभाग में इन दिनों आंखों में जलन, ड्रायनेस और सिरदर्द के मामलों में तेजी देखी जा रही है। खासतौर पर रात के समय ड्राइव करने वाले युवाओं में ये लक्षण अधिक दिखाई दे रहे हैं।

सीनियर प्रोफेसर डॉ. पंकज शर्मा के अनुसार,

> “हाई-इंटेंसिटी व्हाइट व ब्लू LED का सबसे ज्यादा असर रेटिना पर पड़ता है। लगातार ग्लेयर का सामना करने वालों में आंखों का सूखापन, फोकस में दिक्कत, विज़न ब्लर, सिरदर्द, और जलन जैसे लक्षण तेजी से बढ़ रहे हैं। कई मरीजों में माइग्रेन और फोटोसेंसिटिविटी तक विकसित हो रही है।”



उन्होंने कहा कि रात में लंबे समय तक ऐसे प्रकाश के संपर्क में रहना आंखों के नर्व सेल्स को भी प्रभावित कर सकता है।


सड़क हादसों का जोखिम दोगुना

विशेषज्ञों का कहना है कि हाई-इंटेंसिटी सफ़ेद व ब्लू LED लाइटें रेटिना पर तीव्र प्रहार करती हैं, जिससे ड्राइवर अचानक कुछ सेकंड के लिए अंधेपन जैसा अनुभव करता है। ऐसे में वाहन नियंत्रण खोने की आशंका बढ़ जाती है।

ट्रैफिक विशेषज्ञ भी मानते हैं कि इन लाइटों पर सख्त नियम बनना जरूरी है। कई वाहन मालिक बिना RTO अनुमति आफ्टर-मार्केट LED और प्रोजेक्टर लाइट फिट करा रहे हैं, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है।

👁️ आंखों की सुरक्षा कैसे करें?

🔹 रात में ड्राइव करते समय एंटी-ग्लेयर चश्मे का उपयोग करें
🔹 हाई बीम का उपयोग केवल खाली सड़क पर करें
🔹 दूसरों की आंखों में सीधे प्रकाश न पड़ने दें
🔹 लंबे समय तक ड्राइव करते समय आंखों को आराम दें
🔹 आंखों में सूखापन हो तो डॉक्टर की सलाह से ल्यूब्रिकेंट ड्रॉप्स लें


सोजत-जयपुर मार्ग सहित प्रदेश की कई सड़कों पर सफ़ेद LED लाइटें ट्रेंड तो बन चुकी हैं, लेकिन ये ट्रेंड अब स्वास्थ्य के लिए गंभीर चेतावनी है। यदि जल्द नियम नहीं बने और जागरूकता नहीं बढ़ी तो आने वाले समय में आंखों की समस्याएं व सड़क हादसे खतरनाक स्तर तक बढ़ सकते हैं।

*सोजत न्यूज़*
वरिष्ठ पत्रकार – ओमप्रकाश बोराणा*

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