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आदर्श क्रेडिट घोटाला: ED ने कसी नकेल, सियासी गलियारों में मची खलबली,क्या 21 लाख निवेशकों का लंबा इंतजार अब होगा खत्म



✍️ वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश बोराणा

सोजत/जयपुर।
करीब 14,000 करोड़ रुपये के बहुचर्चित आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी घोटाले में एक साथ दो बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं, जिनसे न सिर्फ जांच एजेंसियां हरकत में आ गई हैं, बल्कि दिल्ली से लेकर जयपुर तक सियासी गलियारों में हलचल मच गई है।
एक ओर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने निवेशकों का पैसा लौटाने की दिशा में निर्णायक कदम उठाते हुए जब्त संपत्तियों के वैल्यूएशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है, वहीं दूसरी ओर इस मामले से जुड़ी एक सियासी मुलाकात ने केंद्र सरकार की सख्त नाराजगी भी सामने ला दी है।



रिवाइवल या रिकवरी? – समर्थकों की मांग और सरकार का स्टैंड

आदर्श क्रेडिट सोसाइटी से जुड़े कुछ समर्थकों ने हाल ही में एक सांसद से मुलाकात कर यह आग्रह किया था कि वे केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से बात कर सोसाइटी को ‘रिवाइव’ (पुनर्जीवित) करवाएं और नया बोर्ड गठित किया जाए, ताकि दोबारा कामकाज शुरू हो सके।

लेकिन सूत्रों के अनुसार, यह पहल केंद्र सरकार को रास नहीं आई। बताया जा रहा है कि अमित शाह इस मुलाकात से खुश नहीं हैं और उन्होंने इस पर नाराजगी जाहिर की है।
केंद्र का साफ संदेश है—
मामले का समाधान किसी बैकडोर राजनीतिक बातचीत से नहीं, बल्कि कानून के दायरे में ही होगा।
ED और SFIO जैसी एजेंसियां स्वतंत्र रूप से अपना काम कर रही हैं और करने दी जाएंगी।



ED का मास्टर स्ट्रोक: रिवाइवल नहीं, सीधे रिकवरी

सरकार और जांच एजेंसियों की मंशा अब पूरी तरह साफ हो चुकी है।
आदर्श क्रेडिट सोसाइटी को दोबारा खड़ा करने का कोई इरादा नहीं है, बल्कि
जब्त संपत्तियों को बेचकर निवेशकों का पैसा लौटाना ही एकमात्र रास्ता चुना गया है।

इसी रणनीति के तहत ED के जयपुर जोनल ऑफिस ने अब तक का सबसे ठोस और निर्णायक कदम उठा लिया है।



9 दिसंबर का बड़ा आदेश: वैल्यूएशन शुरू

ED के सहायक निदेशक मुकेश कुमार ने
9 दिसंबर 2025 को एक अहम आदेश जारी करते हुए
गुजरात के रजिस्टर्ड वैल्युअर अमित भट्ट को नियुक्त किया है।

क्या है आदेश का टारगेट?

राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, महाराष्ट्र समेत देश के विभिन्न राज्यों में स्थित

3676 अचल संपत्तियों (Immovable Properties) का

तत्काल प्रभाव से मूल्यांकन (Valuation)


इन संपत्तियों की पूरी सूची 11 नवंबर 2025 को ही वैल्युअर को सौंप दी गई थी।


अब अगला कदम: नीलामी की तैयारी

विशेषज्ञों के अनुसार, वैल्यूएशन का मतलब साफ है
ED अब नीलामी (Auction) की ओर बढ़ चुकी है।

कोर्ट से अनुमति मिलते ही

जब्त की गई संपत्तियों की खुली नीलामी होगी

नीलामी से मिलने वाली रकम को

जालोर, सिरोही, पाली सहित देशभर के करीब 21 लाख जमाकर्ताओं को लौटाया जाएगा


निवेशकों के लिए उम्मीद की किरण

सालों से अपने खून-पसीने की कमाई के लिए भटक रहे
21 लाख निवेशकों के लिए यह घटनाक्रम
सबसे मजबूत उम्मीद बनकर सामने आया है।

हालांकि, प्रक्रिया कानूनी और समयसाध्य है, लेकिन
✔️ ED का वैल्यूएशन ऑर्डर इस बात का साफ संकेत है कि अब मामला निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है।


सवाल बड़ा है…

क्या 14,000 करोड़ के इस घोटाले में
निवेशकों को उनकी पूरी या आंशिक राशि मिल पाएगी?
नीलामी की प्रक्रिया कितनी तेज और पारदर्शी होगी?

इन सवालों के जवाब आने वाले महीनों में तय होंगे,
लेकिन फिलहाल इतना तय है कि
आदर्श घोटाले में अब सिर्फ बातें नहीं, ठोस कार्रवाई शुरू हो चुकी है।

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