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मृत किसान को कागजों में जिंदा कर दी जमीन! जमवारामगढ़ उपपंजीयक कार्यालय में 34 साल बाद फर्जी रजिस्ट्री का सनसनीखेज खेल




जयपुर।
राजधानी जयपुर के जमवारामगढ़ तहसील से रजिस्ट्री व्यवस्था को शर्मसार कर देने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां 34 साल पहले मर चुके किसान को कागजों में जिंदा दिखाकर उसकी जमीन की रजिस्ट्री करा दी गई। पूरा फर्जीवाड़ा जमवारामगढ़ उपपंजीयक कार्यालय में हुआ, जहां फर्जी दस्तावेज, फर्जी किसान और कथित तौर पर तहसील कर्मियों की मिलीभगत से जमीन का सौदा निपटा दिया गया।

1991 में हो चुकी थी मौत, 2025 में करा दी रजिस्ट्री
मामला चावंडिया निवासी किसान रामदेव रैगर से जुड़ा है, जिनकी मृत्यु 26 दिसंबर 1991 को हो चुकी थी। इसके बावजूद भूमाफियाओं ने 34 साल बाद मृत किसान के नाम से फर्जी दस्तावेज तैयार किए और एक फर्जी व्यक्ति को किसान बताकर 25 अगस्त 2025 को जमीन की रजिस्ट्री करवा दी। हैरानी की बात यह है कि इतने वर्षों बाद भी न तो दस्तावेजों की सही तरीके से जांच हुई और न ही मृत्यु संबंधी रिकॉर्ड का सत्यापन किया गया।

उपपंजीयक कार्यालय में रचा गया पूरा षड्यंत्र
सूत्रों के अनुसार, यह पूरा खेल जमवारामगढ़ उपपंजीयक कार्यालय में रचा गया। फर्जी आधार, पहचान पत्र और अन्य कागजात के आधार पर रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी की गई। बताया जा रहा है कि इस फर्जीवाड़े में कुछ तहसील व पंजीयन कर्मियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। अब जब मामला उजागर हुआ है तो जिम्मेदार अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आ रहे हैं।

राजस्व और पंजीयन व्यवस्था पर खड़े हुए गंभीर सवाल
इस सनसनीखेज खुलासे के बाद प्रदेश की पंजीयन विभाग और राजस्व व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यदि 34 साल पहले मर चुके व्यक्ति के नाम से रजिस्ट्री हो सकती है, तो आम किसान और जमीन मालिकों की संपत्ति कितनी सुरक्षित है—यह बड़ा सवाल बन गया है।

कांग्रेस ने दी आंदोलन की चेतावनी
मामले को लेकर जयपुर जिला कांग्रेस अध्यक्ष गोपाल मीणा ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति की जमीन का मामला नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार का उदाहरण है। यदि दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच नहीं कराई गई तो कांग्रेस आंदोलन करेगी।

जांच की मांग, दोषियों पर कार्रवाई की अपेक्षा
फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर जांच की बात कही जा रही है, लेकिन पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों की मांग है कि पूरे फर्जीवाड़े की निष्पक्ष जांच हो, दोषी अधिकारियों और भूमाफियाओं पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए रजिस्ट्री प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाया जाए।

यह मामला न सिर्फ जमवारामगढ़ बल्कि पूरे राजस्थान की जमीन रजिस्ट्री व्यवस्था के लिए एक बड़ा चेतावनी संकेत बनकर सामने आया है।

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