सोजत: पूरणेश्वर धाम में गूंजा ‘गिरिराज धरण की जय’, गोवर्धन लीला का हुआ भावपूर्ण वर्णन- भक्ति के सैलाब के बीच भाजपा प्रदेशाध्यक्ष श्री मदन राठौड़ ने लिया स्वामी गोविंद देव गिरी जी का आशीर्वाद।

अकरम खान की रिपोर्ट।
सोजत। पूरणेश्वर धाम में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।
कथा स्थल पर “गिरिराज धरण की जय” के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा। स्वामी डॉ. रामस्वरूप जी शास्त्री के सानिध्य एवं समाजसेवी वचनाराम जी राठौड़ की चार वर्षीय उपासना के उपलक्ष्य में आयोजित इस कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े।

कथा के छठे दिन अंतरराष्ट्रीय कथा व्यास एवं श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी श्री गोविंद देव गिरी जी महाराज ने गोवर्धन पर्वत एवं गिरिराज धरण की लीला का भावपूर्ण और जीवंत वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने देवराज इंद्र के अहंकार का मर्दन करते हुए अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत धारण कर ब्रजवासियों की रक्षा की।

महाराज जी ने कहा कि यह लीला हमें अहंकार त्याग कर भक्ति, समर्पण और एकता का मार्ग अपनाने की प्रेरणा देती है।
इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद श्री मदन राठौड़ कथा स्थल पर पहुंचे और स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया।

कार्यक्रम में कई जनप्रतिनिधि एवं विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से—
श्री लक्ष्मीनारायण दवे (पूर्व कैबिनेट मंत्री), श्रीमती शोभा चौहान (विधायक, सोजत), श्री सुनील भंडारी (भाजपा जिलाध्यक्ष), नरपतराज सोलंकी(भाजपा जिलाउपाध्यक्ष), श्रीमती मंजू जुगलकिशोर निकुंम (नगर पालिका अध्यक्ष), श्री कन्हैयालाल ओझा (युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष), श्री राजेश तंवर, श्री पंकज त्रिवेदी (अपर लोक अभियोजक) एवं श्री प्रफुल ओझा शामिल रहे।
कथा आयोजन को सफल बनाने में घांची समाज एवं आयोजक परिवार का विशेष योगदान रहा। इस दौरान भारतीय घांची महासभा पूरणेश्वर धाम के अध्यक्ष श्री नेनाराम निकुंम, मुख्य आयोजक श्री वचनाराम राठौड़, श्री महेंद्र राठौड़, श्री मदन पंवार, श्री बाबूलाल पंवार एवं पालिका चेयरमैन प्रतिनिधि श्री जुगल किशोर निकुंम सहित बड़ी संख्या में समाजबंधु एवं चौधरीगण उपस्थित रहे।
आज कि कथा के समापन पर आयोजकों द्वारा अतिथियों का सम्मान किया गया तथा कथा स्थल पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने भक्ति रस में सराबोर होकर गोवर्धन लीला का श्रवण किया।



