✍️ वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश बोराणा
धाकड़ी। ग्राम पंचायत धाकड़ी में कृषि विभाग के तत्वावधान में एक दिवसीय कृषक गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक खेती, जैविक खेती, आधुनिक कृषि तकनीकों तथा सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कृषि एवं उद्यानिकी योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान करना रहा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में क्षेत्र के किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर खेती से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम के दौरान संयुक्त निदेशक आत्मा श्री प्रदीप छाजेड़ ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में प्राकृतिक एवं जैविक खेती की ओर बढ़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है, जबकि प्राकृतिक खेती से भूमि की गुणवत्ता बेहतर होती है, उत्पादन लागत कम होती है तथा किसानों की आय में भी वृद्धि संभव है। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती की तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर काजरी के वैज्ञानिक श्री चंदन ने “अपना खेत बचाओ” अभियान के तहत किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, फसल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य सुधार तथा वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने किसानों को बताया कि बदलते मौसम के अनुरूप नई तकनीकों को अपनाकर बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
डॉ. जब्बार तेतरवाल ने किसानों को कृषि क्षेत्र में विकसित नई तकनीकों, उन्नत कृषि पद्धतियों तथा आधुनिक उपकरणों के उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तरीके से खेती करने से कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
उद्यान विभाग की ओर से सहायक कृषि अधिकारी श्री दिलीप सिंह लखावत ने किसानों को बागवानी विकास योजनाओं, सौर ऊर्जा आधारित कृषि उपकरणों, फव्वारा (स्प्रिंकलर) संयंत्र, ड्रिप सिंचाई प्रणाली तथा उद्यानिकी विभाग द्वारा संचालित विभिन्न अनुदान योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार किसानों को जल संरक्षण एवं आधुनिक सिंचाई प्रणाली अपनाने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहायता प्रदान कर रही है।
सेवानिवृत्त कृषि अधिकारी श्री भगवान सिंह ने किसानों को फलदार पौधों के बगीचे विकसित करने, पौधरोपण, बागवानी विस्तार तथा कृषि एवं उद्यानिकी विभाग की विभिन्न सब्सिडी योजनाओं की जानकारी देते हुए किसानों को इनका अधिकाधिक लाभ उठाने की सलाह दी।
कृषि अधिकारी रजनी सीरवी ने किसानों को मृदा जांच के महत्व, जिप्सम के उपयोग, भूमि की उर्वरता बढ़ाने के उपाय तथा संतुलित उर्वरक प्रबंधन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि समय-समय पर मिट्टी की जांच करवाकर वैज्ञानिक सलाह के अनुसार खेती करने से उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है।
कार्यक्रम में सहायक निदेशक कृषि विस्तार श्री कैलाश ने कृषि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं, तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं किसानों को उपलब्ध सुविधाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की तथा किसानों को सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।
गोष्ठी के दौरान श्री कुंदन सिंह, श्री सुभाष माली, कृषि पर्यवेक्षक सीमा, मीनू चौधरी, राजश्री तथा रामलाल सीरवी सहित कृषि विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। उन्होंने किसानों की समस्याओं को सुना तथा विभिन्न कृषि योजनाओं एवं तकनीकी विषयों पर मार्गदर्शन दिया।
कार्यक्रम के अंत में किसानों ने विशेषज्ञों से खेती से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तारपूर्वक समाधान किया। किसानों ने इस प्रकार की गोष्ठियों को अत्यंत उपयोगी बताते हुए भविष्य में भी नियमित रूप से ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की मांग की।
