
सोजत न्यूज़ वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश बोराणा की खास खबर
जयपुर/सोजत। राजस्थान में मानसून की बेरुखी, कम बारिश और खरीफ फसलों को हुए नुकसान के चलते राज्य सरकार ने किसानों एवं पशुपालकों को राहत देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के 14 जिलों की 80 तहसीलों को गंभीर एवं मध्यम सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। इनमें 69 तहसीलों को गंभीर तथा 11 तहसीलों को मध्यम सूखाग्रस्त श्रेणी में रखा गया है। सरकार की ओर से जारी अधिसूचनाओं के अनुसार, संबंधित प्रावधान अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख से छह महीने तक प्रभावी रहेंगे।
इस घोषणा के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि सूखाग्रस्त तहसील घोषित होने पर किसानों को क्या फायदा मिलेगा? क्या फसल खराबे का मुआवजा मिलेगा? क्या बैंक ऋण की वसूली पर राहत मिलेगी? पशुओं के लिए चारा कहां से मिलेगा? क्या पेयजल की व्यवस्था की जाएगी?
इन सवालों के बीच प्रभावित किसानों और पशुपालकों को राहत की उम्मीद जगी है। हालांकि, अलग-अलग योजनाओं का लाभ संबंधित सरकारी नियमों, पात्रता, फसल नुकसान के आकलन और आगे जारी होने वाले आदेशों के आधार पर मिलेगा।
1. किसानों को फसल खराबे का मुआवजा मिल सकता है
कम बारिश के कारण जिन किसानों की खरीफ फसलें खराब हुई हैं, उनके लिए कृषि आदान-अनुदान यानी फसल नुकसान की सहायता सबसे महत्वपूर्ण राहत हो सकती है।
सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित होने के बाद पात्र किसानों को निर्धारित नियमों के अनुसार सहायता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। इसके लिए फसल खराबे का आकलन, गिरदावरी रिपोर्ट और संबंधित सरकारी मापदंड महत्वपूर्ण होंगे।
किसानों को ध्यान रखना चाहिए:
– खेत में फसल खराबे की स्थिति का राजस्व रिकॉर्ड में सही आकलन होना जरूरी है।
– कृषि एवं राजस्व विभाग की ओर से निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नुकसान का सत्यापन किया जा सकता है।
– सहायता की पात्रता और राशि सरकारी नियमों के अनुसार निर्धारित होगी।
– सूखाग्रस्त घोषणा मात्र से प्रत्येक किसान को स्वतः मुआवजा मिलना सुनिश्चित नहीं होता।
इसलिए किसानों को अपनी फसल और जमीन से संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए तथा स्थानीय पटवारी एवं कृषि विभाग से संपर्क बनाए रखना चाहिए।
2. पशुओं के लिए खुल सकते हैं चारा डिपो
सूखे का सबसे गंभीर असर खेती के साथ पशुपालन पर भी पड़ता है। खेतों में चारा कम होने से गाय, भैंस, भेड़, बकरी और अन्य पशुओं के पालन-पोषण में कठिनाई आती है।
राज्य सरकार की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं के लिए चारा डिपो खोलने की घोषणा की गई है। इससे जरूरतमंद पशुपालकों को राहत मिलने की उम्मीद है।
चारा डिपो की व्यवस्था लागू होने पर निर्धारित नियमों के अनुसार पशुपालकों को रियायती दरों पर चारा उपलब्ध कराया जा सकता है। हालांकि, डिपो कहां खुलेंगे, कितनी मात्रा में चारा मिलेगा और किस दर पर उपलब्ध होगा, यह संबंधित आदेशों एवं स्थानीय व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
पशुपालकों को अपने क्षेत्र के पशुपालन विभाग और प्रशासन से चारा डिपो की जानकारी लेनी चाहिए।
3. पेयजल संकट से निपटने के लिए उठाए जा सकते हैं कदम
सूखे की स्थिति में ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की समस्या भी गंभीर हो जाती है। कुओं, तालाबों, ट्यूबवेल और अन्य जल स्रोतों में पानी कम होने से ग्रामीणों के साथ पशुओं को भी परेशानी होती है।
ऐसे हालात में प्रशासन जरूरत के अनुसार पेयजल आपूर्ति, टैंकरों से पानी पहुंचाने तथा अन्य आपातकालीन उपायों पर कार्रवाई कर सकता है।
प्रभावित गांवों में पानी की उपलब्धता का आकलन कर आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं। हालांकि, प्रत्येक गांव में टैंकर चलाने या किसी निश्चित अवधि तक पानी देने की व्यवस्था स्वतः लागू नहीं होती। इसके लिए स्थानीय जरूरत और प्रशासनिक आदेश महत्वपूर्ण होंगे।
4. भू-राजस्व वसूली में मिल सकती है राहत
सूखाग्रस्त क्षेत्रों के लिए लागू कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत निर्धारित शर्तों के अनुसार भू-राजस्व वसूली से संबंधित राहत मिल सकती है।
इसका उद्देश्य सूखे से प्रभावित किसानों पर तत्काल आर्थिक दबाव कम करना है। लेकिन यह समझना जरूरी है कि भू-राजस्व संबंधी राहत और बैंक से लिए गए कृषि ऋण की वसूली अलग-अलग विषय हैं।
किसानों को यह पता करना चाहिए कि उनके क्षेत्र में कौन-से राजस्व भुगतान स्थगित किए गए हैं, किन पर राहत लागू है और उसकी अवधि क्या है।
5. कृषि ऋण की वसूली पर क्या मिलेगी राहत?
सूखाग्रस्त घोषणा के बाद किसानों के बीच सबसे अधिक चर्चा कृषि ऋण को लेकर है। किसानों को उम्मीद है कि फसल खराब होने के कारण उन्हें ऋण चुकाने में राहत मिलेगी।
लागू कानूनी प्रावधानों और संबंधित आदेशों के तहत पात्र मामलों में ऋण वसूली या उससे जुड़ी प्रक्रियाओं पर राहत मिल सकती है। लेकिन सभी बैंकों के सभी प्रकार के ऋण अपने आप माफ या स्थगित नहीं हो जाते।
किसानों को अपने बैंक से लिखित जानकारी लेनी चाहिए कि उनके कृषि ऋण पर कोई स्थगन, पुनर्निर्धारण या अन्य राहत लागू हुई है या नहीं।
ध्यान रहे कि ऋण माफी, ऋण की किस्त स्थगित करना और वसूली की कार्रवाई रोकना तीन अलग-अलग बातें हैं।
6. खेतों की गिरदावरी और फसल नुकसान का आकलन महत्वपूर्ण
फसल नुकसान के बदले सहायता प्राप्त करने के लिए गिरदावरी और नुकसान का सत्यापन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
किसानों को चाहिए कि वे अपने खेत में हुए नुकसान की जानकारी संबंधित पटवारी और कृषि विभाग तक पहुंचाएं। यदि फसल का नुकसान राजस्व रिकॉर्ड में सही तरीके से दर्ज नहीं हुआ है, तो निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अधिकारियों के सामने अपनी बात रखें।
सहायता की पात्रता तय करते समय फसल की स्थिति, प्रभावित क्षेत्र, नुकसान का आकलन और लागू नियमों को ध्यान में रखा जा सकता है।
7. छोटे और सीमांत किसानों को प्राथमिकता मिल सकती है
सूखे के कारण छोटे और सीमांत किसानों की आर्थिक स्थिति अधिक प्रभावित हो सकती है। खेती की लागत निकलना मुश्किल हो जाता है और अगली फसल की तैयारी के लिए पूंजी की कमी पैदा होती है।
सरकारी राहत योजनाओं में पात्रता के अनुसार किसानों को सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है। हालांकि, किसी विशेष वर्ग को अतिरिक्त राशि या प्राथमिकता तभी सुनिश्चित मानी जाएगी, जब संबंधित योजना या सरकारी आदेश में ऐसा प्रावधान हो।
8. मनरेगा और अन्य ग्रामीण राहत कार्यों से मिल सकता है रोजगार
सूखे की स्थिति में ग्रामीण परिवारों की आय प्रभावित होने पर रोजगार की मांग बढ़ सकती है। ऐसे में मनरेगा के तहत पात्र जॉब कार्डधारक परिवार निर्धारित नियमों के अनुसार काम की मांग कर सकते हैं।
तालाबों की मरम्मत, जल संरक्षण, जल संचयन और अन्य अनुमत कार्य ग्रामीण क्षेत्रों के लिए उपयोगी हो सकते हैं। लेकिन सूखाग्रस्त घोषित होने मात्र से प्रत्येक परिवार को अतिरिक्त रोजगार दिवस या अलग से नकद सहायता स्वतः मिलने की गारंटी नहीं है।
रोजगार चाहने वाले परिवार ग्राम पंचायत में आवेदन कर सकते हैं और अपने काम की मांग का रिकॉर्ड सुरक्षित रख सकते हैं।
9. पशुपालकों के लिए पशु शिविर और चिकित्सा सुविधाएं
सूखे में चारे और पानी की कमी से पशुओं के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। ऐसे में प्रशासन स्थानीय जरूरतों के अनुसार पशुओं के लिए पानी, चारा और पशु चिकित्सा सेवाओं की व्यवस्था करने के कदम उठा सकता है।
यदि किसी क्षेत्र में पशुओं के लिए शिविर या अन्य विशेष सहायता शुरू की जाती है, तो उसकी जानकारी संबंधित विभाग से प्राप्त की जा सकती है। ऐसी सुविधाएं उपलब्ध होने की पुष्टि स्थानीय प्रशासन के आदेशों से ही होगी।
10. सोजत सहित पाली जिले के किसानों के लिए क्या मायने?
पाली जिले के लिए यह घोषणा विशेष महत्व रखती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पाली जिले की आठ तहसीलें सूखाग्रस्त घोषित की गई हैं। इनमें सोजत, पाली, सुमेरपुर, देसूरी, बाली, मारवाड़ जंक्शन, रानी और रोहट शामिल हैं।
कम बारिश के कारण खरीफ फसलों को नुकसान झेलने वाले किसानों के लिए अब फसल नुकसान का सही आकलन, पात्रता के अनुसार सहायता, पशुओं के लिए चारा और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता प्रमुख मुद्दे होंगे।
सोजत क्षेत्र में खेती और पशुपालन से जुड़े परिवारों की नजर अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर रहेगी। किसानों को चाहिए कि वे पटवारी, तहसील कार्यालय, कृषि विभाग और संबंधित बैंक से संपर्क कर अपने मामले में लागू राहत की जानकारी प्राप्त करें।
किसानों के लिए जरूरी सलाह: ये दस्तावेज रखें तैयार
सूखाग्रस्त क्षेत्र में रहने वाले किसानों को निम्न दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए:
1. जन आधार कार्ड एवं आधार कार्ड।
2. जमीन की जमाबंदी और खसरा संबंधी दस्तावेज।
3. बैंक खाते की जानकारी।
4. कृषि ऋण से संबंधित दस्तावेज, यदि ऋण लिया है।
5. फसल बीमा से संबंधित दस्तावेज, यदि बीमा करवाया है।
6. फसल खराबे और गिरदावरी से संबंधित उपलब्ध रिकॉर्ड।
7. मोबाइल नंबर और अन्य जरूरी संपर्क विवरण।
फसल बीमा का लाभ बीमा पॉलिसी, अधिसूचित क्षेत्र, फसल, नुकसान के प्रकार और लागू नियमों पर निर्भर करेगा। सूखाग्रस्त घोषणा से बीमा राशि स्वतः स्वीकृत नहीं होती।
आखिर सूखाग्रस्त घोषित होने का सबसे बड़ा फायदा क्या?
सूखाग्रस्त घोषणा का सबसे बड़ा महत्व यह है कि इससे प्रभावित क्षेत्रों में सूखे से संबंधित कानूनी प्रावधानों और राहत उपायों को लागू करने का रास्ता खुलता है। इसके माध्यम से पात्र किसानों को कृषि सहायता, पशुपालकों के लिए चारा तथा जरूरत के अनुसार पेयजल और अन्य राहत व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि, हर राहत का स्वरूप, राशि और पात्रता अलग हो सकती है। इसलिए किसानों को अफवाहों पर भरोसा करने के बजाय सरकारी आदेशों और संबंधित विभागों से प्राप्त जानकारी के आधार पर ही निर्णय लेना चाहिए।
राजस्थान सरकार की सूखाग्रस्त तहसीलों की घोषणा से प्रभावित किसानों और पशुपालकों को राहत की उम्मीद जरूर जगी है। अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि फसल खराबे की सहायता कब जारी होगी, चारा डिपो कहां खुलेंगे, पेयजल की व्यवस्था कैसे होगी और ऋण संबंधी राहत किन किसानों को मिलेगी। इन बिंदुओं पर जारी होने वाले विस्तृत सरकारी निर्देश ही वास्तविक लाभ तय करेंगे।
सोजत न्यूज़ — सच कहने का दम।





