सोजत की धरा पर गूंजे आचार्य श्री रघुनाथमल जी महाराज सा. के जयकारे, 60 वर्ष के संयम में मात्र 975 दिन आहार लेने वाले महातपस्वी को दी भावांजलि।

अकरम खान की रिपोर्ट।
प्रवर्तक श्री सुकनमुनि जी महाराज सा. व उपप्रवर्तक श्री अमृतमुनि जी महाराज सा के प्रवचनों से श्रावक हुए भाव-विभोर, मुणोत परिवार ने लिया प्रभावना का लाभ
त्याग की प्रतिमूर्ति थे आचार्य श्री: प्रवर्तक सुकनमुनि जी महाराज सा.
सिद्धांतों से समझौता नहीं किया: उपप्रवर्तक अमृतमुनि जी महाराज सा.

सोजत सिटी। मरुधरा की पावन नगरी सोजत सिटी भक्ति एवं धर्म ध्यान के सागर में डूब गई, जब बड़े जैन स्थानक में सोजत के ही लाल, युगप्रधान आचार्य सम्राट श्री रघुनाथमल जी महाराज सा. का 316वां जन्मोत्सव तप त्याग, धर्म ध्यान, साधना आराधना व जप जाप के विविध आयोजनों के साथ हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया।
मारवाड़ सहित देश भर से उमड़े जनसैलाब के बीच श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य गुरुदेव श्री सुकनमुनि जी महाराज सा. एवं तपस्वी रत्न उपप्रवर्तक श्री अमृत मुनि जी महाराज सा. आदि ठाणा 5 के मुखारविंद से आचार्य श्री की गौरवगाथा सुनकर श्रद्धालु नतमस्तक हो गए।
धर्मसभा का आगाज सामूहिक नवकार महामंत्र के जाप एवं प्रभु स्तुति मंगलाचरण से हुआ। भक्त श्रद्धालुओं ने एक शहर में नवकार महामंत्र का जाप कर समूचे क्षेत्र को नवकार से गूंजा दिया। सुमधुर स्वर में आचार्य रघुनाथमल महाराज की स्तुति और प्रार्थना की गई। “पूज्य रघुपत जी की बलिहारी.” के स्वरों ने उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया।
गुरुदेव का जीवन व्रज से भी कठोर एवं फूल से भी कोमल था…
इस अवसर पर विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए शासन गौरव प्रवर्तक श्री सुकनमुनि जी महाराज सा. ने कहा कि सोजत की माटी धन्य है जिसने ऐसे वीर तपस्वी को जन्म दिया। उन्होंने कहा कि आचार्य श्री रघुनाथमल जी महाराज सा. का जीवन ‘वज्र से भी कठोर और फूल से भी कोमल’ था। पूज्य प्रवर्तक श्री ने बताया कि 60 वर्षों के लंबे संयम जीवन में आचार्य श्री ने केवल 975 दिन ही आहार ग्रहण किया, जो मानव इतिहास में एक आश्चर्य है। उन्होंने यति परम्परा के शिथिलाचार को मिटाकर शुद्ध स्थानकवासी परम्परा को स्थापित किया। धर्म प्रचार के दौरान उन्हें विष मिश्रित आहार दिया गया, तीन दिनों तक हवेली में कैद रखा गया, और पत्थरों के प्रहार भी सहने पड़े, किन्तु उन्होंने हर उपसर्ग को ‘समभाव’ से सहकर धर्म की विजय पताका फहराई।
गुरुदेव ने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया: उपप्रवर्तक श्री अमृतमुनि जी म.सा.
ज्योतिष सम्राट तपस्वीरत्न श्री अमृतमुनि जी महाराज सा. ने अपने ओजस्वी प्रवचन में आचार्य श्री की दूरदर्शिता का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि आचार्य श्री ने 32 आगमों का सार निकालकर ’32 हुंडियों’ की रचना की, जो आज भी हमारा मार्गदर्शन कर रही हैं। पूज्य श्री ने कहा कि आचार्य श्री सिद्धांतों के पक्के थे; उन्होंने सत्य की रक्षा के लिए अपने ही शिष्य को संघ से पृथक करने का कठोर निर्णय लिया, लेकिन मार्ग से विचलित नहीं हुए। साथ ही, महासती श्री रत्नकवर जी म.सा. को दीक्षित कर मरुधरा में प्रथम साध्वी परम्परा की शुरुआत कर नारी शक्ति का उत्थान किया। सभा में युवा प्रणेता श्री महेश मुनि महाराज, बालयोगी श्री अखिलेश मुनि महाराज और डॉ. श्री वरुण मुनि महाराज का भी पावन सानिध्य प्राप्त हुआ। डॉ.श्री वरुण मुनि महाराज ने युवाओं को आचार्य श्री के त्यागमय जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
भामाशाह मुणोत का भव्य अभिनंदन…
इस मौके पर श्रद्धालु श्रावक श्राविकाओं को प्रभावना देकर सम्मानित करने वाले समाजसेवी भामाशाह मंगलचंद मुणोत का जैन संघ की ओर से शाब्दिक अभिनंदन किया गया। संघ के पदाधिकारियों ने मुणोत परिवार की उदारता और धर्म के प्रति समर्पण की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।
इस अवसर पर श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के अध्यक्ष, मंत्री एवं अन्य पदाधिकारियों ने आचार्य श्री के प्रति अपनी भावांजलि अर्पित की और उन्हें सोजत का गौरव बताया। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, सोजत सिटी के पदाधिकारियों ने बताया कि कार्यक्रम में सोजत और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लिया और गुरु दर्शन कर अपने जीवन को धन्य बनाया। अंत में संघ द्वारा सभी का आभार व्यक्त किया गया। इस अवसर पर ललित पगारिया, पदमचंद धोका, राजेश कोरीमुथा, प्रवीण बोहरा, विनोद लोढ़ा, मंगलचंद मुणोत, उगम कटारिया, धर्मीचंद कासवा, हेमंत सिंघवी, कैलाश जांगिड, रविन्द्र गुप्ता सहित श्रद्धालु जन उपस्थित थे।



