खांसी ने बढ़ाई परेशानी: जानिए कारण, प्रकार, बचाव और आयुर्वेदिक उपचार

बदलते मौसम, धूल-धुएं और संक्रमण के बीच बढ़ रहे खांसी के मामले, विशेषज्ञों ने दी सावधानी बरतने की सलाह



✍️ वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश बोराणा

खांसी (Cough) एक सामान्य लेकिन महत्वपूर्ण शारीरिक प्रतिक्रिया है, जो शरीर को श्वसन तंत्र में मौजूद धूल, वायरस, बैक्टीरिया, बलगम या अन्य हानिकारक तत्वों से बचाने का काम करती है। चिकित्सकों के अनुसार खांसी स्वयं कोई बीमारी नहीं होती, बल्कि यह शरीर में चल रही किसी समस्या या संक्रमण का संकेत होती है। मौसम परिवर्तन, प्रदूषण, एलर्जी और वायरल संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच खांसी की समस्या तेजी से लोगों को प्रभावित कर रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि खांसी लंबे समय तक बनी रहे या इसके साथ बुखार, सांस लेने में तकलीफ, बलगम में खून या वजन कम होने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

     खांसी होने के प्रमुख कारण

1. सर्दी-जुकाम और वायरल संक्रमण

सर्दी-जुकाम खांसी का सबसे सामान्य कारण माना जाता है। वायरस संक्रमण के कारण गले और श्वासनलिका में सूजन आ जाती है, जिससे खांसी शुरू हो जाती है।

2. एलर्जी

धूल, धुआं, परागकण, तेज गंध या रसायनों के संपर्क में आने से एलर्जी हो सकती है। इससे गले में जलन और सूजन होती है और व्यक्ति को लगातार खांसी आने लगती है।

3. दमा (Asthma)

दमा के मरीजों में श्वसन नलिकाएं संकरी हो जाती हैं। ऐसे लोगों को रात में या अधिक मेहनत करने के बाद खांसी और सांस लेने में कठिनाई होती है।

4. एसिडिटी और GERD

जब पेट का अम्ल भोजन नली में वापस आने लगता है तो गले में जलन पैदा होती है। यह समस्या विशेषकर रात में लेटने पर अधिक खांसी का कारण बनती है।

5. धूम्रपान

स्मोकिंग करने वालों में “स्मोकर कफ” आम समस्या है। धुएं और जहरीले रसायनों के कारण फेफड़ों और गले में जलन होती है।

6. फेफड़ों का संक्रमण

ब्रोंकाइटिस, निमोनिया, टीबी और अन्य संक्रमणों के कारण बलगम वाली खांसी हो सकती है। ऐसे मामलों में बुखार और कमजोरी भी महसूस होती है।

7. वातावरणीय कारण

अत्यधिक ठंड, धूलभरा वातावरण, प्रदूषण और सूखी हवा भी खांसी को बढ़ा सकती है।

8. दवाइयों का साइड इफेक्ट

कुछ ब्लड प्रेशर की दवाइयां, विशेषकर ACE Inhibitors, लगातार सूखी खांसी का कारण बन सकती हैं।

9. गंभीर फेफड़ों की बीमारियां

टीबी, COPD और फेफड़ों के कैंसर जैसी बीमारियों में लंबे समय तक खांसी बनी रहती है। ऐसे मामलों में तुरंत जांच करवाना जरूरी है।

10. मानसिक तनाव

विशेषज्ञ बताते हैं कि अधिक तनाव और चिंता भी कई बार खांसी का कारण बन सकती है।

खांसी के प्रमुख प्रकार

तीव्र खांसी (Acute Cough)

यह कुछ दिनों से लेकर एक सप्ताह तक रहती है और सामान्य वायरल संक्रमण से जुड़ी होती है।

दीर्घकालिक खांसी (Chronic Cough)

तीन सप्ताह से अधिक समय तक रहने वाली खांसी को क्रॉनिक खांसी कहा जाता है।

बलगम वाली खांसी

इसमें बलगम निकलता है और यह संक्रमण या फेफड़ों की बीमारी का संकेत हो सकती है।

सूखी खांसी

इस प्रकार की खांसी में बलगम नहीं निकलता और गले में जलन या एलर्जी इसका कारण हो सकती है।

खांसी से बचाव के उपाय

पर्याप्त मात्रा में पानी और गर्म पेय पदार्थों का सेवन करें।

धूल, धुआं और प्रदूषण से बचें।

धूम्रपान से दूरी बनाए रखें।

कमरे में नमी बनाए रखने के लिए ह्यूमिडिफायर का उपयोग करें।

गर्म नमकीन पानी से गरारे करें।

पौष्टिक और संतुलित आहार लें।


आयुर्वेदिक औषधियों से भी मिल सकता है लाभ

सितोपलादि चूर्ण

यह सर्दी और खांसी में उपयोगी माना जाता है। मधु के साथ सेवन करने से राहत मिलती है।

मुलेठी

मुलेठी गले की सूजन कम करने और जमे हुए कफ को बाहर निकालने में सहायक मानी जाती है।

चंद्रामृत रस

विशेषज्ञों के अनुसार इसे चूसने से गले को आराम मिल सकता है।

एलादि वटी

गले की जकड़न और खांसी में यह लाभकारी मानी जाती है।

कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?

खांसी तीन सप्ताह से अधिक रहे

बलगम में खून आए

तेज बुखार या सांस लेने में तकलीफ हो

अचानक वजन कम होने लगे

सीने में दर्द महसूस हो


विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते जांच और सही उपचार करवाने से गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। आयुर्वेदिक और घरेलू उपचार प्रारंभिक राहत दे सकते हैं, लेकिन लगातार बढ़ती समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

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