
बड़ी खबर | स्वास्थ्य विशेष रिपोर्ट
✍️ वरिष्ठ पत्रकार: ओमप्रकाश बोराणा | सोजत न्यूज़
आज के दौर में जब हर बीमारी के इलाज के लिए लोग महंगे ब्रांडेड तेल, दवाइयों और सप्लीमेंट्स की ओर भाग रहे हैं, वहीं हमारी भारतीय परंपरा में मौजूद तिल का तेल एक ऐसा प्राकृतिक औषधीय वरदान है, जिसके अद्भुत गुणों के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।
तिल का तेल केवल भोजन पकाने का माध्यम नहीं, बल्कि आयुर्वेद में इसे शरीर को रोगमुक्त रखने वाली औषधि माना गया है। यही कारण है कि चरक संहिता में तिल के तेल को पकाने और मालिश दोनों के लिए सर्वोत्तम बताया गया है।
तिल से ही बना ‘तैल’ — शब्द का इतिहास भी गवाही देता है
बहुत कम लोग जानते हैं कि ‘तैल’ शब्द की उत्पत्ति ‘तिल’ से हुई है। अर्थात जो तिल से निकले वही असली तैल यानी तेल। यह तथ्य ही तिल के तेल की प्राचीन वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक महत्ता को सिद्ध करता है।
हड्डियों के लिए वरदान
तिल के तेल की मालिश करने से यह त्वचा के भीतर जाकर सीधे हड्डियों तक प्रभाव डालता है
इसमें मौजूद फास्फोरस और कैल्शियम हड्डियों को मजबूती प्रदान करते हैं
100 ग्राम सफेद तिल में लगभग 1000 मिलीग्राम कैल्शियम होता है
दूध से तीन गुना और बादाम से छह गुना अधिक कैल्शियम
👉 यही कारण है कि ऑस्टियोपोरोसिस (अस्थि-सुषिरता) जैसी बीमारियों में यह अत्यंत लाभकारी माना गया है।
रक्तअल्पता (एनीमिया) में कारगर
काले और लाल तिल में आयरन की भरपूर मात्रा होती है
महिलाओं और बच्चों में खून की कमी दूर करने में सहायक
हृदय को रखे स्वस्थ
तिल में मौजूद लेसिथिन रक्त नलिकाओं में कोलेस्ट्रोल के संतुलन को बनाए रखता है
मोनो-सैचुरेटेड फैटी एसिड बैड कोलेस्ट्रोल (LDL) घटाकर गुड कोलेस्ट्रोल (HDL) बढ़ाता है
दिल का दौरा, हाई ब्लड प्रेशर और एथेरोस्क्लेरोसिस की संभावना कम करता है
कैंसर से सुरक्षा की क्षमता
तिल में पाया जाने वाला सेसमीन (Sesamin) एक शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट है, जो:
कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को रोकता है
फेफड़ों, पेट, प्रोस्टेट, स्तन, ल्यूकेमिया और अग्नाशय कैंसर के प्रभाव को कम करने में सहायक माना गया है
तनाव, अनिद्रा और मानसिक शांति
इसमें मौजूद ट्रायप्टोफन गहरी नींद लाने में मदद करता है
नियासिन (Niacin) तनाव और अवसाद को कम करता है
नियमित सेवन से मानसिक संतुलन बेहतर होता है
त्वचा, बाल और पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद
त्वचा को कांतिमय और बालों को मजबूत बनाता है
कब्ज नहीं होने देता
चयापचय (Metabolism) को तेज करता है
शिशु, गर्भवती महिला और बुजुर्ग—सभी के लिए उपयोगी
शिशुओं की मालिश से गहरी नींद और हड्डियों का विकास
गर्भवती महिलाओं में मौजूद फोलिक एसिड भ्रूण के विकास में सहायक
बुजुर्गों में जोड़ों के दर्द और कमजोरी में राहत
मधुमेह में भी सहायक
तमिलनाडु की विनायक मिशन यूनिवर्सिटी के अध्ययन के अनुसार:
तिल का तेल रक्त में ग्लूकोज स्तर 36% तक कम करने में मदद करता है
जब यह मधुमेह की दवा ग्लिबेनक्लेमाइड के साथ लिया जाता है, तो इसका प्रभाव और बढ़ जाता है
टाइप-2 डायबिटीज़ रोगियों के लिए लाभकारी
सबसे खास बात — वर्षों तक खराब नहीं होता
तिल के तेल में प्राकृतिक सिस्मोल (Sesamol) होता है
यह उच्च तापमान में भी जल्दी खराब नहीं होता
गर्मी के मौसम में भी वर्षों तक सुरक्षित रहता है
बाजार के तेल से सावधान
आज बाजार में तिल के तेल के नाम पर मिलावटी तेल बेचे जा रहे हैं, जिनकी पहचान करना मुश्किल है।
👉 सबसे सुरक्षित उपाय:
स्वयं तिल खरीदें
अपने सामने किसी तेल मिल से तेल निकलवाएं
पहली बार मेहनत जरूर है, लेकिन शुद्ध तेल जीवनभर का स्वास्थ्य निवेश बन जाता है
तिल का तेल कोई साधारण तेल नहीं, बल्कि संपूर्ण आयुर्वेदिक औषधि है।
यदि नियमित रूप से शुद्ध तिल के तेल का सेवन और मालिश की जाए, तो:
शरीर रोगों से लड़ने में सक्षम बनता है
बीमार होने की संभावना नगण्य हो जाती है
इलाज की जरूरत ही नहीं पड़ती
👉 यही आयुर्वेद का मूल सिद्धांत है—
उचित आहार-विहार से शरीर को इतना मजबूत बनाइए कि दवा की जरूरत ही न पड़े।
🌿 सभी स्वस्थ रहें, सुखी रहें, निरोगी रहें 🌿
सोजत न्यूज़
वरिष्ठ पत्रकार: ओमप्रकाश बोराणा



