
सोजत न्यूज़ वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश बोराणा

Sojat
मलमास की समाप्ति के साथ ही जिले भर में एक बार फिर मांगलिक आयोजनों की रौनक लौट आई है। लंबे अंतराल के बाद विवाह, सगाई और अन्य शुभ संस्कारों का सिलसिला पूरे उत्साह के साथ शुरू हो गया है। इसी कड़ी में घांची समाज में एक ऐतिहासिक और अनोखा दृश्य देखने को मिला, जब समाज में पहली बार दुल्हन की घोड़े पर भव्य बंदोली निकाली गई।
इस विशेष अवसर पर दुल्हन पारंपरिक परिधान और आभूषणों से सजी हुई घोड़े पर सवार नजर आई, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में समाजजन और ग्रामीण एकत्रित हुए। ढोल-नगाड़ों की थाप, बैंड-बाजे और नाचते-गाते लोगों के बीच निकली इस बंदोली ने पूरे क्षेत्र का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। महिलाओं ने मंगल गीत गाए तो युवाओं ने जमकर नृत्य कर खुशी जाहिर की।
समाज के वरिष्ठजनों ने बताया कि परंपरागत रूप से अब तक दूल्हे की ही घोड़े पर बंदोली निकाली जाती थी, लेकिन बदलते समय और समाज में बढ़ती समानता की भावना के चलते यह अनूठी पहल की गई। उन्होंने इसे समाज के लिए गर्व का क्षण बताते हुए कहा कि यह कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सकारात्मक संदेश देगा।
परिवारजनों के अनुसार, मलमास खत्म होते ही विवाह की तिथि मिलते ही इस आयोजन की तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। आयोजन को यादगार बनाने के लिए पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ-साथ नई सोच को भी शामिल किया गया। बंदोली के मार्ग पर लोगों ने पुष्प वर्षा कर दुल्हन का स्वागत किया।
इस ऐतिहासिक आयोजन के बाद क्षेत्र में विवाह सीजन की रफ्तार तेज हो गई है। आने वाले दिनों में बड़ी संख्या में शादियां होने की संभावना है, जिससे बाजारों में भी चहल-पहल बढ़ गई है। घांची समाज में निकली यह पहली दुल्हन बंदोली न केवल चर्चा का विषय बनी हुई है, बल्कि सामाजिक बदलाव और नई परंपराओं की एक मजबूत मिसाल भी पेश कर रही है।





