राकेश मिश्रा भटनागर
पति सौरभ राजपूत की हत्या कर शव के टुकड़े नीले ड्रम में भरकर सीमेंट से छिपाने का था आरोप; जिला अदालत ने दोनों को दोषी ठहराने के बाद सुनाई मृत्युदंड की सजा
मेरठ, उत्तर प्रदेश। देशभर में सुर्खियां बटोरने वाले मेरठ के बहुचर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में बड़ा फैसला सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मेरठ की जिला अदालत ने सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी करार दी गई मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को फांसी की सजा सुनाई है। इस मामले ने न केवल मेरठ, बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।
इस सनसनीखेज हत्याकांड में सौरभ की हत्या के बाद उसके शव के टुकड़े एक नीले ड्रम में भरकर सीमेंट से बंद किए जाने की बात सामने आई थी। मामले का खुलासा होने के बाद लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला था। घटना से जुड़े घटनाक्रम, आरोपियों की गिरफ्तारी और जांच की खबरें लंबे समय तक राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी रहीं।
हालांकि, सजा सुनाए जाने की ताजा जानकारी और फैसले की आधिकारिक पुष्टि संबंधित अदालत के आदेश से की जानी चाहिए।
3 मार्च 2025 की रात हुई थी वारदात
प्राप्त विवरण के अनुसार, मेरठ के ब्रह्मपुरी क्षेत्र में 3 मार्च 2025 की रात सौरभ राजपूत की हत्या कर दी गई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, हत्या के बाद शव के टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में रखकर सीमेंट से बंद कर दिया गया था।
इस मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला पर हत्या में शामिल होने के आरोप लगे थे। घटना के बाद दोनों के हिमाचल प्रदेश जाने की बात भी सामने आई थी।
जब इस जघन्य वारदात का खुलासा हुआ, तो लोगों के बीच गहरा आक्रोश फैल गया। सोशल मीडिया से लेकर आम जनजीवन तक इस मामले को लेकर चर्चाएं हुईं और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग उठी।
परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और गवाहों की रही अहम भूमिका
मामले में अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने परिस्थितिजन्य साक्ष्य और गवाहों के बयान प्रस्तुत किए। सौरभ के परिवार की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ता विजय बहादुर के हवाले से दी गई जानकारी के अनुसार, मुकदमे में 22 गवाहों के बयान महत्वपूर्ण रहे।
इनमें सौरभ का भाई, उसकी मां और उसके दोस्त शामिल बताए गए। इसके अलावा उन दुकानदारों की गवाही भी महत्वपूर्ण मानी गई, जिनसे कथित तौर पर ड्रम, दवाइयां, चाकू, सीमेंट और रेत खरीदे गए थे।
अभियोजन पक्ष ने इन साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी।
जन्मदिन से लेकर हत्या तक की कहानी ने खड़े किए सवाल
इस मामले से जुड़ी जानकारी के अनुसार, सौरभ राजपूत 24 फरवरी 2025 को लंदन से मेरठ लौटे थे। इसके अगले दिन, 25 फरवरी को घर में मुस्कान का जन्मदिन मनाया गया था। 28 फरवरी को उनकी बेटी पीहू का जन्मदिन था।
इसके कुछ ही दिनों बाद, 3 मार्च 2025 को सौरभ की हत्या की घटना सामने आई। घटनाक्रम में जन्मदिन के समारोहों से लेकर हत्या और शव को ठिकाने लगाने के कथित प्रयास तक की जानकारी ने लोगों को स्तब्ध कर दिया था।
जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर अदालत में मामले की सुनवाई हुई।
जेल में मुस्कान के व्यवहार को लेकर भी आई जानकारी
जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा के हवाले से दी गई जानकारी के अनुसार, जेल में मुस्कान और साहिल को नशे की लत से बाहर निकालने के लिए शुरुआत में काफी प्रयास करने पड़े। इसमें लगभग तीन से चार महीने का समय लगा।
बताया गया कि साहिल से मिलने पहले उसकी दादी आती थीं और बाद में उसका भाई भी मिलने आने लगा। वहीं, मुस्कान से मिलने के लिए उसके परिवार का कोई सदस्य जेल नहीं पहुंचा था।
जेल में रहते हुए मुस्कान ने एक बेटी को जन्म दिया था। उपलब्ध विवरण के अनुसार, इसके बाद उसके धार्मिक गतिविधियों की ओर झुकाव बढ़ने और अपनी बेटी से मिलने की इच्छा जताने की बात भी सामने आई।
सौरभ के परिवार के लिए न्याय की लड़ाई
इस हत्याकांड ने सौरभ के परिवार को गहरे दुख से गुजारा। किसी परिवार के लिए अपने सदस्य को इस तरह खोना असहनीय पीड़ा का कारण होता है। मामले में परिवार की ओर से न्याय के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी गई और अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत किए।
इस प्रकरण में सजा का फैसला न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हालांकि, मृत्युदंड के मामले में अपील और अन्य कानूनी उपायों की स्थिति भी महत्वपूर्ण होती है। आगे की कानूनी स्थिति संबंधित न्यायालय के आधिकारिक आदेशों से स्पष्ट होगी।
देशभर में चर्चा में रहा नीले ड्रम वाला हत्याकांड
मेरठ का यह मामला लंबे समय तक देशभर में चर्चा का विषय बना रहा। हत्या के तरीके और शव को छिपाने के कथित प्रयास ने लोगों को झकझोर दिया था। इस घटना ने अपराध की जांच, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर भी व्यापक चर्चा पैदा की।
सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत के फैसले को लेकर सामने आई जानकारी ने एक बार फिर इस मामले को सुर्खियों में ला दिया है। सजा की अंतिम और वर्तमान कानूनी स्थिति की पुष्टि अदालत के आधिकारिक निर्णय से करना आवश्यक है।
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