मौसम की मार: बादलों ने रोकी चांद की राह, रात 10:15 बजे तक चंद्र दर्शन का इंतजार करती रहीं सुहागिनें

सोजत न्यूज़ वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश बोराणा

सोजत सहित क्षेत्र में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया करवा चौथ का पर्व, दिनभर निर्जला व्रत रख पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना की

सोजत। सोजत सहित आसपास के क्षेत्र में करवा चौथ का पर्व श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ मनाया गया। सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और खुशहाल वैवाहिक जीवन की कामना को लेकर दिनभर निर्जला व्रत रखा। महिलाओं को पूरे दिन के उपवास के बाद रात में चंद्रमा के दर्शन करने और विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर व्रत खोलने का इंतजार था, लेकिन मौसम ने उनके इंतजार को लंबा कर दिया। आसमान में छाए बादलों ने चंद्रमा की राह रोक दी और निर्धारित समय पर चांद दिखाई नहीं देने से महिलाओं को काफी देर तक प्रतीक्षा करनी पड़ी।

करवा चौथ के अवसर पर सुबह से ही घरों में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार व्रत रखा, सोलह शृंगार किया और शाम को करवा चौथ की कथा सुनकर पति की लंबी उम्र तथा परिवार की खुशहाली की कामना की। दिनभर पूजा की तैयारियों के बाद सभी की निगाहें रात में निकलने वाले चंद्रमा पर टिकी थीं। हालांकि, मौसम के बदले मिजाज ने पर्व की सबसे महत्वपूर्ण रस्म चंद्र दर्शन के लिए महिलाओं का इंतजार बढ़ा दिया।

चंद्रमा निकलने का समय बीता, फिर भी आसमान में छाए रहे बादल

जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में करवा चौथ पर चंद्रमा निकलने का अनुमानित समय रात करीब 8:14 से 8:15 बजे के बीच था। महिलाओं ने निर्धारित समय के आसपास छतों, बालकनियों और खुले स्थानों पर पहुंचकर चंद्रमा के दर्शन करने का इंतजार किया। पूजा की थालियां सजाकर महिलाएं आसमान की ओर निहारती रहीं, लेकिन बादलों की ओट के कारण चंद्रमा दिखाई नहीं दिया।

समय बीतने के साथ महिलाओं की प्रतीक्षा भी बढ़ती गई। शुरुआत में कुछ देर में चांद दिखाई देने की उम्मीद थी, लेकिन बादलों के कारण स्थिति स्पष्ट नहीं हुई। कई महिलाएं रात करीब 10:15 बजे तक चंद्रमा निकलने की आस लगाए बैठी रहीं। लंबे इंतजार के बावजूद चंद्र दर्शन नहीं होने से महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ा।

करवा चौथ पर चंद्र दर्शन का विशेष महत्व

हिंदू धर्म में करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की कामना करते हुए निर्जला उपवास रखती हैं। परंपरा के अनुसार, शाम को करवा चौथ की कथा सुनने और पूजा-अर्चना करने के बाद रात में चंद्रमा के दर्शन किए जाते हैं।

चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करने और पति के दर्शन के बाद व्रत खोलने की परंपरा है। इसी वजह से चंद्रमा का इंतजार इस पर्व का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इस बार मौसम की प्रतिकूलता के कारण चंद्र दर्शन में देरी हुई, जिससे पूरे दिन उपवास रखने वाली महिलाओं की प्रतीक्षा लंबी हो गई।

आस्था के आगे मौसम की चुनौती भी नहीं पड़ी भारी

चंद्रमा के निर्धारित समय पर दिखाई नहीं देने के बावजूद महिलाओं की श्रद्धा और उत्साह में कमी नहीं आई। महिलाओं ने धार्मिक मान्यताओं और अपनी पारिवारिक परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना की। देर रात तक चंद्रमा के दर्शन की उम्मीद लगाए बैठी महिलाओं ने परिस्थितियों के अनुसार व्रत खोलने की रस्म पूरी की।

सोजत सहित आसपास के क्षेत्र में करवा चौथ को लेकर दिनभर उत्साह का माहौल रहा। महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा और शृंगार के साथ पर्व मनाया तथा अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।

        मौसम बना चर्चा का विषय

इस बार करवा चौथ पर बादलों की मौजूदगी ने चंद्र दर्शन की परंपरा को लेकर लोगों का ध्यान मौसम की ओर खींचा। आमतौर पर महिलाएं चंद्रमा के निकलने के निर्धारित समय पर पूजा की तैयारियां पूरी कर लेती हैं, लेकिन इस बार आसमान में बादल छाए रहने से चांद के दर्शन नहीं हो सके।

कुल मिलाकर, सोजत क्षेत्र में करवा चौथ का पर्व श्रद्धा, विश्वास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। मौसम ने भले ही चंद्र दर्शन के लिए महिलाओं का इंतजार बढ़ा दिया, लेकिन पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली के लिए रखा गया व्रत महिलाओं की आस्था और समर्पण का प्रतीक बना रहा।

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