राजस्थान में भ्रष्टाचार पर बड़ा प्रहार: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा एक्शन मोड में, 108 मामलों में अभियोजन स्वीकृति, 20 अधिकारी-कर्मचारी बर्खास्त

जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सख्त कार्रवाई, 332 अधिकारी-कर्मचारी निलंबित, 577 मामलों में जांच जारी

✍️ वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश बोराणा

जयपुर। राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार ने भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग, अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ बड़ा अभियान छेड़ दिया है। राज्य सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में भ्रष्ट और लापरवाह अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करते हुए एक आरएएस अधिकारी समेत 20 अधिकारियों और कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। इसके अलावा 332 अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित किया गया है, जबकि 17 अधिकारियों की पेंशन पर रोक लगाई गई है।

सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं से जुड़े 108 मामलों में अभियोजन स्वीकृति प्रदान की गई है। वहीं 577 प्रकरणों में जांच जारी है और दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा अखिल भारतीय सेवाओं से जुड़े 9 मामलों की भी जांच की जा रही है।

मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश: भ्रष्टाचार किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी कार्यों में लापरवाही, फाइलों को अनावश्यक रूप से लंबित रखना, सरकारी धन का दुरुपयोग करना तथा जवाबदेही से बचने की प्रवृत्ति किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी। सरकार ने जीरो टॉलरेंस नीति अपनाते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी रखने का संकल्प दोहराया है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार प्रशासनिक व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए विभागों में निगरानी बढ़ाई गई है तथा शिकायतों के त्वरित निस्तारण पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

इन अधिकारियों की सेवाएं की गई समाप्त

राज्य सरकार ने कई अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कदम उठाते हुए उनकी सेवाएं समाप्त कर दी हैं। सेवा से हटाए गए अधिकारियों में राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस) अधिकारी नरसिंह, उपनिदेशक डॉ. पी.आर. खींची, सहायक आचार्य डॉ. सुनील व्यास, तकनीकी शिक्षा विभाग की प्रवक्ता प्रियंका दिवाकर तथा कृषि अधिकारी शीना लुकोश शामिल हैं।

इसके अलावा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के तत्कालीन अतिरिक्त निदेशक सुरेंद्र सिंह तथा पर्यटन विभाग के अतिरिक्त निदेशक संजय पांडे की सेवाएं भी समाप्त कर दी गई हैं। सरकार का कहना है कि इन मामलों में गंभीर अनियमितताएं और कर्तव्य निर्वहन में गंभीर लापरवाही सामने आई थी।

सेवानिवृत्ति के बाद भी नहीं मिली राहत

राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि सेवानिवृत्ति के बाद भी दोषी अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा। इसी क्रम में 17 अधिकारियों की पेंशन पर कार्रवाई की गई है। इनमें 5 अधिकारियों की आजीवन पेंशन और ग्रेच्युटी पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है।

जिन अधिकारियों के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है उनमें आरएएस फतेह राय सोनी, पीटीआई फुलाराम फगेड़िया, अतिरिक्त निदेशक (खान) राकेश हीरात, आरपीएस ओमप्रकाश चंदोलिया तथा चिकित्सा अधिकारी डॉ. निधि मेहरोत्रा शामिल हैं। इनकी पूर्ण पेंशन और ग्रेच्युटी को आजीवन रोक दिया गया है।

अन्य अधिकारियों पर भी हुई सख्त कार्रवाई

सरकार ने कई अन्य अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करते हुए दंडात्मक कदम उठाए हैं। चिकित्सा विभाग के प्रमुख विशेषज्ञ डॉ. त्रिलोक चंद गगरानी तथा सार्वजनिक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता अशोक कुमार शर्मा की तीन वार्षिक वेतन वृद्धियां स्थायी रूप से रोक दी गई हैं।

सरकार का मानना है कि ऐसी कार्रवाइयों से प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगेगा।

जनता को बेहतर प्रशासन देने की तैयारी

राज्य सरकार का कहना है कि भ्रष्टाचार और लापरवाही के खिलाफ चल रही कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य आम जनता को पारदर्शी, जवाबदेह और संवेदनशील प्रशासन उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जनहित से जुड़े मामलों में किसी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

प्रदेश में लगातार हो रही इन कार्रवाइयों को सरकार के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में जांच पूरी होने के बाद और भी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

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