✍️ वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश बोराणा
जयपुर। राजस्थान सरकार अब राजस्व अदालतों में वर्षों से लंबित पड़े मामलों को लेकर पूरी तरह सख्त नजर आ रही है। आमजन को त्वरित न्याय दिलाने और राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेशभर के राजस्व अधिकारियों की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक ली। बैठक में लंबित वादों के शीघ्र निस्तारण के लिए अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए।
मुख्य सचिव ने स्पष्ट कहा कि जमीन विवाद, बंटवारा, नामांतरण और राजस्व संबंधी अन्य मामलों में देरी के कारण आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे मामलों का जल्द समाधान करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि राजस्व अदालतों में लंबित प्रकरणों को तय समय सीमा में निपटाया जाए।
SDM को हफ्ते में 3 दिन कोर्ट में बैठने के निर्देश
बैठक में सबसे बड़ा फैसला यह लिया गया कि अब उपखंड अधिकारी (SDM) सप्ताह में कम से कम तीन दिन नियमित रूप से राजस्व अदालत में बैठकर मामलों की सुनवाई करेंगे। सरकार का मानना है कि इससे लंबित मामलों के निस्तारण की गति तेज होगी और लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
मुख्य सचिव ने संभागीय आयुक्तों और जिला कलेक्टरों को भी निर्देश दिए कि वे राजस्व न्यायालयों का लगातार निरीक्षण करें और यह सुनिश्चित करें कि अधिकारी अपने दायित्वों का गंभीरता से पालन करें।
कैम्प कोर्ट्स के जरिए होगा मामलों का निस्तारण
सरकार ने लंबित मामलों के त्वरित समाधान के लिए कैम्प कोर्ट्स आयोजित करने पर भी जोर दिया है। मुख्य सचिव ने कहा कि ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में विशेष शिविर लगाकर पुराने मामलों का मौके पर ही समाधान किया जाए, ताकि आमजन को राहत मिल सके।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि ऐसे मामलों को प्राथमिकता दी जाए जिनका सीधा संबंध किसानों, जमीन मालिकों और ग्रामीण परिवारों से जुड़ा हुआ है। विशेष रूप से नामांतरण, सीमांकन और बंटवारे के विवादों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए।
तहसील और SDO कार्यालयों के बीच समन्वय की कमी पर नाराजगी
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने तहसील कार्यालयों और SDO कार्यालयों के बीच समन्वय की कमी पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि कई मामलों में अनावश्यक पत्राचार और विभागीय देरी के कारण फाइलें महीनों तक लंबित रहती हैं, जो स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि
“अनावश्यक पत्राचार के कारण मामले लंबित नहीं रहने चाहिए। सभी अधिकारी आपसी समन्वय से काम करें और जनता को समय पर न्याय दिलाएं।”
सरकार का फोकस: पारदर्शी और प्रभावी राजस्व न्याय व्यवस्था
राज्य सरकार अब राजस्व न्यायालयों की व्यवस्था को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि तकनीक के उपयोग से मामलों की मॉनिटरिंग की जाए तथा लंबित प्रकरणों की नियमित समीक्षा हो।
मुख्य सचिव ने तहसीलदार, नायब तहसीलदार और SDO स्तर के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे आपसी तालमेल के साथ कार्य करें और जनता की शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करें।
आमजन को मिलेगी राहत
सरकार के इस सख्त रुख के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि लंबे समय से लंबित राजस्व मामलों में तेजी आएगी और लोगों को राहत मिलेगी। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन विवादों के कारण वर्षों से परेशान चल रहे परिवारों को जल्द न्याय मिलने की संभावना बढ़ गई है।