सड़क किनारे खुला नाला बना मौत का सबब — किसकी ज़िम्मेदारी,प्रॉपर्टी डीलर  की  मृत्यु

पाली

पत्रकार अकरम खान पाली

पाली शहर में मंगलवार को हुआ हादसा केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता पर एक करारा तमाचा है।
ट्रांसपोर्ट नगर थाना क्षेत्र के रूप रजत विहार के पास सड़क किनारे खुले बरसाती नाले में गिरने से 62 वर्षीय प्रॉपर्टी डीलर बाबूलाल चौधरी की असमय मृत्यु ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है।

प्रत्यक्षदर्शियों ने उन्हें नाले से बेहोश हालत में बाहर निकालकर बांगड़ अस्पताल पहुँचाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया।
जैसे ही खबर फैली, शहर में शोक के साथ-साथ आक्रोश भी फैल गया।
लोग सवाल पूछने लगे क्या पाली की सड़कों पर चलना अब जान जोखिम में डालना है❓

“जब शहर की सड़कें खामोश हत्यारों में बदल जाएँ,
तो समझिए सिस्टम ने अपनी ज़िम्मेदारी छोड़ दी है।”

मृतक के चचेरे भाई मांगीलाल चौधरी ने प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना है कि सड़क किनारे बना यह बरसाती नाला लंबे समय से खुला पड़ा था।
बरसात का मौसम बीत जाने के बाद भी नालों को ढकने, चेतावनी संकेत लगाने या सुरक्षा इंतजाम करने की ज़हमत तक नहीं उठाई गई।
यदि यह नाला ढका होता, यदि थोड़ी-सी भी जवाबदेही होती, तो आज बाबूलाल चौधरी ज़िंदा होते।

यह कोई पहली घटना नहीं है। पाली शहर की बदहाल सड़कें, खुले नाले, टूटी नालियां और अंधेरे रास्ते लगातार हादसों को न्योता दे रहे हैं।
सवाल यह नहीं कि हादसा कैसे हुआ, सवाल यह है कि हादसे रोके क्यों नहीं गए

“लापरवाही जब सिस्टम की आदत बन जाए,
तब हर हादसा एक पूर्व घोषित अपराध होता है।”

पुलिस ने मामले में जांच शुरू कर दी है, लेकिन केवल जांच से ज़ख्म नहीं भरेंगे।

शहरवासियों की मांग साफ है :-

सड़क किनारे सभी खुले नालों को तत्काल ढका जाए

खतरनाक स्थलों पर चेतावनी बोर्ड और बैरिकेडिंग हो

नियमित निरीक्षण और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो

पाली को केवल स्मार्ट सिटी के दावे नहीं, सुरक्षित सड़कों की सच्ची जरूरत है।
शहर का सौंदर्य तभी स्थापित होगा जब राहगीर निडर होकर चल सकें, जब बुज़ुर्ग, बच्चे और महिलाएं सुरक्षित महसूस करें।

अब भी वक्त है
प्रशासन यदि आज नहीं जागा, तो कल हर खुला नाला, हर टूटी सड़क एक और परिवार का चिराग बुझा सकती है।
पाली की जनता जवाब चाहती है…
और अब सिर्फ आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई चाहती है।

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