**✍️ वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश बोराणा*
*सोजत | बड़ी खबर*
*सोजत कृषि उपज मंडी में बीती रात हुई मावट की बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। अचानक बदले मौसम और मंडी प्रशासन की लापरवाही के चलते मंडी परिसर में खुले में पड़े 1000 से भी अधिक मेहंदी के बोरे बारिश में भीग गए, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार यह नुकसान करोड़ों रुपए में बताया जा रहा है।*
*खुले में पड़ी रही मेहंदी, नहीं की गई सुरक्षा व्यवस्था*
*मंडी में बड़ी मात्रा में किसानों की मेहंदी की फसल बोरो में भरकर खुले परिसर में रखी हुई थी। मौसम विभाग की ओर से मावट और हल्की बारिश की संभावना पहले से जताई जा रही थी, इसके बावजूद मंडी प्रशासन द्वारा न तो तिरपाल की व्यवस्था की गई और न ही सुरक्षित शेड उपलब्ध कराए गए। परिणामस्वरूप बारिश होते ही मेहंदी के बोरे पानी में भीग गए।*
*गुणवत्ता पर पड़ेगा असर, घट सकते हैं दाम*
*मेहंदी की फसल में नमी आने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित होती है। विशेषज्ञों के अनुसार भीगी हुई मेहंदी का रंग और खुशबू कमजोर हो जाती है, जिससे बाजार में इसके भाव गिरने की आशंका रहती है। इससे किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ सकती है—एक तरफ फसल खराब होने का डर और दूसरी तरफ उचित मूल्य न मिल पाने की चिंता।*
*किसानों में भारी आक्रोश*
*घटना के बाद मंडी में किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। किसानों का कहना है कि वे दूर-दराज के गांवों से अपनी उपज लेकर आए थे और मंडी प्रशासन की जिम्मेदारी थी कि फसल की सुरक्षा सुनिश्चित करे*।
*किसानों ने आरोप लगाया कि मंडी अधिकारियों ने किसानों के हितों को पूरी तरह नजरअंदाज किया, जिससे यह बड़ा नुकसान दूसरी बार हुआ है।*
*भाव तेज होने की उम्मीद, लेकिन चिंता बरकरार*
*हालांकि जिन किसानों की मेहंदी की फसल बोरे में सुरक्षित बची है, उन्हें आने वाले दिनों में मेहंदी के भाव और तेज होने की उम्मीद है। निर्यात मांग और सीमित आवक के चलते बाजार में तेजी की संभावना जताई जा रही है। लेकिन जिन किसानों की फसल भीग चुकी है, उनके लिए यह तेजी भी ज्यादा राहत नहीं दे पाएगी।*
*मुआवजे और जांच की मांग*
*किसानों ने प्रशासन से नुकसान का आकलन कर मुआवजा देने, साथ ही मंडी अधिकारियों की लापरवाही की जांच कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते उचित इंतजाम किए जाते तो इस बड़े नुकसान से बचा जा सकता था।*
*मंडी प्रशासन पर उठे सवाल*
*यह घटना दूसरी बार फिर सोजत कृषि उपज मंडी की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करती है। किसानों का कहना है कि मंडी में मूलभूत सुविधाओं और आपातकालीन प्रबंधन की भारी कमी है, जिसका खामियाजा हर बार किसान को भुगतना पड़ता है।*