सोजत। पाली जिले के सोजत में साइबर अपराध का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एनएच-162 स्थित धांधेड़ी रोड निवासी फल-फ्रूट के कोल्ड स्टोर संचालक सय्यद राहत अली के आईसीआईसीआई बैंक खाते से साइबर ठगों ने 94 लाख 88 हजार 228 रुपए निकालकर अमेजन पे से जुड़े वॉलेट में ट्रांसफर कर दिए। हैरानी की बात यह है कि पीड़ित का दावा है कि उन्होंने किसी को भी ओटीपी साझा नहीं किया, न ही स्वयं कोई ऑनलाइन ट्रांजेक्शन किया। इसके बावजूद उनके खाते से करोड़ के करीब रकम अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए साफ हो गई।
घटना का पता उस समय चला जब गुरुवार दोपहर राहत अली के मोबाइल पर बैंक खाते से लगातार रकम कटने के संदेश आने लगे। कुछ देर पहले उनके मोबाइल पर 57.92 लाख रुपए के ट्रांजेक्शन का ओटीपी भी आया था, लेकिन उन्होंने न तो उस ओटीपी का उपयोग किया और न ही किसी व्यक्ति के साथ साझा किया। इसके बावजूद साइबर अपराधियों ने उनके खाते से कुल 94,88,228 रुपए अमेजन पे से जुड़े वॉलेट में ट्रांसफर कर दिए।
पीड़ित राहत अली ने बताया कि उन्होंने हाल ही में अपनी जमीन बेची थी, जिसकी राशि उनके आईसीआईसीआई बैंक खाते में जमा थी। अचानक खाते से बड़ी रकम निकलने के संदेश मिलने पर उनके होश उड़ गए। उन्होंने तुरंत स्थिति को समझते हुए देरी किए बिना राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई तथा राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर भी ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पाली साइबर थाना सक्रिय हुआ और तुरंत जयपुर एटीएस-एसओजी साइबर पुलिस स्टेशन से संपर्क किया गया। साइबर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए अमेजन पे से जुड़े संबंधित वॉलेट्स की जानकारी जुटाई और कंपनी के साथ समन्वय स्थापित कर संबंधित वॉलेट्स को फ्रीज (ब्लॉक) करवा दिया। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई से पूरी 94.88 लाख रुपए की राशि होल्ड करवा दी गई, जिससे रकम के अंतिम निकासी या दुरुपयोग पर तत्काल रोक लग गई।
जयपुर एटीएस-एसओजी साइबर पुलिस स्टेशन ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि बिना ओटीपी साझा किए इतनी बड़ी रकम खाते से कैसे ट्रांसफर हुई, साइबर ठगों ने किस तकनीक का इस्तेमाल किया और इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की क्या भूमिका रही।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि आजकल साइबर अपराधी फिशिंग, मैलवेयर, रिमोट एक्सेस ऐप, सिम स्वैपिंग और अन्य आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर बैंक खातों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में केवल ओटीपी साझा न करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मोबाइल और बैंकिंग सुरक्षा को लेकर भी अतिरिक्त सतर्कता आवश्यक है।
पुलिस ने आमजन से अपील की है कि यदि खाते से किसी भी प्रकार का संदिग्ध ट्रांजेक्शन दिखाई दे तो बिना समय गंवाए तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करें और राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर रिपोर्ट दर्ज कराएं। समय पर शिकायत करने से कई मामलों में ठगी गई रकम को होल्ड या रिकवर कराने की संभावना बढ़ जाती है।
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि साइबर अपराधी लगातार नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। हालांकि इस प्रकरण में पीड़ित की तत्परता और जयपुर एटीएस-एसओजी साइबर पुलिस की त्वरित कार्रवाई के कारण लगभग 95 लाख रुपए की बड़ी राशि को समय रहते होल्ड करा लिया गया, जिससे संभावित आर्थिक नुकसान को फिलहाल रोका जा सका।
सोजत के कारोबारी के खाते से 94.88 लाख की साइबर ठगी, ओटीपी साझा किए बिना अमेजन पे वॉलेट में हुई रकम ट्रांसफर, पुलिस की तत्परता से राशि होल्ड
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