संवाददाता : पुनाराम प्रजापति, पत्रकार बगड़ी नगर
सोजत क्षेत्र के साण्डिया गांव के लिए गर्व का क्षण उस समय बना, जब गांव निवासी प्रसिद्ध माटी शिल्पकार मांगीलाल प्रजापति को राजस्थान सरकार द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में “माटी के लाल 2026” पुरस्कार से सम्मानित किया गया। जयपुर स्थित उद्योग भवन में 2 मई 2026 को आयोजित राज्य स्तरीय पुरस्कार एवं प्रदर्शनी समारोह में मांगीलाल प्रजापति ने स्वयं उपस्थित होकर अपनी पारंपरिक मिट्टी कला का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
समारोह के दौरान मांगीलाल प्रजापति ने राजस्थान के मुख्यमंत्री Bhajan Lal Sharma को राजवाड़ी कलश एवं चार खंडों वाला सुसज्जित मिट्टी का दीपक भेंट किया। उनकी हस्तनिर्मित कलाकृतियों को देखकर मुख्यमंत्री सहित उपस्थित अतिथिगण काफी प्रभावित हुए और उनकी कला की जमकर सराहना की गई।
मांगीलाल प्रजापति को परंपरागत मिट्टी कला शैली में उत्कृष्ट नवाचार, विशिष्ट योगदान तथा सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने के लिए “माटी के लाल 2026” सम्मान प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने कर-कमलों से उन्हें गोल्ड मेडल एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इस सम्मान के बाद साण्डिया गांव सहित पूरे सोजत क्षेत्र में खुशी और गौरव का माहौल है।
कार्यक्रम में पशुपालन, डेयरी, गौपालन एवं देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री Joraram Kumawat, अन्य पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के अध्यक्ष महेंद्र कुमावत, श्री यादे माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष प्रहलाद राय टाक, पूर्व विधायक निर्मल कुमावत, अजमेर जिला अध्यक्ष जीत राम कुमावत सहित कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे। सभी अतिथियों ने मांगीलाल प्रजापति की माटी कला और उनकी मेहनत की प्रशंसा करते हुए कहा कि राजस्थान की पारंपरिक मिट्टी कला को नई पहचान दिलाने में ऐसे कलाकारों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
अतिथियों ने युवाओं और कारीगरों से आह्वान किया कि वे राजस्थान माटी कला बोर्ड की योजनाओं का लाभ उठाकर अपने हुनर को आगे बढ़ाएं और स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि पारंपरिक कला को आधुनिक नवाचार के साथ जोड़कर कलाकार अपने उज्ज्वल भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।
सोजत क्षेत्र के ग्रामीणों एवं समाजबंधुओं ने मांगीलाल प्रजापति को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए इसे पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय बताया। ग्रामीणों का कहना है कि मांगीलाल की इस सफलता से युवा पीढ़ी को अपनी पारंपरिक कला और संस्कृति से जुड़ने की प्रेरणा मिलेगी।
✍️ वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश बोराणा