सोजत में चीनी के दामों ने मचाई हलचल: खुदरा बाजार में करीब ₹70 किलो तक पहुंचा भाव, रिकॉर्ड तेजी से आम आदमी की जेब पर बढ़ा बोझ



त्योहारी सीजन से पहले चीनी हुई महंगी, जमाखोरी और सट्टेबाजी पर सरकार सख्त—बाजार में उपलब्धता बनाए रखने के लिए उठाए जा रहे कई कदम

सोजत। त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले रसोई में रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाली चीनी के दामों में अचानक तेज उछाल देखने को मिल रहा है। सोजत सहित कई बाजारों में खुदरा स्तर पर चीनी के भाव करीब ₹70 प्रति किलो तक पहुंचने की बात सामने आ रही है। देश के कुछ बाजारों में भी खुदरा कीमतें ₹65-70 किलो के आसपास पहुंच गई हैं। इससे आम उपभोक्ताओं के घरेलू बजट पर सीधा असर पड़ रहा है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 20 जुलाई 2026 को चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब ₹48.18 प्रति किलो थी, जो 20 अगस्त तक बढ़कर ₹55.70 प्रति किलो हो गई। इसके बाद भी बाजार में तेजी बनी हुई है।

     एक महीने में ही तेजी ने बढ़ाई चिंता

चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। केंद्र सरकार के अनुसार घरेलू उत्पादन उम्मीद से कम रहना, त्योहारों से पहले मांग बढ़ना, गन्ने की फसल को मौसम और बीमारी से नुकसान, वैश्विक बाजार में आपूर्ति का दबाव तथा कुछ कारोबारियों द्वारा जमाखोरी और सट्टेबाजी कीमतों में बढ़ोतरी के प्रमुख कारण हैं।

इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) की ओर से भी हालिया तेजी को सामान्य बाजार व्यवहार के बजाय स्टॉकिंग और सट्टेबाजी से जोड़कर देखा गया है।

       त्योहारी सीजन में बढ़ी मांग

रक्षाबंधन समेत आगामी त्योहारी सीजन में मिठाइयों, बेकरी उत्पादों और घरेलू उपयोग के लिए चीनी की मांग सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे समय में कीमतों में तेजी का सीधा असर मिठाई, बेकरी और अन्य खाद्य पदार्थों की लागत पर पड़ सकता है।

खुदरा कारोबारियों और ऑनलाइन किराना प्लेटफॉर्मों द्वारा भी कुछ जगहों पर चीनी की खरीद की मात्रा सीमित किए जाने की खबरें सामने आई हैं, ताकि अत्यधिक खरीद और जमाखोरी को नियंत्रित किया जा सके।

   जमाखोरी पर सरकार की कड़ी नजर

चीनी के बढ़ते दामों के बीच केंद्र सरकार ने जमाखोरी और कृत्रिम कमी रोकने के लिए पहले ही कई कदम उठाए हैं। सरकार ने 1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक चीनी डीलरों के लिए 400 टन की स्टॉक सीमा लागू की है। इसके अलावा 1 सितंबर से बड़ी मात्रा में चीनी इस्तेमाल करने वाले बल्क उपभोक्ताओं को 15 दिन की खपत से अधिक स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी।

सरकार और राज्य सरकारों की संयुक्त टीमें चीनी मिलों में उपलब्ध स्टॉक का भौतिक सत्यापन भी कर रही हैं, ताकि जमाखोरी या कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिशों का पता लगाया जा सके।

10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात का फैसला

बाजार में उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों पर दबाव कम करने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। सरकार का उद्देश्य घरेलू बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति उपलब्ध कराकर कीमतों को नियंत्रित करना है।

हालांकि, आयात और政府 के अन्य उपायों का असर खुदरा बाजार में तुरंत दिखाई नहीं दे रहा है। कारोबारियों के अनुसार नई आपूर्ति बाजार में पर्याप्त मात्रा में आने के बाद ही खुदरा कीमतों में राहत की उम्मीद बन सकती है।

अक्टूबर से बढ़ सकती है चीनी की उपलब्धता

सरकार ने राज्यों और चीनी मिलों को 15 अक्टूबर 2026 से गन्ने की पेराई शुरू करने की सलाह दी है। सरकार का अनुमान है कि अक्टूबर में चीनी उत्पादन सामान्य 3-4 लाख टन की तुलना में बढ़कर 10 लाख टन से अधिक हो सकता है। इससे त्योहारी सीजन के दौरान बाजार में आपूर्ति बेहतर होने की उम्मीद है।

सोजत के उपभोक्ताओं पर सीधा असर

सोजत के बाजार में यदि चीनी का खुदरा भाव करीब ₹70 किलो तक बना रहता है तो इसका असर हर वर्ग के परिवार पर पड़ेगा। चाय-कॉफी से लेकर मिठाई, हलवाई की दुकानों, बेकरी और घरेलू खाद्य पदार्थों तक इसकी लागत बढ़ सकती है।

विशेषकर त्योहारी सीजन में घरों में मिठाइयां और पकवान बनाने के लिए चीनी की खपत बढ़ने के कारण परिवारों को पहले की तुलना में अधिक राशि खर्च करनी पड़ सकती है।

‘कमी’ और ‘जमाखोरी’ के बीच सरकार की चुनौती

दिलचस्प बात यह है कि सरकार का कहना है कि देश में घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त चीनी स्टॉक उपलब्ध है और मौजूदा तेजी को वास्तविक राष्ट्रीय कमी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। सरकार ने कीमतों में उछाल के लिए उत्पादन में कमी, मौसमी मांग और बाजार में सट्टेबाजी/जमाखोरी जैसे कई कारकों को जिम्मेदार बताया है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार के स्टॉक लिमिट, जांच और आयात जैसे कदमों का असर सोजत समेत स्थानीय खुदरा बाजार में कब दिखाई देगा और आम उपभोक्ता को चीनी के बढ़े हुए भाव से कब राहत मिलेगी।

फिलहाल चीनी की मिठास बाजार में कड़वाहट घोल रही है और आम आदमी की नजर अब सरकार के उन कदमों पर है, जिनसे कीमतें दोबारा सामान्य स्तर पर लौट सकें।

*नोट: सोजत में करीब ₹70 प्रति किलो का स्थानीय खुदरा भाव बाजार में रिपोर्ट किए जा रहे भाव के रूप में दिया गया है; वास्तविक कीमत गुणवत्ता, ब्रांड, दुकान और खरीद की मात्रा के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।*

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ओमप्रकाश बोराना

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