सोजत में बागेलाव नाड़ी में गंदा पानी व कचरा डालने पर आक्रोश, सामाजिक संस्थाओं ने एसडीएम से की कार्रवाई की मांग।

वरिष्ठ पत्रकार चेतनजी व्यास के साथ अकरम खान की रिपोर्ट।
सोजत।शहर के गंदे व केमिकल युक्त पानी को बागेलाव नाड़ी में डालकर उसे जहरीला बनाए जाने के विरोध में सोजत नगर की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं ने उपखंड अधिकारी मासिंगा राम जांगिड़ से अविलंब कार्रवाई की मांग की है। वरिष्ठ नागरिक समिति, पेंशनर समाज, भारत विकास परिषद, अभिनव कला मंच व मानव सेवा समिति सहित अनेक संगठनों ने संयुक्त रूप से ज्ञापन सौंपकर इस गंभीर समस्या से अवगत कराया।
सामाजिक संस्थाओं ने बताया कि बागेलाव नाड़ी वर्षों से मूक गौवंश, पशु-पक्षियों के पीने के पानी का प्रमुख स्रोत रही है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से इसमें प्रदूषित व केमिकल युक्त जहरीला पानी डाला जा रहा है। इससे गौवंश व जीव-जंतुओं को मजबूरी में दूषित पानी पीना पड़ रहा है, जो उनके लिए “स्लो पॉयजन” साबित हो रहा है।
इसके साथ ही प्रमुख आस्था स्थलों के आसपास भी भारी गंदगी फैलाई जा रही है। सुरेश्वर महादेव मंदिर के पास स्थित बागेलाव नाड़ी, संत लिखमीदास जी महाराज स्थल (मेला चौक), माली समाज महादेव मंदिर, ज्योतिबा फुले पार्क के सामने संत की प्रतिमा के पास कचरे के ढेर डाल दिए गए हैं। इससे श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं और क्षेत्र में प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है।
संस्थाओं ने बताया कि मेला चौक स्थित संत लिखमीदास जी महाराज का स्थल जन-जन की आस्था का केंद्र है, जहां बड़ी संख्या में अनुयायी दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन पालिका प्रशासन द्वारा इस स्थान को कचरा पात्र बना दिया गया है और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से गंदगी डाली जा रही है। इससे सर्व समाज में भारी रोष व्याप्त है।
उन्होंने यह भी बताया कि इसी क्षेत्र के पास संस्कृत विद्यालय, होम्योपैथिक क्लिनिक तथा केजीबी संचालित संस्थान हैं, जहां बच्चों व आमजन का नियमित आना-जाना रहता है। प्रदूषण के कारण उनके स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। वहीं बागेलाव नाड़ी में सैकड़ों की संख्या में जीव-जंतु पानी पीने आते हैं, लेकिन प्रतिबंधित पॉलीथिन व केमिकल कचरा डाले जाने से पानी और हवा दोनों जहरीली हो गई हैं।
36 कौम के प्रतिनिधियों ने उपखंड अधिकारी एवं नगर पालिका प्रशासन से मांग की है कि महापुरुषों के स्थलों व पार्कों से तुरंत गंदगी हटाई जाए, मेला चौक क्षेत्र को साफ-सुथरा किया जाए तथा बागेलाव नाड़ी में गंदा पानी व कचरा डालने पर सख्त रोक लगाई जाए। साथ ही दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि पर्यावरण, जीव-जंतुओं और श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य की रक्षा हो सके।



