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बड़ी खबर | अफवाह से हड़कंप

तेरहवीं के भोज का रायता बना डर की वजह, रेबीज के डर से 200 ग्रामीण पहुंचे अस्पताल



✍️ वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश बोराणा
सोजत न्यूज़

बदायूं (उत्तर प्रदेश)।
उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में एक अफवाह ने ऐसा डर पैदा कर दिया कि करीब 200 ग्रामीण रेबीज का टीका लगवाने अस्पताल पहुंच गए। मामला बदायूं के पिपरौल गांव का है, जहां एक तेरहवीं के भोज में परोसे गए रायते को लेकर फैली खबर ने पूरे गांव में दहशत का माहौल बना दिया।


क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार,
23 दिसंबर को पिपरौल गांव में एक व्यक्ति की तेरहवीं का आयोजन किया गया था।
🍽️ भोज में अन्य व्यंजनों के साथ रायता भी परोसा गया।
🐃 यह रायता जिस भैंस के दूध से बनाया गया था, उसके बारे में बाद में जानकारी सामने आई कि
भैंस को कुछ दिन पहले एक कुत्ते ने काट लिया था
        और बाद में भैंस की मौत हो गई

जैसे ही यह खबर गांव में फैली, लोगों में यह अफवाह फैल गई कि
क्या भैंस को रेबीज था?
क्या उसके दूध से बना रायता खाने से रेबीज हो सकता है?

बस फिर क्या था—डर के मारे गांव के लोग एक-एक कर अस्पताल की ओर दौड़ पड़े।



         अफवाह से मचा हड़कंप

अफवाह फैलते ही
🔹 पुरुष, महिलाएं, बुजुर्ग और युवा
🔹 यहां तक कि कुछ ऐसे लोग भी जो केवल भोज में शामिल हुए थे

सबने खुद को खतरे में मानते हुए रेबीज का टीका लगवाने का फैसला किया।
➡️ देखते ही देखते लगभग 200 ग्रामीण बदायूं के अस्पताल पहुंच गए।



       स्वास्थ्य विभाग का बयान

मामले की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट मोड में आ गया।

👨‍⚕️ मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. रामेश्वर मिश्रा ने बताया—

> “गांव में किसी प्रकार की संक्रामक बीमारी नहीं फैली है।
यह मामला पूरी तरह अफवाह का है।
एहतियातन और ग्रामीणों की मानसिक शांति के लिए रेबीज का टीका लगाया गया है।
स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।”



स्वास्थ्य विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि
✔ दूध या दूध से बने खाद्य पदार्थ खाने से रेबीज फैलने की कोई वैज्ञानिक पुष्टि नहीं है,
✔ फिर भी लोगों की घबराहट को देखते हुए सावधानी बरती गई।



        प्रशासन की अपील

प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि—
🔹 अफवाहों पर ध्यान न दें
🔹 किसी भी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए डॉक्टरों या स्वास्थ्य अधिकारियों से ही संपर्क करें
🔹 बिना पुष्टि के फैल रही खबरों से बचें



पिपरौल गांव की यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि
अफवाहें डर से ज्यादा खतरनाक होती हैं।
समय रहते स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता से मामला शांत हुआ, लेकिन यह घटना समाज को यह सीख भी देती है कि
जानकारी की पुष्टि किए बिना घबराना और अफवाह फैलाना खुद के साथ-साथ दूसरों के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है।

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