सोजत से भीलवाड़ा तक गूंजा धर्म का जयघोष: होली चातुर्मास भीलवाड़ा में करेंगे प्रवर्तक श्री सुकन मुनि जी महाराज सा.एवं उपप्रवर्तक श्री अमृत मुनि जी महाराज सा.।

अकरम खान की रिपोर्ट।

सोजत सिटी। भीलवाड़ा के श्रावकों की वर्षों पुरानी अभिलाषा आज मंगलवार को उस समय साकार हो गई, जब सोजत स्थित मरुधर केसरी गुरुसेवा समिति में विराजमान प्रवर्तक श्री सुकन मुनि जी महाराज सा. एवं उपप्रवर्तक श्री अमृत मुनि जी महाराज सा. ने आगामी होली चातुर्मास भीलवाड़ा के शांति भवन में करने की ऐतिहासिक घोषणा अपने मंगल मुखारविंद से की। इस घोषणा से संपूर्ण भीलवाड़ा श्रीसंघ में हर्ष और उल्लास की लहर दौड़ गई।

इस अवसर पर भीलवाड़ा शांति भवन श्रीसंघ का एक उच्चस्तरीय शिष्टमंडल सोजत पहुँचा, जिसमें संरक्षक नवरतनमल बंब, अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद चीपड़, कंवरलाल सूरिया, मंत्री नवरतनमल भलावत, उपाध्यक्ष सुशील चपलोत सहित अन्य पदाधिकारी शामिल थे। सभी ने करबद्ध निवेदन करते हुए गुरुदेव से आग्रह किया कि वे आगामी चातुर्मास भीलवाड़ा में कर धर्मधरा को पुनः अपनी पावन पदरज से आलोकित करें।

शिष्टमंडल की निष्ठा, संघ की एकजुटता और श्रावकों की गहन श्रद्धा को देखते हुए प्रवर्तक सुकन मुनि जी महाराज सा. ने सहर्ष अपनी स्वीकृति प्रदान की। उन्होंने भीलवाड़ा श्रीसंघ की मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि यहाँ की कार्यप्रणाली, सेवा भावना और अनुशासन अत्यंत अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि श्रावकों के हृदय में बसी गुरुभक्ति ही उन्हें बार-बार भीलवाड़ा आने के लिए प्रेरित करती है।

उपप्रवर्तक अमृत मुनि जी महाराज सा. ने भीलवाड़ा संघ को मंगल संदेश देते हुए कहा कि भीलवाड़ा की भूमि भक्ति और शक्ति का अनुपम संगम है। उन्होंने कहा कि होली चातुर्मास केवल एक प्रवास नहीं, बल्कि आत्म-शुद्धि, साधना और धर्म-प्रभावना का महापर्व है। उन्होंने संघ के प्रत्येक सदस्य से आह्वान किया कि सभी मिलकर इस आयोजन को ऐतिहासिक रूप दें, ताकि शांति भवन से उठने वाली धर्म की गूँज सम्पूर्ण मेवाड़ अंचल को आलोकित कर सके।

इस अवसर पर युवाप्रणेता महेश मुनि महाराज सा., बालयोगी अखिलेश मुनि महाराज सा. एवं युवा मनीषी डॉ. वरुण मुनि महाराज सा. भी उपस्थित रहे।

प्रवक्ता सुनील चपलोत ने जानकारी दी कि शांतिभवन श्रीसंघ के पदाधिकारियों का सोजत स्थित गुरुसेवा समिति के पदमचंद धोका, प्रवीण बोहरा, महावीरचंद लुकड़ सहित अन्य सदस्यों ने शॉल एवं माला पहनाकर आत्मीय स्वागत किया।

यह घोषणा न केवल भीलवाड़ा के लिए, बल्कि सम्पूर्ण मेवाड़ क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायी क्षण बन गई है, जिससे धर्म, साधना और सेवा की नई ऊर्जा का संचार होगा।

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