कण्टालिया: विद्यालय के बच्चों को आचार्य महाश्रमणजी म.सा. ने बताया शिक्षा व सेवा का मार्ग।

अकरम खान की रिपोर्ट।
कण्टालिया। युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के पावन सान्निध्य में कण्टालिया क्षेत्र के बभाण, झिझारड़ी एवं कण्टालिया की विभिन्न विद्यालयों छात्र , छात्राओं को गुरुज्ञान का लाभ प्राप्त हुआ। इस अवसर पर आचार्यश्री ने शिक्षा, सेवा, संस्कार और अनुशासन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को जीवन में सही दिशा अपनाने का संदेश दिया।

आचार्य श्री महाश्रमणजी ने कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि चरित्र निर्माण, नैतिक मूल्यों और समाज के प्रति जिम्मेदारी का बोध भी शिक्षा का अभिन्न अंग है।
उन्होंने छात्राओं को अनुशासन में रहकर अध्ययन करने, माता-पिता व गुरुजनों का सम्मान करने तथा समाज सेवा के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। आचार्यश्री ने बताया कि सेवा का मार्ग ही मानव को सच्ची शांति और सफलता की ओर ले जाता है। आचार्य महाश्रमण जी ने विद्यालय के सभी छात्र , छात्राओं को नशे से दूर रहने का संकल्प करवाया।
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने श्रद्धा भाव से आचार्यश्री के प्रवचन सुने और जीवन में सकारात्मक सोच अपनाने का संकल्प लिया। आचार्य महाश्रमणजी ने गुरु ज्ञान, संस्कार एवं सेवा भाव का आशीर्वाद प्रदान करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी ही देश और समाज का भविष्य है, अतः उन्हें अच्छे मार्ग पर चलना अत्यंत आवश्यक है।
इस पावन अवसर पर लगभग 200 विद्यार्थियों ने दर्शन कर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया। विद्यालय प्रशासन प्रधानाचार्य श्री महेंद्र सिंह रावत, पूर्व सरपंच साहब श्री मनोहर सिंह बभाण, गणपतलाल डांगा, रोशनलाल नाहर,अविनाश चौहान , भगवानसिंह मेवड़ा , शिक्षकगण अमरचंद सामरिया, तेजसिंह, पियूष भटनागर, विशाल रैगर, इंद्र सिंह एवं स्थानीय श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन मंगलपाठ एवं आशीर्वाद के साथ हुआ।



