सोजत: अखंड हरि कीर्तन सप्ताह का सोमवार को होगा भव्य समापन,दोपहर में निकलेगी विशाल शोभायात्रा।

अकरम खान की रिपोर्ट।
सोजत। नगर के प्रमुख आराध्य श्री चारभुजा नाथ मंदिर में पिछले 97 वर्षों से निरंतर चल रहे अखंड हरि कीर्तन सप्ताह का भव्य समापन सोमवार को श्रद्धा व उत्साह के साथ किया जाएगा। इस पावन आयोजन के दौरान प्रतिदिन दिन-रात भजन-कीर्तन की मधुर प्रस्तुतियों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।

रात्रि के समय मंदिर परिसर दर्शनार्थियों से खचाखच भरा रहता है। देर रात भगवान की आरती के पश्चात भोग अर्पित कर श्रद्धालुओं को प्रसादी का वितरण किया जाता है।
इस अखंड हरि कीर्तन सप्ताह में ब्रह्म प्रकाश मुंडदा, नंदकिशोर अग्रवाल, जगदीश पाराशर, प्रेमराज पवार, बहादुर खिची, विजय सिंह चौहान, कमल सिंह चौहान, उपेंद्र पाराशर, मोतीलाल, मिश्रीलाल पुजारी, ओमप्रकाश जोशी, सरोज जोशी, राजेश जोशी, हितेश जोशी, लीला देवी, अनीता, रेनू मीणा, चंपाबाई, प्रेमलता, सत्यवती पाराशर, गोरजा रांकावत, पुष्पा, कृष्णा, उमा बाई, विद्या बाई सहित अनेक श्रद्धालु सक्रीय सहयोग दे रहे हैं।
भजन गायकों ने बांधा समां…
पिछले सात दिनों से लगातार चल रहे इस आयोजन में भजन गायक सुधीर दवे, भानाराम पचानपुरा, अशोक बिलावास, कालूदास मांडा,ओमप्रकाश मांडा, महेंद्र कुमार, विनोद कुमार, दशरथ अमनेर, किशोर ठीकरवास, भंवरलाल खीवल, पप्पू हमीर, खुमाराम खोड़िया, मोडाराम पचानपुरा, महावीर हमीर सहित अन्य कलाकारों ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
सोमवार को निकलेगी भव्य शोभायात्रा…
समापन अवसर पर सोमवार दोपहर चारभुजा मंदिर से भव्य शोभायात्रा रवाना होगी, जो
धान मंडी – सब्जी मंडी – मुख्य बाजार – सिनेमा हॉल चौराहा – घोसीवाड़ा – चोगानिया नव चौकियां – महालक्ष्मी मंदिर – लक्ष्मीनाथ मंदिर – मोचीवाड़ा – आड़ा बाजार होते हुए रात्रि करीब 10 बजे पुनः चारभुजा मंदिर पहुंचेगी जहां आरती के बाद प्रसाद का वितरण किया जाएगा।
शोभायात्रा में भजन मंडलियां, भगवान चारभुजानाथ कि सवारी व बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे, जिससे पूरा नगर धर्ममय वातावरण में रंग जाएगा।
मंगलवार को महिलाओं का सत्संग..
इस धार्मिक आयोजन के अंतर्गत मंगलवार दोपहर 1 बजे से महिलाओं का विशेष सत्संग आयोजित होगा, जो देर शाम तक चलेगा। इसमें महिलाएं भजन-कीर्तन व सत्संग के माध्यम से आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करेंगी।
97 वर्षों की परंपरा को निभाता यह आयोजन आज भी श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक एकता का अद्भुत उदाहरण बना हुआ है।



