सोजत में 94.88 लाख की साइबर ठगी मामले में बड़ा अपडेट: बैंक की त्वरित कार्रवाई से कारोबारी को मिली पूरी रकम वापस

सोजत। सोजत में हाल ही में सामने आए करीब 94.88 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में बड़ी राहत देने वाली खबर सामने आई है। कारोबारी सैय्यद राहत अली के बैंक खाते से साइबर अपराधियों द्वारा निकाली गई 94,88,228 रुपये की पूरी राशि सफल प्रयासों के बाद वापस उनके बैंक खाते में जमा करा दी गई है। इस कार्रवाई से न केवल पीड़ित कारोबारी को राहत मिली है, बल्कि बैंकिंग व्यवस्था की सतर्कता और त्वरित कार्यशैली का भी उत्कृष्ट उदाहरण सामने आया है।

जानकारी के अनुसार, साइबर ठगी की घटना सामने आते ही आईसीआईसीआई बैंक की सोजत शाखा ने बिना समय गंवाए कार्रवाई शुरू कर दी। शाखा प्रबंधक राहुल अग्रवाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल बैंक की डिजिटल फ्रॉड टीम, संबंधित पुलिस अधिकारियों तथा PAYA (पेमेंट सिस्टम एजेंसी) के साथ लगातार समन्वय स्थापित किया। तेज कार्रवाई के चलते महज तीन घंटे के भीतर संदिग्ध ट्रांजेक्शन को ट्रैक कर संबंधित राशि को होल्ड कराया गया, जिससे साइबर अपराधी रकम का दुरुपयोग नहीं कर सके।

इसके बाद आवश्यक बैंकिंग और तकनीकी प्रक्रिया पूरी करते हुए 94,88,228 रुपये की पूरी राशि सुरक्षित रूप से कारोबारी सैय्यद राहत अली के खाते में वापस जमा करा दी गई।

बैंक की सतर्कता बनी मिसाल

इस पूरे घटनाक्रम में आईसीआईसीआई बैंक सोजत शाखा की तत्परता, तकनीकी दक्षता और समय पर निर्णय लेने की क्षमता की व्यापक सराहना हो रही है। यदि शुरुआती कुछ घंटों में कार्रवाई नहीं होती तो इतनी बड़ी राशि की रिकवरी बेहद कठिन हो सकती थी।

क्षेत्रभर में हो रही सराहना

सोजत सहित आसपास के क्षेत्र में बैंक की इस त्वरित कार्रवाई की जमकर प्रशंसा की जा रही है। लोगों का कहना है कि बैंक प्रबंधन, पुलिस और डिजिटल फ्रॉड टीम के बेहतर समन्वय के कारण एक बड़ी आर्थिक क्षति टल गई। शाखा प्रबंधक राहुल अग्रवाल की सक्रिय भूमिका को भी लोगों ने सराहा है।

साइबर ठगी से बचाव के लिए अपील

विशेषज्ञों ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, लिंक, ओटीपी, यूपीआई अनुरोध या संदिग्ध संदेश पर विश्वास न करें। यदि खाते से कोई संदिग्ध लेन-देन दिखाई दे तो तुरंत बैंक, साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस थाने से संपर्क करें। समय पर दी गई सूचना कई मामलों में राशि वापस दिलाने में निर्णायक साबित होती है।

यह मामला इस बात का प्रमाण है कि साइबर ठगी के मामलों में समय पर सूचना, बैंक की त्वरित कार्रवाई और संबंधित एजेंसियों के बेहतर समन्वय से बड़ी से बड़ी वित्तीय हानि को भी रोका जा सकता है।

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