पत्रकार चेतन व्यास की खास रिपोर्ट
सोजत। नगरपालिका चुनाव की तारीख नजदीक आने के साथ ही सोजत शहर की सियासत में हलचल तेज हो गई है। चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे राजनीतिक दलों और दावेदारों ने अभी तक अपने पत्ते पूरी तरह नहीं खोले हैं। हालांकि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही खेमे सोजत नगरपालिका में अपना-अपना बोर्ड बनाने का दावा पूरे आत्मविश्वास के साथ कर रहे हैं। असली तस्वीर टिकट वितरण और नामांकन वापसी के बाद ही साफ होने की बात अधिकांश राजनीतिक नेताओं द्वारा कही जा रही है।
शुक्रवार को जहां रक्षाबंधन के चलते शहर में दिनभर भाई-बहन के पवित्र रिश्ते की खुशियां छाई रहीं, वहीं राजनीतिक गलियारों में भी चुनावी चर्चाओं का दौर जारी रहा। त्योहार के बीच भी राजनीतिक दलों और संभावित प्रत्याशियों ने मतदाताओं से संपर्क साधने का कोई मौका नहीं छोड़ा। इसी बीच स्वतंत्रत मीडिया शैल के चेतन व्यास एवं वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश बौराणा द्वारा विभिन्न राजनीतिक नेताओं और दावेदारों की चुनावी नब्ज टटोलने का प्रयास किया गया।
40 वार्ड, 41 मतदान केंद्रों पर होगा मतदान
सोजत नगरपालिका में कुल 40 वार्ड हैं और इनके लिए कुल 41 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। वार्ड संख्या 24 में मतदाताओं की संख्या अधिक होने के कारण यहां एक अतिरिक्त सहायक मतदान केंद्र बनाया गया है। नगरपालिका चुनाव के लिए 9 सितंबर को मतदान होगा।
चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के साथ ही अब राजनीतिक दलों में टिकट वितरण को लेकर सबसे ज्यादा खींचतान देखने को मिल रही है। पार्टी के टिकट के लिए दावेदार अपने-अपने स्तर पर संगठन के नेताओं से संपर्क साध रहे हैं। कई दावेदार स्थानीय नेताओं के साथ-साथ जयपुर और दिल्ली तक बैठे पार्टी संगठन के नेताओं एवं मंत्रियों तक अपनी पहुंच बनाने में जुटे हुए हैं।
3 सितंबर के बाद सामने आएगी असली तस्वीर
राजनीतिक जानकारों और विभिन्न दलों के नेताओं का कहना है कि फिलहाल चुनावी तस्वीर को लेकर किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। टिकट वितरण और 3 सितंबर को नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि के बाद ही वास्तविक सियासी सूरतेहाल सामने आएगा।
यही कारण है कि फिलहाल दोनों प्रमुख दलों के नेता खुलकर सीटों का गणित बताने से बच रहे हैं। अंदरखाने हर वार्ड में संभावित उम्मीदवारों के नाम, उनकी व्यक्तिगत पकड़, जातीय एवं सामाजिक समीकरण, पिछले चुनावों का प्रदर्शन और जीतने की क्षमता को लेकर मंथन चल रहा है।
टिकट को लेकर दावेदारों की सक्रियता का आलम यह है कि राजनीतिक गलियारों में इसे रथी, अतिरथी, महारथी और धुरंधर नेताओं की जंग के रूप में देखा जा रहा है। हर नेता अपने समर्थकों को अधिक से अधिक टिकट दिलवाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है।
भाजपा खेमे का दावा—इस बार बनेगा भाजपा का बोर्ड
भाजपा खेमे में नगरपालिका बोर्ड बनाने को लेकर खासा उत्साह नजर आ रहा है। भाजपा की ओर से विधायक श्रीमती शोभा चौहान, पूर्व कैबिनेट मंत्री लक्ष्मीनारायण दवे, आनंद भाटी, जुगल किशोर निकुम और पुख सिंह रुंदिया सहित कई प्रमुख नेताओं द्वारा भाजपा के पक्ष में मजबूत माहौल होने का दावा किया जा रहा है।
भाजपा नेताओं का मानना है कि पार्टी के संगठनात्मक ढांचे, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और शहर में मजबूत जनाधार के चलते इस बार भाजपा नगरपालिका में अपना बोर्ड बनाने की स्थिति में है।
हालांकि टिकट वितरण भाजपा के लिए भी आसान चुनौती नहीं है। प्रत्येक वार्ड में कई-कई दावेदार सामने आने से पार्टी नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि किसे टिकट दिया जाए और किसे संतुष्ट रखा जाए। पार्टी के लिए टिकट से ज्यादा महत्वपूर्ण अब टिकट नहीं मिलने के बाद संभावित बगावत को रोकना माना जा रहा है
कांग्रेस ने भी ठोका दावा—बदले माहौल का मिलेगा फायदा
दूसरी ओर कांग्रेस खेमे में भी चुनाव को लेकर उत्साह कम नहीं है। कांग्रेस की महिला जिलाध्यक्ष ऐश्वर्या राजेश सांखला, पूर्व पालिकाध्यक्ष मोहनलाल टांक, मदन पंवार, महेन्द्र पालरिया और बालमुकुन्द गहलोत सहित कांग्रेस के प्रमुख नेताओं का दावा है कि इस बार परिस्थितियां कांग्रेस के पक्ष में हैं।
कांग्रेसी नेताओं का कहना है कि केंद्र के हालात, प्रदेश की बिगड़ती स्थिति और अन्य स्थानीय एवं राजनीतिक कारकों को देखते हुए जनता का रुझान कांग्रेस की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में कांग्रेस के नगरपालिका में बोर्ड बनाने की प्रबल संभावना है।
कांग्रेस के सामने भी सबसे बड़ी चुनौती टिकट वितरण के बाद पार्टी के भीतर संभावित असंतोष को संभालने की होगी। कई वार्डों में एक से अधिक मजबूत दावेदार होने के कारण पार्टी नेतृत्व के सामने सभी को साधने की चुनौती बनी हुई है।
बागी और निर्दलीय बनेंगे सबसे बड़ा फैक्टर?
सोजत नगरपालिका चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर के बावजूद चुनावी परिणाम को प्रभावित करने में बागी और निर्दलीय प्रत्याशियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार दोनों प्रमुख दलों से टिकट नहीं मिलने वाले मजबूत दावेदार यदि निर्दलीय मैदान में उतरते हैं तो वे कई वार्डों में समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। खासकर ऐसे वार्ड जहां प्रत्याशी की व्यक्तिगत पकड़ पार्टी के चुनाव चिह्न से ज्यादा मजबूत है, वहां बागी उम्मीदवार दोनों प्रमुख दलों के लिए परेशानी खड़ी कर सकते हैं।
नामांकन वापसी की तारीख 3 सितंबर इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसी दिन यह स्पष्ट होगा कि कितने बागी मैदान में डटे रहते हैं और कितने पार्टी नेताओं के समझाने-बुझाने के बाद अपना नाम वापस लेते हैं।
सामान्य वार्डों के मतदाताओं की भूमिका पर रहेगी खास नजर
चुनावी गणित में सामान्य वार्डों के मतदाताओं की भूमिका भी इस बार महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राजनीतिक दलों के रणनीतिकार प्रत्येक वार्ड में मतदाताओं के रुझान और सामाजिक समीकरणों का आकलन करने में जुटे हैं।
किस वार्ड में किस प्रत्याशी की व्यक्तिगत पकड़ है, किसके परिवार का राजनीतिक प्रभाव है, कौन सा प्रत्याशी लंबे समय से जनता के बीच सक्रिय है और किस उम्मीदवार का संगठनात्मक आधार मजबूत है—इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर रणनीति बनाई जा रही ह
‘पटकन दल’ और छोटे समीकरण भी बदल सकते हैं चुनावी खेल
सोजत की चुनावी चर्चाओं में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आ रही है—स्थानीय स्तर पर सक्रिय छोटे राजनीतिक समूह और विभिन्न सामाजिक-सामुदायिक समीकरण। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कई वार्डों में जीत-हार का अंतर बेहद कम हो सकता है। ऐसे में छोटे समूहों, स्थानीय प्रभावशाली लोगों और निर्दलीय प्रत्याशियों का समर्थन निर्णायक साबित हो सकता है।
यही कारण है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही खेमे केवल अपने अधिकृत प्रत्याशियों पर ही नहीं, बल्कि संभावित बागियों और निर्दलीय उम्मीदवारों की गतिविधियों पर भी नजर रख रहे हैं।
चाय की थड़ी से पान की दुकान तक चुनावी चर्चा
सोजत नगरपालिका चुनाव की चर्चा अब राजनीतिक कार्यालयों तक सीमित नहीं है। शहर की चाय की होटलों, पान की दुकानों, ढाबों और मोहल्लों की चौपालों पर भी चुनावी गणित को लेकर बहस छिड़ी हुई है।
कहीं भाजपा के बोर्ड बनने की चर्चा है तो कहीं कांग्रेस के पक्ष में माहौल होने का दावा किया जा रहा है। कई जगह लोग वार्डवार उम्मीदवारों के नाम और उनकी जीत-हार का अनुमान लगाते नजर आ रहे हैं।
हालांकि जमीनी हकीकत का पता मतदान के बाद ही चलेगा, लेकिन फिलहाल दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के समर्थक अपने-अपने पक्ष में माहौल होने का दावा कर रहे हैं।
अब नजर टिकट पर, फिर बागियों पर और आखिर में मतदाताओं के फैसले पर
सोजत नगरपालिका चुनाव की पूरी तस्वीर फिलहाल तीन महत्वपूर्ण पड़ावों से होकर गुजरेगी—
पहला पड़ाव—टिकट वितरण।
किस पार्टी से किस दावेदार को टिकट मिलता है, यह चुनावी समीकरण की पहली बड़ी तस्वीर होगी।
दूसरा पड़ाव—3 सितंबर को नामांकन वापसी।
टिकट से नाराज कौन बागी बनकर मैदान में रहता है और कौन पार्टी के फैसले को स्वीकार करता है, यह इस दिन काफी हद तक साफ हो जाएगा।
तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव—9 सितंबर का मतदान।
आखिरकार जनता किसे अपना समर्थन देती है, इसका फैसला मतदान केंद्रों पर मतदाता करेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में ‘किंगमेकर’ कौन?
राजनीतिक विश्लेषकों और शहर की चौपाल चर्चाओं में एक बात पर काफी सहमति नजर आ रही है कि सोजत नगरपालिका के भावी बोर्ड की दिशा केवल भाजपा और कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवार तय नहीं करेंगे।
बागी, निर्दलीय, स्थानीय प्रभावशाली प्रत्याशी, सामान्य वार्डों के मतदाता और छोटे राजनीतिक समीकरण इस चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कई वार्डों में यदि मुकाबला त्रिकोणीय या बहुकोणीय हुआ तो कम वोटों के अंतर से भी परिणाम बदल सकते हैं। ऐसे में चुनाव जीतने के लिए केवल पार्टी का टिकट पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि प्रत्याशी की व्यक्तिगत छवि, वार्ड में पकड़, जनसंपर्क, सामाजिक समीकरण और मतदान के दिन बूथ प्रबंधन भी निर्णायक साबित हो सकता है।
फिलहाल सोजत की सियासी शतरंज पर दोनों प्रमुख दल अपने-अपने मोहरे सजाने में लगे हैं, लेकिन किसी ने भी पूरी रणनीति सार्वजनिक नहीं की है। भाजपा बोर्ड बनाने का दावा कर रही है तो कांग्रेस भी सत्ता की ओर वापसी का भरोसा जता रही है।
अब सबकी निगाहें टिकट वितरण और 3 सितंबर की नामांकन वापसी पर टिकी हैं। इसके बाद ही पता चलेगा कि कौन पार्टी के साथ खड़ा है, कौन बागी होकर मैदान में उतरता है और कौन निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी मुकाबले को रोचक बनाता है।
फिलहाल सोजत की राजनीतिक चौपालों में एक ही सवाल गूंज रहा है—नगरपालिका की कुर्सी पर इस बार भाजपा का कब्जा होगा या कांग्रेस वापसी करेगी?
इस सवाल का जवाब 9 सितंबर को सोजत की जनता अपने मताधिकार से देगी।
सोजत नगरपालिका चुनाव: किसी ने नहीं खोले पत्ते, बोर्ड बनाने के दावे में भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने
टिकट की जंग चरम पर, 3 सितंबर के बाद साफ होगी तस्वीर; बागी, निर्दलीय और सामान्य वार्डों के वोटर तय करेंगे सियासी बाजी!
- संबंधित खबरें -





