राकेश भटनागर
8 नवंबर रविवार को मनाई जाएगी दीपावली, अमावस्या तिथि सुबह 11:27 बजे होगी प्रारंभ; प्रदोष काल में लक्ष्मी-गणेश पूजन का विशेष महत्व, 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा की तैयारी
सोजत सिटी। रोशनी, खुशियों और मां लक्ष्मी की आराधना का महापर्व दीपावली इस वर्ष 8 नवंबर 2026, रविवार को श्रद्धा, उल्लास और धार्मिक परंपराओं के साथ मनाया जाएगा। दीपावली को लेकर घरों, प्रतिष्ठानों और बाजारों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। लोग अपने घरों की साफ-सफाई, रंगरोगन, सजावट और दीपोत्सव की तैयारियों में जुटे हुए हैं।
दीपावली के अवसर पर मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और मां सरस्वती की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष काल और स्थिर वृषभ लग्न में लक्ष्मी पूजन करना विशेष शुभ माना जाता है।
इस बार सोजत के लिए लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 13 मिनट से रात 8 बजकर 10 मिनट तक रहेगा। यह समय प्रदोष काल और वृषभ लग्न का विशेष संयोग है।
सोजत में लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त
पंचांग गणना के अनुसार दीपावली पर सोजत में पूजा के प्रमुख समय इस प्रकार हैं।
- दीपावली: रविवार, 8 नवंबर 2026
- अमावस्या तिथि प्रारंभ: सुबह 11:27 बजे
- अमावस्या तिथि समाप्त: 9 नवंबर दोपहर 12:31 बजे
- प्रदोष काल: शाम 5:50 से रात 8:25 बजे तक
- लक्ष्मी पूजन (वृषभ लग्न): शाम 6:13 से रात 8:10 बजे तक
- चोपड़ा पूजन एवं बही-खाता पूजन: दोपहर लगभग 1:42 से 3:04 बजे तक
- महानिशीथ काल: रात 11:53 से 12:45 बजे तक (अगले दिन)
धार्मिक मान्यता के अनुसार गृहस्थ परिवारों के लिए प्रदोष काल में वृषभ लग्न के दौरान मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है।
लक्ष्मी पूजन में इन बातों का रखें विशेष ध्यान
दीपावली के दिन घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई कर विशेष सजावट की जाती है। शाम को शुभ मुहूर्त में पूजा स्थल पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है।
पूजन में रोली, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, मिठाई, फल और अन्य पूजन सामग्री का उपयोग किया जाता है। इसके बाद परिवार के सभी सदस्य मिलकर लक्ष्मी-गणेश की आरती करते हैं।
व्यापारी वर्ग के लिए दीपावली का विशेष महत्व है। इस दिन नए बही-खाते, चोपड़े, तिजोरी और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में पूजा-अर्चना कर नए आर्थिक वर्ष की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
पूजा की थाली कब उठाएं? जानिए परंपरा
दीपावली पर लक्ष्मी पूजन के बाद पूजा की थाली, कलश, सिक्के, चावल और मिठाई को लेकर भी धार्मिक परंपराएं प्रचलित हैं।
कई परिवारों में मान्यता है कि लक्ष्मी पूजन के बाद पूजा की थाली और पूजन सामग्री को रातभर पूजा स्थल पर ही रखा जाता है। अगले दिन सुबह स्नान आदि करने के बाद धूप-दीप लगाकर मां लक्ष्मी को प्रणाम किया जाता है और फिर पूजा की थाली उठाई जाती है।
स्थानीय परंपरा के अनुसार 9 नवंबर, सोमवार को सुबह 6:30 से 8:30 बजे के बीच पूजा की थाली उठाने का समय रखा जा सकता है। हालांकि इसके लिए अलग से कोई सार्वभौमिक शास्त्रीय मुहूर्त निर्धारित नहीं है। परिवार की परंपरा और स्थानीय पंडित की सलाह को प्राथमिकता दी जा सकती है।
गोवर्धन पूजा 10 नवंबर को
दीपावली के बाद गोवर्धन पूजा और अन्नकूट महोत्सव का विशेष धार्मिक महत्व है। इस वर्ष प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे प्रारंभ होकर 10 नवंबर को दोपहर लगभग 2 बजे तक रहेगी।
उदयातिथि के आधार पर कई पंचांगों में 10 नवंबर, मंगलवार को गोवर्धन पूजा मनाने का उल्लेख है। हालांकि स्थानीय पंचांग के अनुसार इसमें मतभेद हो सकता है।
गोवर्धन पूजा के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन पर्वत की पूजा की जाती है। घरों में गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर पूजा करने तथा अन्नकूट का भोग लगाने की परंपरा है।
बाजारों में दीपावली की तैयारियां, घर-घर सजेगी रोशनी
मेहंदी नगरी सोजत में दीपावली को लेकर उत्साह का माहौल है। बाजारों में रंग-बिरंगी रोशनी, सजावटी सामान, मिट्टी के दीपक, लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाओं और मिठाइयों की खरीदारी को लेकर रौनक बढ़ने की उम्मीद है।
दीपावली केवल दीप जलाने का पर्व नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, भाईचारे, खुशियों और समृद्धि का संदेश देने वाला त्योहार भी है।
सोजत न्यूज़ की अपील: दीपावली का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाएं। मिट्टी के दीपक जलाकर स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहित करें, पर्यावरण संरक्षण का ध्यान रखें तथा सुरक्षित तरीके से त्योहार मनाएं।
सोजत न्यूज़ — सच कहने का दम।
महत्वपूर्ण पंचांग जानकारी: सोजत के लिए उपलब्ध में लक्ष्मी पूजन का समय 6:13 से 8:10 बजे




